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Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर के मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल के जनाना विंग में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब प्रसव के तुरंत बाद दो नवजात बच्चों की पहचान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया.
आरोप है कि लेबर रूम में मौजूद सहायक कर्मी (बाईजी) की लापरवाही और जल्दबाज़ी में दी गई गलत सूचना के कारण एक परिवार दो घंटे तक बेटे के जन्म की खुशी मनाता रहा, जबकि वास्तविकता कुछ और थी. जब अस्पताल स्टाफ ने जानकारी बदली, तो परिजनों ने भारी हंगामा किया और मामला मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा की यूनिट तक पहुंच गया. अंततः प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए डीएनए जांच कराने का फैसला किया.
पीपाड़ सिटी निवासी राकेश नागौरी मंगलवार देर रात पत्नी ममता को प्रसव के लिए एमडीएम अस्पताल लाए थे. बुधवार दोपहर सिजेरियन डिलीवरी हुई. राकेश के अनुसार, लेबर रूम में मौजूद बाईजी ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी, बच्चा गोद में सौंपा और नेग के रूप में 500 रुपये लेकर चली गई. परिवार ने बच्चे की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी, रिश्तेदारों को वीडियो कॉल पर भी दिखाया और बधाइयां मिलने लगी.राकेश का कहना है कि दो घंटे तक हमने उसे अपने बेटे की तरह सीने से लगाए रखा कौन जानता था कि यह सब गलत जानकारी पर आधारित है.
दो घंटे बाद मिली नई जानकारी, विवाद बढ़ा
करीब दो घंटे बाद अस्पताल स्टाफ ने राकेश को बताया कि वास्तव में उसे बेटी हुई है और जो बच्चा गोद में दिया गया था वह किसी अन्य प्रसूता विमला का था. यह सुनकर राकेश और परिजन सन्न रह गए. उन्होंने आरोप लगाए कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सीधी-सीधी धोखाधड़ी है. इससे अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया. इसको लेकर पुलिस को भी परिवाद पेश किया.
विमला, जिसकी यह पहली संतान है, परिजनों का कहना है कि उन्हें भी स्टाफ ने बेटे के जन्म की ही जानकारी दी थी. दस्तावेजों में भी मेल चाइल्ड समय 12:07 लिखा गया है. राकेश का आरोप है कि उसके दस्तावेजों में भी पहले यही लिखा था, बाद में काट-छांट की गई. हंगामा बढ़ता देख एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित मौके पर पहुंचे. उन्होंने दोनों परिवारों को शांत करवाने की कोशिश की लेकिन परिजन डीएनए जांच पर अड़ गए. मामले की गंभीरता देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत मण्डोर एफएसएल टीम को बुलाया. देर शाम तक टीम ने दोनों नवजातों और दोनों माता-पिता के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए.
उप अधीक्षक डॉ. संदीप अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि कौन सा बच्चा किस प्रसूता का है. घटना की जांच के लिए समिति बना दी गई है. पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया. दोनों प्रसूताओं की डिलीवरी एक ही समय हुई.
ममता और विमला दोनों की सिजेरियन डिलीवरी बुधवार दोपहर लगभग एक ही समय-12 बजकर 7 मिनट-पर हुई. यही बात सबसे बड़ा भ्रम बन गई. दोनों परिवारों को स्टाफ द्वारा बेटे के जन्म की ही जानकारी दी गई. जन्म की सूचना देकर बधाई और नेग लेने का सिलसिला चलता रहा है. 2011 में उम्मेद अस्पताल में भी इसी तरह बच्चा बदलने का गंभीर विवाद हुआ था तब डीएनए जांच जयपुर में करानी पड़ी थी और सात दिन तक अस्पताल में गतिरोध बना रहा. इसके बावजूद यह प्रथा आज भी जारी है.
इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लेबर रूम में कड़ाई से निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी बाईजी या सहायक स्टाफ को प्रसूता परिजन को बिना पुष्टि के कोई जानकारी नहीं देनी है. बच्चा बाहर लाते समय पूरी जांच और दस्तावेज पुष्टि अनिवार्य की गई है. दोनों परिवारों के नमूने ले लिए गए हैं. डीएनए रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति साफ होगी. अस्पताल परिसर में दोनों परिवार डीएनए रिपोर्ट की प्रतीक्षा में मौजूद रहे. रिपोर्ट आने के बाद ही यह विवाद समाप्त होगा कि आखिर किसका बच्चा किसके पास गया.
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