Jodhpur News: राजस्थान का सबसे बड़ा ड्रग किंगपिन गिरफ्तार, एक लाख के ईनामी गोवर्धनराम को साइक्लोनर टीम ने दबोचा

Jodhpur News: जोधपुर साइक्लोनर टीम ने मादक पदार्थों की तस्करी के राजस्थान के सबसे बड़े किंगपिन गोवर्धनराम को गिरफ्तार किया. ₹1 लाख का ईनामी अपराधी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ा.

Jodhpur News: राजस्थान का सबसे बड़ा ड्रग किंगपिन गिरफ्तार, एक लाख के ईनामी गोवर्धनराम को साइक्लोनर टीम ने दबोचा

Jodhpur News: मादक पदार्थो की तस्करी का राजस्थान का सबसे बड़ा वांछित किंगपिंन गोवर्धनराम आखिरकार चढ़ा जोधपुर साइक्लोनर टीम के हत्थे. मारवाड में तस्करी के चौथे आधारभूत स्तम्भ गोरधनराम पर राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से घोषित था एक लाख रूपये का ईनाम.जोधपुर रेंज की साइक्लोनर टीम की धुंआधार कार्रवाईयों का कहर लगातार अपराधियों की कमर तोड रहा हैं.

जोधपुर रेंज पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि साइक्लोनर टीम ने लगातार कहर बरपाते हुए मादक द्रव्यों के धन्धे को निर्मूल करने की दिशा में काम करते हुए इस कारोबार के एक मुख्यतम सूत्रधार गोरधनराम को बड़े ही खतरनाक व दुस्साहसी ऑपरेशन में आज सुबह तड़के गिरफ्तार करने में सफलता पायी हैं.


गिरफ्तार सूत्रधार का नाम गोरधनराम पुत्र डूंगरराम, उम्र 32 साल, निवासी भुरटिया, पुलिस थाना नागाणा, जिला बाडमेर हैं. गोरधनराम की गिरफ्तारी पर 01 लाख रूपये का ईनाम पुलिस मुख्यालय की ओर से घोषित हैं. पिछले चार वर्षों से फरार चल रहे अन्तरप्रान्तीय कुख्यात तस्कर गोरधनराम पर दर्ज प्रकरणों की संख्या दो अंको में अभी तक पता चली हैं. फिलहाल मध्यप्रदेश व गुजरात में दर्ज प्रकरणों की सूची मंगवाई जा रही है. अपने 12 वर्षों के आपराधिक करियर में गोरधनराम पर मादक द्रव्यों की तस्करी, हत्या का प्रयास, मारपीट, वाहन चोरी, आगजनी, आर्म्स एक्ट इत्यादि के कई सारे मुकदमें दर्ज हैं.

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शुरुआती प्रकरण में दो-तीन बार जेल की हवा खा चुकने के बाद गोरधनराम फिर कभी भी पुलिस की गिरफ्तारी में नहीं आया. गोरधनराम का बड़ा भाई दिनेश भी कुख्यात तस्कर रह चुका है जो मादक द्रव्यों की तस्करी के प्रकरणों में पांच बार जेल की हवा खा चुकने के बाद आजकल मध्यप्रदेश के जबलपुर में सड़क निर्माण का ठेकेदार बन बैठा है. दिनेश का बाडमेर के बलदेव नगर आलीशान रिहायशी मकान भी हैं.


होनहार बिरवान के होत है जिनके पात
बचपन से ही बड़े भाई दिनेश की तस्करी के धंधे में बहुत रूचि लेता रहा गोरधन. आठवी में फेल होकर अपराध की दुनिया में विशेष योग्यता लेकर डिग्री हासिल कर ली गोरधन ने. शुरूआती प्रकरणों में हीं वाहन जलाने, पुलिस कस्टडी से हत्या के आरोपी को छुडाकर भगाने तथा सटीक निशाने के साथ फायरिंग का जौहर दिखाया गोरधनराम ने. शीघ्र ही गोरधन पर निगाह ठिकी मारवाड के तस्करी के तत्कालीन दोनों मुख्य सूत्रधार विरधाराम सियोल एवं खरताराम गोदारा की.

विडम्बना यह कि अल्प समय में ही गोरधन दोनों की आंख की पुतली बन बैठा और फिर शुरू हुआ. मध्यप्रदेश, राजस्थान सीमा से वाहन में भर भर कर डोडा चूरा राजस्थान व गुजरात में आपूर्ति करने का सिलसिला जो एक दशक तक फलता फूलता रहा. वर्ष 2018 में पाली में पुलिस से घिर जाने के बाद खरताराम गोदारा फायरिंग में मरा तो दूसरा गुरू विरधाराम सियोल इसी वर्ष सडक दुर्घटना में काल कलवित हो गया. उसके बाद तो गोरधनराम नशे की दुनिया का स्वयंभू सरताज बन बैठा.

गुरू गुड़ रह गये चेले चीनी बन गये-
दोनों कुख्यात तस्कर उस्तादों के चार मुख्य शिष्य थे जो पूरे राजस्थान में तस्करी के चार आधार स्तम्भ बनकर निखरे थे. चारों आधार स्तम्भों पर पंजा चल चुका है साइक्लोनर टीम का एवं आखिरी स्तम्भं के रूप में ढहा है गोरधन का स्तम्भ. पहला स्तम्भ - सावराराम उर्फ सांवरिया जिसकी गिरफ्तारी पर 70 हजार रूपये का ईनाम था.

पिछले वर्ष ऑपरेशन बंशीधर चलाकर साइक्लोनर टीम ने इसको पकडा था. दूसरा स्तम्भ भजनलाल था जिसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का ईनाम घोषित था. जिसे इसी वर्ष ऑपरेशन रेड प्रेयरीज चलाकर दबोचा गया. तीसरा स्तंम्भ हनुमानाराम था जिसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रूपये का ईनाम था जो हाल ऑपरेशन कंटक मोचक में साइक्लोनर टीम का शिकार हुआ. चौथे स्तंम्म गोरधनराम की गिरफ्तारी पर भी एक लाख रूपये का ईनाम घोषित था जो आज ऑपरेशन आरटीआई में साइक्लोनर टीम के हत्थे चढ़ा.

अनूठा अंदाज व दुस्साहस की पराकाष्ठा -
जब मादक द्रव्यों की तस्करी के बडे बडे सरगना एक के बाद एक करके धराशायी हो रहे थे, तो शेष बचे धुरंधर ईलाका छोडकर भाग रहे थे या धंधा बदल रहे थे, पर गोरधनराम ने इसी में स्वर्णिम अवसर देखा और अपने धंधे को परवान चढ़ाता गया. जब बाकी तस्कर इलाका छोडकर भाग रहे थे तो गोरधनराम ने कभी भी मारवाड का इलाका नहीं छोड़ा. बस तरकरी के लिए सप्ताह में एक बार मध्यप्रदेश सीमा पर जाता और शेष समय मारवाड में ही ऐश मौज करता. स्वयंभू सरगना बनने के बावजूद भी गोरधनराम माल लाने व आपूर्ति करने हमेशा खुद गाडी चलाता हुआ जात्त और अकेले ही माल लेकर आता था.

मंगलवार का गजब का शगुन -
किसी ज्योतिषी ने गोरधनराम को बता रखा था कि मंगलवार को उसका कोई भी दुश्मन बाल बांका नहीं कर सकता . इसी को आधार बनाकर गोरधनराम प्रत्येक सप्ताह के मंगलवार को ही मध्यप्रदेश से माल लेकर निकलता तथा कभी भी पकड़ा नहीं गया. घर के सारे समारोह यहां तक कि फुफेरे भाई की परसों की शादी भी गोरधन राम ने मंगलवार को ही रखवायी.

चन्द्रशेखर आजाद का फैन गोरधन
बचपन से ही गोरधनराम क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद का बड़ा फैन था तथा उसने सदा आजाद रहने की कसम खायी थी जो गुरू खरताराम की मौत के बाद अत्यन्त मजबूत हो गयी. गोरधनराम ने कसम खायी थी कि वह कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढेगा तथा पुलिस अगर उसे घेर भी ले तो वह कई पुलिस वालों को मारकर स्वयं मर जायेगा पर जिन्दा नहीं पकड़ा जायेगा. इसी कसम को निमाते हुए गोरधनराम की तीन बार पुलिस से मुठभेड हुई बौर तीनों ही बार पुलिस पर फायरिंग कर बच निकलने में कामयाब हो गया था. वर्ष 2020 में सिणधरी में पुलिस पर फायरिंग कर बच निकला. 2023 में पचपदरा पुलिस पर फायरिंग कर निकल भागा तो दिसम्बर 2024 में पाली सदर में साइक्लोनर सैल से मुठभेड और फायरिंग में निकल गया था गोरधन.

पकडे जाने की पटकथा -

बला का दुस्साहसी गोरधन भारवाड इलाके में तो रहता ही था, सगे संबंधी के घरों पर होने वाले समारोह में भी उपस्थित होने से नहीं चूकता था. हर समारोह में उपस्थित होता बला की तरह, रस्म निभाता ओर किसी छलावे की तरह गायब हो जाता, पर पिस्टल सदा साथ रहती. अपनी पिस्टल पर खुद से ज्यादा भरोसा करता था गोरधनराम. 9 एमएम की विदेशी पिस्टल और दो भरे हुए मैगजीन सदा साथ रखा था गोरधन.

पूर्व में दो बार ऐसे समारोहों में दबिश दी थी साइक्लोनर सैल में पर असफलता ही हाथ लगी.
एक समारोह में कुछ मिनट पहले निकल गया तो दूसरे में घर में न सोकर बाहर वाहन में सोने के चलते बच निकला. दोनों ही दिन मंगलवार होने का कारण भी उसके पक्ष में रहा.

इन असफलताओं से सीख लेकर साइक्लोनर सैल को गोरधन की पूरी कार्यप्रणाली का अंदाजा लग गया. आखिरकार, लगातार प्रयास करने पर पिता के धर्म बहन के बेटे की शादी की सारी व्यवस्था गोरधन ने ही की है, यह खबर साइक्लोनर टीम तक पहुंच गयी. दिनांक 03.06.2025 को फलसूड ईलाके में बारात लेकर फुफेरे भाई को लेकर आया गोरधन पर साइक्लोनर सैल की कार्रवाई से पूर्व ही बलत्ता बन.

केटरर की सहयोगी बनी साईक्लोनर टीम
फलसूंड में समारोह में केटरर के साथ हेल्पर के रूप में साइक्लोनर के योद्धा भी थे. उन्होने समारोह में गोरधन की तस्वीर भी ले ली पर टीम के आने से पहले गोरधन निकल गया. साइक्लोनर टीम ने धैर्य रखा. पहले फेरे की रस्म वापसी पर फिर से आना संभावित था गोरधन का. केटरर के साथ के सहयोगी उक्त समारोह में मदद के बहाने से रूके रहे.

चालाक गोरधन ने अपनी स्कोर्पियों तो भाई को दे दी एवं खुद सतर्क रहकर साले की कैम्पर से पीछे से आया. गोरधन ने कैम्पर में ही बिस्तर लगाकर सोने की व्यवस्था कर रखी थी, जो टीम की निगाह में आ गयी. सतर्कता बरतते हुए गोरधन ने पूरी रात पलड लाईट जलवाकर रखी कि कोई भी दूर से आता दिख सके. रातभर समारोह मनाने के बाद तड़के सुबह सोने गया गोरधन तो मोर की पहली किरण के साथ ही फ्लड लाईट भी ऑफ कर दी गयी. केटरर बने साथियों से इशारा मिलते ही एक किमी पैदल भागी साइक्लोनर टीम और बाज तरह की झपट कर सीधे कैम्पर में सोये गोरधन को दबोच लिया.

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