Jodhpur Crime News: साल में 100 दिन बेचता था ड्रग और 250 दिन करता था आराम, नशा तस्करी को मानता था सांवलिया सेठ और नाथद्वारा महाराज की कृपा, सालाना था करोड़ों का टर्नओवर

Jodhpur Crime News: "जोधपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई! ड्रग्स तस्करी के बड़े मामले में भजनलाल और रूपाराम गिरफ्तार. दोनों आरोपी ड्रग्स की खेप लाने से पहले सांवलिया सेठ और नाथद्वारा महाराज के मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे. भजनलाल सालाना 1-1.5 करोड़ रुपये की आमदनी करता था. पुलिस की इस कार्रवाई से नशे के कारोबार पर लगाम लगाने की उम्मीद. 

Jodhpur Crime News: साल में 100 दिन बेचता था ड्रग और 250 दिन करता था आराम, नशा तस्करी को मानता था सांवलिया सेठ और नाथद्वारा महाराज की कृपा, सालाना था करोड़ों का टर्नओवर

Jodhpur Crime News: जोधपुर पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए भजनलाल और उसके साथी रूपाराम को गिरफ्तार किया है. ये दोनों ड्रग्स की खेप लाने से पहले सांवलिया सेठ मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे और फिर नाथद्वारा महाराज के यहां धोक लगाते थे. उनका मानना था कि इससे उन्हें नशे की दुनिया में सफलता मिलेगी. भजनलाल सालाना एक से डेढ़ करोड़ रुपये की आमदनी मादक पदार्थ की तस्करी से करता था. पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को पकड़ लिया.

ड्रग्स तस्कर भजनलाल डेढ़ साल से फरार था, जिस पर पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. वह 11 साल से नशे के कारोबार में लिप्त था और खुद को इस दुनिया का बेताज बादशाह बनाना चाहता था. आईजी विकास कुमार के अनुसार, भजनलाल हर हफ्ते मध्यप्रदेश से 3-4 क्विंटल डोडा चूरा राजस्थान लाता था, जिससे पिछले सालभर में करीब 15 से 17 टन डोडा चूरा मारवाड़ इलाके में आपूर्ति कर चुका था.

भजनलाल मादक पदार्थ की खेप लाने से पहले सांवलिया सेठ के मंदिर में हाजिरी लगाता था और वापसी पर नाथद्वारा में धोक लगाने जाना नहीं भूलता था. वह अपने काम में बेहद सतर्क और चालाक था. वह कभी भी एक वाहन का दोबारा उपयोग नहीं करता था, न ही एक मोबाइल नंबर को एक दिन से ज्यादा चलाता था. इसके अलावा, वह एक स्थान पर एक दिन से ज्यादा नहीं रुकता था और न ही एक मार्ग से लगातार यात्रा करता था.

भजनलाल ने अपनी आपराधिक यात्रा कुख्यात तस्कर विरदाराम सियोल के साथ ड्राइवरी करते हुए शुरू की थी और धीरे-धीरे वह खुद एक शक्तिशाली तस्कर बन गया. उसका एक करीबी सहयोगी और पड़ोसी था जो उसका ड्राइवर बनकर उसके साथ रहता था. पिछले साल एक सड़क दुर्घटना में कंधे की चोट के बाद, भजनलाल ने अपने एक और करीबी रूपाराम को प्रशिक्षित करना शुरू किया, जिसे वह अपना अस्थायी उत्तराधिकारी बनाना चाहता था. रूपाराम मध्यप्रदेश से पैरोल पर फरार होकर भजनलाल का शागिर्द बन गया था.

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