Jaisalmer के इस इलाके में जान-बूझकर लगाई जाती है आग, वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

आग बुझने पर कुछ दिन बाद आकर अधजली लकड़ियों पर रेत डालकर देते हैं फिर 5 दिन 10 दिन बाद आकर कोयला इकट्ठा कर लेते हैं.

Jaisalmer के इस इलाके में जान-बूझकर लगाई जाती है आग, वजह जानकर उड़ जाएंगे होश
5 साल में 40 से ज्यादा बार आग लग चुकी है. एक लाख से अधिक पेड़ जलकर राख हो गए हैं.

Jaisalmer: जिले के नहरी क्षेत्र में गर्मी और आंधी का दौर शुरू होते ही नाचना क्षेत्र में आग (Fire Incidents) की घटनाएं होने लगती हैं. आमतौर पर यही माना जाता है कि आग आंधी के चलते आसपास से उड़ कर आने वाली चिंगारी या फिर किसी राहगीर द्वारा जलती हुई बीड़ी-सिगरेट आदि फेंकने से आग लग जाती है.

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आग में हर बार वनस्पति को भारी नुकसान होता है. विभाग के जिम्मेदार भी यही मानते हैं कि कई बार ज्यादा गर्मी या किसी चिंगारी से आग लगती हैं और तेज हवाओं से आग फैल जाती हैं. 

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इस पर पता करने पर क्षेत्र में कोयले की भरमार देखने को मिला. बोरियो में कोयला पैक हो रहा था. यह वही जगह है, जहां 25 दिन पहले आग लगी थी. आसपास के लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि आग कोयले का अवैध कारोबार करने वाले लोग लगाते हैं. हर साल जून से अगस्त के बीच ही आग लगती है नाचना नहरी क्षेत्र में लंबी दूरी है क्षेत्र में यहां लंबी दूरी में पेड़ लगे हुए हैं.

5 साल में 40 से ज्यादा बार लग चुकी आग 
जानकारी के अनुसार, 5 साल में 40 से ज्यादा बार आग लग चुकी है. एक लाख से अधिक पेड़ जलकर राख हो गए हैं. हजारों टन कोयले का गोरख धंधा चलता है. इलाके में आग लगने के लिए कोयले के अवैध कारोबार करने वाले लिप्त हैं. प्रशासन और वन विभाग मशक्कत करके 2 दिन से 3 दिन में आग पर काबू पा लेते हैं इनका आग लगने का समय यही रहता है क्योंकि इस दौरान तेज आंधियां चलती हैं, इसलिए इन्हें आग लगाने के लिए कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती है.

किसी एक जगह पर आग लगाकर यह लोग चले जाते हैं. आग बुझने पर कुछ दिन बाद आकर अधजली लकड़ियों पर रेत डालकर देते हैं फिर 5 दिन 10 दिन बाद आकर कोयला इकट्ठा कर लेते हैं.

Reporter- Shankar Dan