Jodhpur News: बेटी पढ़ना चाहती थी, समाज ने थोप दी शादी, पंचों के फरमान से पूरा परिवार बहिष्कृत, मामला हाईकोर्ट पहुंचा

 Family Ostracized by Panchayat for Opposing Child Marriage: राजस्थान के बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक बेटी केवल पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, लेकिन गांव के पंचों ने उसकी शादी के लिए दबाव बनाया और विरोध करने पर पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया तथा आर्थिक जुर्माना ठोका. यह मामला जोधपुर हाईकोर्ट में है. 

Jodhpur News: बेटी पढ़ना चाहती थी, समाज ने थोप दी शादी, पंचों के फरमान से पूरा परिवार बहिष्कृत, मामला हाईकोर्ट पहुंचा
Image Credit: Family Ostracized by Panchayat for Opposing Child Marriage

Jodhpur News: राजस्थान के बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र से सामने आया एक मामला न केवल सामाजिक सोच पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कानून-व्यवस्था की निष्क्रियता को भी उजागर करता है. यहां एक बेटी सिर्फ पढ़ना चाहती थी, लेकिन समाज के तथाकथित पंचों ने उसकी शादी का दबाव बनाकर पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया. मामला अब राजस्थान हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है. मामले की सुनवाई जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि उनके पास समाज द्वारा बहिष्कार करने और आर्थिक दंड की मांग से जुड़े वीडियो रिकॉर्डिंग के पुख्ता सबूत मौजूद हैं. इसके बावजूद बाड़मेर पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है.

बताया गया कि गुड़ामालानी क्षेत्र में युवती पढ़ाई जारी रखना चाहती थी. समाज के पंच लगातार परिवार पर उसकी शादी कराने का दबाव बना रहे थे. बेटी की जिद और भविष्य को देखते हुए परिवार ने पढ़ाई का समर्थन किया, लेकिन यह फैसला समाज के पंचों को नागवार गुजरा. नतीजतन पंचों ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और उस पर आर्थिक दंड भी थोप दिया. इस मामले में याचिकाकर्ता गज्जाराम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता पुखराज गहलोत ने बताया कि हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता अपने सभी दस्तावेज और सबूत पुलिस अधीक्षक, बाड़मेर के समक्ष प्रस्तुत करे. इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई की जाएगी.

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कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कानून से ऊपर कोई भी सामाजिक पंचायत स्वीकार्य नहीं है. अधिवक्ता ने यह भी कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है. बाड़मेर जिले में आज भी कई जगह समाज के पंच और तथाकथित पंचायती तुगलकी फरमान जारी कर लोगों की जिंदगी को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं. देश जहां विकसित भारत की ओर बढ़ने की बात कर रहा है, वहीं ऐसी मानसिकता समाज को पीछे धकेलने का काम कर रही है.

गौरतलब है कि राजस्थान हाई कोर्ट पहले भी सामाजिक पंचायतों के खिलाफ सख्त टिप्पणी कर चुका है और इन्हें अवैध बताते हुए एक कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब कर चुका है. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पुलिस की लीपा-पोती और निष्क्रियता ऐसे मामलों को बढ़ावा दे रही है. अब देखना होगा कि इस मामले में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है.

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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