Jodhpur News: हाई-वोल्टेज ड्रामा का अंत, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, SHO-रीडर सस्पेंड होने के बाद वकीलों ने वापस लिया बहिष्कार

Rajasthan News: अधिवक्ता दंपति से मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित थाने के SHO और रीडर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया. इसके बाद जयपुर बार एसोसिएशन सहित पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं ने अपना स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया.

Jodhpur News: हाई-वोल्टेज ड्रामा का अंत, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, SHO-रीडर सस्पेंड होने के बाद वकीलों ने वापस लिया बहिष्कार
Image Credit: Jodhpur Crime News

Jodhpur Crime News: जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में वकील दंपति के साथ हुए दुर्व्यवहार और बदसलूकी के मामले ने मंगलवार को शहर में जबरदस्त तनाव पैदा कर दिया. देर रात से दोपहर तक चले घटनाक्रम में पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया. जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट के तत्काल हस्तक्षेप और एसएचओ हमीर सिंह भाटी तथा रीडर नरेंद्र सिंह के निलंबन के बाद स्थिति शांत हुई. इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने अपना स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार भी वापस ले लिया.

घटना कैसे शुरू हुई

Add Zee News as a Preferred Source

वरिष्ठ अधिवक्ता भरत सिंह राठौड़ और उनकी पत्नी जो स्वयं हाईकोर्ट की अधिवक्ता हैं एक रेप पीड़िता को बयान दर्ज कराने सोमवार देर रात कुड़ी थाने लेकर पहुँचे थे. आरोप है कि थाने में न केवल लापरवाही बरती गई, बल्कि एक सिविल ड्रेसधारी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से पीड़िता का बयान लिया जा रहा था. जब अधिवक्ता ने एसएचओ से इसका विरोध किया, तो एसएचओ कथित तौर पर भड़क गया और अधिवक्ता भरत सिंह को धक्का देकर कमरे में बंद कर दिया. विरोध करने पर महिला कांस्टेबल ने भी अधिवक्ता की पत्नी को जबरन हटाने की कोशिश की. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो गया, जिसने अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैला दिया.

रातभर थाने के बाहर जुटे अधिवक्ता

घटना सामने आते ही देर रात बड़ी संख्या में अधिवक्ता थाने के बाहर एकत्रित होने लगे. दोनों प्रमुख वकील संगठनों—राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी. रातभर थाने के बाहर प्रदर्शन चलता रहा, और सुबह तक आंदोलन उग्र होता गया. अधिवक्ताओं ने एसएचओ का पुतला भी जलाया तथा तत्काल निलंबन की मांग पर अड़े रहे.

हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान, पुलिस अधिकारियों को तलब

सुबह 10:30 बजे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य व अधिवक्ता सुशील विश्नोई ने इस मामले को कोर्ट में मेंशनिंग के माध्यम से रखते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है और न्याय व्यवस्था के लिए हानिकारक है. कोर्ट ने तुरंत सख्ती दिखाते हुए जोधपुर के पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश और डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल को 11:15 बजे तक कोर्ट में पेश होने का मौखिक आदेश दिया. साथ ही इस प्रकरण को स्व प्रेरणा से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया.

11:30 बजे जब मामले की सुनवाई दोबारा शुरू हुई, तब पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश, डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल और एडीसीपी रोशन मीणा कोर्ट में उपस्थित हुए. वायरल वीडियो को कोर्ट में चलाया गया, जिसके बाद डिवीजन बेंच में एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने इसे अत्यंत शर्मनाक, अमर्यादित और कानून के खिलाफ बताया. कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस की कठोरता अपराधियों तक सीमित होनी चाहिए, अधिवक्ताओं के प्रति नहीं.

कॉर्डिनेशन कमेटी सक्रिय न होने पर कोर्ट की नाराजगी

कोर्ट ने याद दिलाया कि 2019 में भारत यादव बनाम राज्य मामले में राज्य के हर जिले में अधिवक्ता पुलिस न्यायपालिका के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया गया था, परंतु ऐसी कमेटी जोधपुर में सक्रिय नहीं है. कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कमेटियों को पुनर्गठित कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. साथ ही पुलिस कमिश्नर को शाम तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा गया.

पुलिस कमिश्नर का आश्वासन और कार्रवाई में देरी

कोर्ट में पुलिस कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि दोषी अधिकारियों पर सख्त विभागीय एक्शन लिया जाएगा और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद भी एसएचओ व रीडर के निलंबन को लेकर दोपहर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अधिवक्ताओं का आक्रोश और बढ़ गया. वरिष्ठ अधिवक्ता बार एसोसिएशन अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया और अध्यक्ष आनंद पुरोहित ने फिर से एक्टिंग चीफ जस्टिस से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया.

एसएचओ व रीडर निलंबित, आंदोलन समाप्त

उच्च स्तरीय बातचीत और कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी के बाद करीब ढाई बजे एसएचओ हमीर सिंह भाटी और रीडर नरेंद्र सिंह के निलंबन के आदेश जारी किए गए. इसके बाद बार एसोसिएशन पदाधिकारियों ने थाने पहुँचकर अधिवक्ताओं से बातचीत की और स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा की. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि भविष्य में ऐसे व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा.

अगली सुनवाई 8 दिसंबर को

हाईकोर्ट ने मामले को औपचारिक रूप से दर्ज करते हुए अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2025 को तय की है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस और अधिवक्ता दोनों ही न्याय व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं, और उनके बीच सम्मान, संवाद और संतुलन बना रहना अनिवार्य है.

इन्होने की पैरवी

एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ सचिन आचार्य,सहयोगी अधिवक्ता सुनील पुरोहित,अधिवक्ता दिग्विजय सिंह जसोल,अधिवक्ता सुशील विश्नोई ,राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रतना राम ठोलिया,राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आनन्द पुरोहित महासचिव मनीष टांक सहित कई अधिवक्ताओं ने पैरवी की. वही सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार,अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर विश्नोई,अतिरिक्त महाधिवक्ता बंशीलाल भाटी,अतिरिक्त महाधिवक्ता सज्जनसिंह राठौड ने पैरवी की.

राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Jodhpur News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!

ट्रेंडिंग न्यूज़

About the Author

Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
Read More