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Hanuman Beniwal: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और जोधपुर सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन काटने का मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां बुधवार को जस्टिस सुनील बेनीवाल की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने प्रेमसुख बेनीवाल, जिनके नाम पर आवास है, को 72 घंटे में 6 लाख रुपये जमा करवाने और कनेक्शन बहाल करने के निर्देश दिए.
बकाया बिजली बिल 10 लाख 75 हजार 658 रुपये होने के कारण अजमेर डिस्कॉम ने 2 जुलाई को कनेक्शन काट दिया था. सांसद ने इसे राज्य सरकार की राजनीति करार देते हुए अपने भाई प्रेमसुख के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. नागौर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता अशोक चौधरी ने बताया कि बकाया वसूली अभियान के तहत प्रेमसुख का बिल सबसे अधिक था, और 6 बार नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ.
हाईकोर्ट ने सैटलमेंट कमेटी को शेष राशि के निपटारे के लिए एक माह का समय दिया. कोर्ट के अनुसार, 6 लाख रुपये जमा होने के 3 दिन के भीतर कनेक्शन जोड़ा जाएगा. इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई, 7 अगस्त, 11 अगस्त, 21 अगस्त, 4 सितंबर और 10 सितंबर को हुई.यह मामला जोधपुर और नागौर में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह एक सांसद से जुड़ा है. कोर्ट का यह फैसला बिजली बिल बकाया और डिस्कॉम की कार्रवाइयों पर नई बहस छेड़ सकता है.
बिजली कनेक्शन काटने पर सीएम पर फोड़ दिया था ठीकरा
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के आवास का बिजली कनेक्शन काटने का मामला तूल पकड़ गया है. विद्युत विभाग के अनुसार, सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर registered इस कनेक्शन पर 10 लाख 75 हजार 658 रुपये का बिल बकाया था. कई बार नोटिस देने के बावजूद बिल का भुगतान नहीं होने पर अजमेर डिस्कॉम ने कनेक्शन काट दिया. इस कार्रवाई से नाराज सांसद बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि यह कनेक्शन उनके भाई के नाम पर है और बिल में गड़बड़ी थी.
बेनीवाल ने बताया कि उन्होंने 2 लाख रुपये से अधिक की राशि पहले ही जमा करवा दी थी, और मामला समझौता समिति में लंबित था. इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कलेक्टर, डिस्कॉम के सीएमडी और एमडी को फोन कर कनेक्शन काटने और फोटो भेजने का आदेश दिया. बेनीवाल ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए सीएम पर निशाना साधा. यह विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है, जहां कोर्ट ने 72 घंटे में 6 लाख रुपये जमा करवाने और सैटलमेंट कमेटी को एक माह में प्रकरण निपटाने के निर्देश दिए हैं. यह मामला नागौर और जोधपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है, और बिजली बिल बकाया व डिस्कॉम की कार्रवाइयों पर नई बहस छिड़ गई है.
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