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Jodhpur News: जोधपुर नायियों की ढाणी, गिरा, पोस्ट गिड़ा, जिला बालोतरा निवासी भेरा राम के पांच वर्षीय पुत्र भोमा राम ने अंगदान के माध्यम से गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए आशा की नई किरण जगाई है. गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बाद भोमा राम को ब्रेन डेड घोषित किया गया. अत्यंत दुःख की इस घड़ी में, उनके परिजनों ने अद्भुत साहस और करुणा का परिचय देते हुए अंगदान की सहमति प्रदान की. इस निस्वार्थ निर्णय के माध्यम से एक लिवर एवं दो किडनी का दान किया गया, जिससे कई मरीजों को नया जीवन मिला और यह एम्स जोधपुर का दूसरा बाल अंगदान बना.
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भोमा राम को 15 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि लगभग 12:00 बजे बार-बार दौरे पड़ने, चेतना में कमी और अचेत अवस्था की शिकायत के साथ एम्स जोधपुर के पीडियाट्रिक इमरजेंसी विभाग में लाया गया. उन्हें तुरंत पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर टीम द्वारा गहन चिकित्सा प्रदान की गई. आक्रामक उपचार के बावजूद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई. सीटी स्कैन सहित किए गए परीक्षणों में गंभीर सेरेब्रल एडिमा पाई गई. इसके बाद उन्हें रिफ्रैक्टरी स्टेटस एपिलेप्टिकस तथा सेंट्रल डायबिटीज इंसिपिडस हुआ. बार-बार किए गए न्यूरोलॉजिकल परीक्षणों में ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्स की अनुपस्थिति की पुष्टि हुई और उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया, जो एक अपरिवर्तनीय एवं कानूनी रूप से मान्य स्थिति है.
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इस संवेदनशील समय में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम ने अत्यंत संवेदना और मानवीय दृष्टिकोण के साथ परिजनों से संवाद किया. कई काउंसलिंग सत्रों के माध्यम से ब्रेन डेथ की अवधारणा एवं अंगदान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया तथा यह बताया गया कि उनके बच्चे के अंग अन्य मरीजों को जीवनदान दे सकते हैं. सोट्टो, रोट्टो एवं नोटो के समन्वय से एक लिवर को हवाई मार्ग से इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलियरी साइंसेज (ILBS), नई दिल्ली भेजा गया, जबकि दोनों किडनी को एम्स जोधपुर में पंजीकृत एक ही मरीज में प्रत्यारोपित किया गया.
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यह संपूर्ण अंगदान एवं प्रत्यारोपण प्रक्रिया प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी, कार्यकारी निदेशक, एम्स जोधपुर एवं डॉ. अभिषेक भारद्वाज, चिकित्सा अधीक्षक के नेतृत्व में संपन्न हुई. बच्चे के उपचार की शुरुआत पीडियाट्रिशियन डॉ. भरत चौधरी द्वारा की गई, जो भर्ती के समय उनका उपचार करने वाले प्रथम चिकित्सक थे.
इस मानवीय मिशन की सफलता में अनेक विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. यूरोलॉजी विभाग से डॉ. ए. एस. संधु, डॉ. गौतम राम चौधरी, डॉ. शिव चरण नावरिया (नोडल अधिकारी – ट्रांसप्लांट प्रोग्राम), डॉ. दीपक भिरुड़ एवं डॉ. महेंद्र सिंह ने अहम भूमिका निभाई. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी टीम में डॉ. वैभव वार्ष्णेय एवं डॉ. लोकेश अग्रवाल शामिल रहे. एनेस्थीसिया सहयोग डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. भरत पालीवाल द्वारा प्रदान किया गया. न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन में डॉ. राघवेन्द्र शर्मा तथा पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी इनपुट में डॉ. लोकेश सैनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स कुलदीप सिंह, नेहा, रमेश एवं दशरथ द्वारा संपूर्ण प्रक्रिया का निर्बाध समन्वय किया गया, जिसमें नर्सिंग, प्रशासन, तकनीकी इकाइयों, यातायात विभाग एवं अन्य सहयोगी टीमों का भी सहयोग रहा.
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यह घटना एम्स जोधपुर का 10वां कैडैवरिक अंगदान तथा दूसरा बाल अंगदान है. भोमा राम के अंगदान के साथ, मार्च 2024 में प्रारंभ किए गए कैडैवरिक ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 16 किडनी एवं 7 लिवर का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया जा चुका है. आयुष्मान भारत के अंतर्गत समर्थित यह कार्यक्रम पश्चिमी राजस्थान के मरीजों को उनके क्षेत्र में ही जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
एम्स जोधपुर के अस्पताल प्रशासन एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने परिवार के इस निर्णय को अत्यंत प्रेरणादायक और मानवीय बताया. गहन दुःख की इस घड़ी में परिवार ने मानवता को चुना. भोमा राम की स्मृति उन जीवनों में सदा जीवित रहेगी, जिन्हें उन्होंने नया जीवन दिया है. एम्स जोधपुर भोमा राम के परिवार के प्रति गहन सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करता है. उनका यह असाधारण साहस और मानवता आने वाले वर्षों तक समाज को प्रेरित करती रहेगी. ग्रीन कॉरिडोर के जरिये भोमाराम के जोधपुर से भेजा गया था.
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