Barmer News: बाड़मेर में स्वास्थ्य सेवाओं पर ताला! इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज बेहाल

Rajasthan News: बाड़मेर जिला अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों ने 5–6 माह से स्टाइपेंड न मिलने पर हड़ताल शुरू कर दी. कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. गैर-आपात सेवाएं ठप हुईं, कई ऑपरेशन टले. डॉक्टरों ने तत्काल भुगतान और भविष्य में समय पर स्टाइपेंड की मांग रखी.

Barmer News: बाड़मेर में स्वास्थ्य सेवाओं पर ताला! इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज बेहाल
Image Credit: barmer intern doctors strikeSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Barmer News: बाड़मेर जिला अस्पताल में इंटर्न चिकित्सकों ने लंबित मानदेय/स्टाइपेंड के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है. इंटर्न डॉक्टर्स के अनुसार, उन्हें पिछले पांच–छह महीनों से भुगतान नहीं हुआ, जिसके चलते सामूहिक हड़ताल और प्रदर्शन किए गए तथा कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा गया. सामूहिक अवकाश के कारण जिला अस्पताल में गैर-आपात (इलेक्टिव) सेवाओं, खासतौर पर शल्य चिकित्सा पर प्रतिकूल असर पड़ा और कई ऑपरेशन टले.

अचानक नहीं उभरा है संकट
यह संकट कोई अचानक उभरी घटना नहीं है. बाड़मेर मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल में भुगतान में देरी और स्टाइपेंड संबंधी विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं. दिसंबर 2024 में पीजी रेजिडेंट्स ने तीन माह का स्टाइपेंड न मिलने पर ‘पेन-डाउन’ हड़ताल की थी, जिससे नियमित सेवाएं प्रभावित हुई थीं. हाल के महीनों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी इंटर्न/रेजिडेंट स्टाइपेंड को लेकर खींचतान बढ़ी है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जुलाई 2025 में फिर से चेतावनी जारी कर मेडिकल कॉलेजों को समय पर स्टाइपेंड देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा था.

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प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
वर्तमान परिदृश्य में अस्पताल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है. पहली तो लंबित देयकों के शीघ्र निपटान की ठोस टाइमलाइन जारी करना; दूसरी आपात सेवाओं को बिना बाधा जारी रखना. इंटर्न्स की ओर से मांगें सीधी हैं. लंबित स्टाइपेंड का तत्काल भुगतान, भविष्य में समयबद्ध भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था, और हड़ताल में भागीदारी पर किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण.

क्या ऐसा ही रहेगा जोखिम
नीति स्तर पर, NMC दिशानिर्देशों के अनुरूप राज्य की पे-मैट्रिक्स से लिंक्ड स्टाइपेंड को अनिवार्य कर, भुगतान प्रक्रिया को ट्रेजरी/पीएफएमएस से ऑटो-रूट करना व्यवहार्य समाधान है. स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि इंटर्न प्रतिनिधियों, सीएमएचओ/कॉलेज प्रशासन और कोषाधिकारी के साथ त्रिपक्षीय बैठक कर तात्कालिक भुगतान शेड्यूल घोषित करे और सेवाओं के क्रमिक पुनर्स्थापन का रोडमैप साझा करे.जब तक भुगतान-टाइमलाइन पारदर्शी नहीं होगी, बार-बार होने वाले व्यवधानों का जोखिम बना रहेगा.

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