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राजस्थान यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के सामने फिर आया आर्थिक संकट

30 सालों से राजस्थान यूनिवर्सिटी में चल रहा पत्रकारिता विभाग शुरुआत से ही सेल्फ फाइनेंस स्कीम यानि की विद्यार्थियों की फीस से प्राप्त राशि से चल रहा था.

राजस्थान यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के सामने फिर आया आर्थिक संकट
अब विभाग के पास एक भी शिक्षक नहीं बचा है.

जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय में 30 सालों से संचालित पत्रकारिता विभाग के सामने संकट हैं की खत्म होने के नाम ही नहीं ले रहे हैं. पत्रकारिता विश्वविद्यालय बंद होने के बाद दो साल पहले इस विभाग को रेलुगर मोड पर संचालित किया जा रहा था, जिसके बाद इस विभाग के हालात कुछ सुधरे थे. लेकिन एक बार फिर से पत्रकारिता विश्वविद्यालय शुरू होने के बाद स्टाफ का विवि में चले जाना और फिर से विभाग को सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत चलाने के फैसले के बाद अब फिर से विभाग के सामने आर्थिक संकट की समस्या खड़ी हो गई है.

30 सालों से राजस्थान यूनिवर्सिटी में चल रहा पत्रकारिता विभाग शुरुआत से ही सेल्फ फाइनेंस स्कीम यानि की विद्यार्थियों की फीस से प्राप्त राशि से चल रहा था. लम्बे समय से विभाग के पास ना तो शिक्षक थे और ना ही कोई संसाधन, लेकिन वर्ष 2016 में पत्रकारिता विश्व विद्यालय बंद हुआ. विवि का पूरा स्टाफ विभाग को मिल गया. जिसके बाद इस विभाग को रेगुलर मोड पर चलाने का फैसला लिया. नई सरकार आने के साथ ही पत्रकारिता विश्व विद्यालय को फिर से शुरू किया गया. विभाग के सभी 8 शिक्षकों को विश्व विद्यालय में शिफ्ट करने के चलते अब विभाग के पास एक भी शिक्षक नहीं बचा है.

पिछले दिनों विभाग में नये विभागाध्यक्ष के रूप में प्रोफेसर डॉ. विनोद शर्मा को जिम्मा सौंपा गया. डॉ. विनोद शर्मा के सामने इस विभाग को विद्यार्थियों की फीस पर संचालित करना एक बड़ी चुनौती है. विभागाध्यक्ष विनोद शर्मा ने बताया की 'राविवि की अकादमिक कौंसिल की बैठक में विभाग को फिर से सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित करने का फैसला लिया है. जिसके तहत विद्यार्थियों से प्राप्त होने वाली राशि का 40 फीसदी हिस्सा जहां विवि प्रशासन को बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं के लिए देना होगा, तो वहीं 60 फीसदी हिस्से से विभाग को संचालित करना होगा.

पत्रकारिता विभाग की समस्या यहां ही खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. पत्रकारिता विश्वविद्यालय शुरू होने के बाद अब विभाग के सभी शिक्षकों को भी विवि में शिफ्ट कर दिया गया है. ऐसे में अब विभाग के पास खुद का एक भी शिक्षक नहीं बचा है. विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा ने बताया की विभाग में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा और पढ़ाई के लिए गेस्ट फैकल्टी का अनुरोध सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन से किया गया है और सत्र शुरू होने से पहले विभाग को गेस्ट फैकल्टी के रूप में 2-3 शिक्षक मिल सकते हैं.

बहरहाल, विभाग को आर्थिक संकट से बचाने के पत्रकारिता में फीस को बढ़ाकर 10 हजार से बढ़ाकर करीब 16 हजार से 17 हजार रुपये तो कर दिए, लेकिन सवाल ये है कि सालों से संचालित इस विभाग की अनदेखी कहीं प्रदेश के सैंकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तो नहीं.