प्रवासी पक्षियों की मौत को लेकर गवर्नर कलराज मिश्र ने की अधिकारियों संग विशेष बैठक

मिश्र ने कहा कि इस बीमारी पर तत्काल नियंत्रण किया जाना भी बेहद जरूरी है. राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान में विश्व के अनेक दूर-दराज के स्थानों से प्रवास करके यहां पक्षी आते हैं.

प्रवासी पक्षियों की मौत को लेकर गवर्नर कलराज मिश्र ने की अधिकारियों संग विशेष बैठक
राज्यपाल मिश्र ने कहा कि पक्षियों की मौत का मामला गंभीर चिंता का विषय है.

जयपुर: सांभर झील में लगातार पक्षियों की मौत को लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार को राजभवन में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. इस बैठक में राज्यपाल ने सांभर झील में हुई पक्षियों की मौत और बचाव के उपायों के बारे में मुख्य सचिव डी.बी. गुप्ता, वन और पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत चर्चा कर मामले की समीक्षा की. 

राज्यपाल मिश्र ने कहा कि पक्षियों की मौत का मामला गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि पक्षियों की मौत के कारण और रोग निवारण के उपाय ढूंढने आवश्यक हैं. रोग के फैलाव को रोकने और रोग से बचाव के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाने आवश्यक हैं.

मिश्र ने कहा कि इस बीमारी पर तत्काल नियंत्रण किया जाना भी बेहद जरूरी है. राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान में विश्व के अनेक दूर-दराज के स्थानों से प्रवास करके यहां पक्षी आते हैं. प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा हमारे राज्य की जिम्मेदारी है. राज्यपाल ने पक्षियो के इस रोग पर नियंत्रण करने और बचाव के लिए किए गए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और देश की अन्य प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों के समन्वित और सामूहिक प्रयास की प्रशंसा की. 

राज्यपाल ने कहा कि देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिकों के माध्यम से घटना का विश्लेषण करने के पश्चात निकलने वाला निर्णय भविष्य के लिए सावचेत करने वाला और फलदायी होगा. 
राज्यपाल मिश्र को मुख्य सचिव डी.बी. गुप्ता ने बताया कि ऐसी घटना राज्य में पहली बार हुई है. घटना की जानकारी होते ही राज्य के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और आईबीआरआई, बरेली की पशु-पक्षी रोग जांच प्रयोगशाला के विशेषज्ञों के दलों को तुरंत बुला लिया गया था. अब तक 17981 पक्षियों की मौत हो चुकी है. बुधवार को बैठक होने तक तीस मृत पक्षियों के शरीर पाए गए. लगातार समन्वित प्रयासों से इस बीमारी पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया गया है. 

राज्य वैटलैण्ड अथॉरिटी का गठन करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जा रहा है. सांभर झील के प्रबंधन के लिए सांभर मैनेजमेंट प्लान की विस्तृत रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है.

बैठक में वन विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा ने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजिज की रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह रोग बर्ड फ्लू नहीं है. पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के लैब के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार, संभवतया यह एवियन बोटुलिज्म रोग प्रतीत हो रहा है. आईबीआरआई, बेरली की लैब से भी पक्षियों के रोग की जांच की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट शीघ्र ही प्राप्त हो जाएगी. 

घटना स्थल पर एंबुलेंस की तुरंत व्यवस्था कर दी गई थी. गुहा ने बताया कि जयपुर, नागौर और अजमेर क्षेत्र के जिला कलेक्टर को वीडियो कान्फ्रेस के माध्यम से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं. बीमार पक्षी इलाज के बाद शीघ्रता से स्वस्थ हो रहे हैं.

बैठक में हैड ऑफ दी फॉरेस्ट फोर्स दीपक भटनागर, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक अरन्दिम तोमर और पशु पालन विभाग के निदेशक शैलेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.