30 नवंबर को साल के आखिरी चंद्रग्रहण के साथ मनाई जाएगी कार्तिक पूर्णिमा, चमकेगी किस्मत

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर तिल जल में डालकर स्नान करने से शनि दोष समाप्त होंगे. खासकर शनि की साढ़ेसाती. वहीं, कुंडली में पितृ दोष, चांडाल दोष, नदी दोष की स्थिति यदि है तो उसमें भी शीघ्र लाभ होगा.

30 नवंबर को साल के आखिरी चंद्रग्रहण के साथ मनाई जाएगी कार्तिक पूर्णिमा, चमकेगी किस्मत
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व.

जयपुर: 30 नवंबर सोमवार को साल का आखिरी चंद्रग्रहण (Last lunar eclipse) लगने जा रहा है. कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ने वाला यह ग्रहण रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में लगने वाला है. 

चंद्र ग्रहण ब्रह्मांड की एक खगोलीय घटना है और यह पृथ्वी से मीलों दूर घटित होती है, लेकिन इसके बावजूद इसका मानव जीवन पर असर होता है. सृष्टि के जीवों पर इसका असर दिखाई देता है. राशि अनुसार लोग प्रभावित होते हैं. ग्रहण के दौरान निकलने वाली प्रदूषित किरणों का भी विपरीत प्रभाव मानव जीवन पर पर होता है. किसी भी ग्रहण का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर देखा जाता है. इसका सीधा असर व्यक्ति के मन पर पड़ेगा क्योंकि चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है.

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पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि 30 नवंबर को पड़ने वाले चंद्रग्रहण के साथ सर्वार्थ सिद्धि और वर्धमान योग में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) मनाई जाएगी.

इस बार 30 नवंबर को मनाई जाएगी कार्तिक पूर्णिमा 
कार्तिक मास का सबसे आखिरी दिन होता है कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) (Kartik Purnima). स्नान और दान के लिहाज से यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस बार कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) दो तरह से बहुत महत्वपूर्ण है. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर एक तरफ जहां चंद्रग्रहण लग रहा है, वहीं दो शुभ संयोग इस पूर्णिमा को औऱ भी पावन बना रहे हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग और वर्धमान योग इस बार कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन रहेंगे.

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर स्नान और दान का भी बहुत महत्व
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर स्नान और दान का भी बहुत महत्वपूर्ण है. कार्तिक के पूरे महीने चलने वाले स्नान भी इस दिन समाप्त होंगे. इस बार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 नवंबर को दोपहर 12:47 से प्रारंभ होकर 30 नवंबर को दोपहर 2:59 तक रहेगी. ऐसे में देव दीपावली 29 नवंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी. वहीं, ग्रहण 30 नवंबर दोपहर 1 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 30 नवंबर शाम 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. हालांकि ग्रहण का सूतक नहीं लगेगा क्योंकि ये उपछाया चंद्र ग्रहण है. वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में यह उपचाया चंद्रग्रहण होगा, जिसका कोई असर नहीं होगा. उपछाया चंद्रग्रहण में न तो कोई सूतक ही लगेगा और न ही किसी प्रकार के शुद्धिकरण आदि की आवश्यकता होगी. इससे पहले 10 जनवरी, 5 जून व 5 जुलाई को भी ग्रहण लग चुके हैं. अब साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को होगा.

गंगा में डुबकी लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन दान और गंगा स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस दिन दान करने से और गंगा में डुबकी लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है. इस दिन देव दीपावली (Dev Deepawali) मनाने की भी परंपरा है. कार्तिक मास का हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व माना जाता है. इस पूरे महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. कार्तिक मास का समापन पूर्णिमा के साथ होता है. इस साल पूर्णिमा तिथि 30 नवंबर को है. हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का बहुत खास महत्व होता है. इस दिन तीर्थ स्थातनों पर मेले लगते हैं और तीर्थयात्री पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य अर्जित करते हैं. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है. भगवान कार्तिकेय को दक्षिण दिशा का स्वामी माना जाता है.

देव दीपावली
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस विशेष दिन देव दीपावली मनाने की भी परंपरा है. कहा जाता है कि वो कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का ही दिन था, जब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, इससे देवता प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दे दिया. तब शिवजी के साथ सभी देवता काशी में आए थे और खुशियां मनाई थी. आज भी इसी संदर्भ में काशी में देव दीपावली धूमधाम से मनाई जाती है और दीपदान किया जाता है. देव दीपावली 29 नवंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी.

दीपदान
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर दीपदान करने का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन दीपदान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का दिन देवी-देवताओं को प्रसन्न करने का दिन है. इस दिन पूजा-पाठ करके आप देव-देवताओं से भूलचूक के लिए माफी मांग सकते हैं. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. साथ ही अगर संभव हो तो भगवान सत्यनारायण की कथा जरूर सुनें.

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का महत्व
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है. पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरा नाम के राक्षस का अंत किया था. इस वजह से कई स्थातनों पर इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन गंगाजी में डुबकी लगाने भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन गंगा में स्नाकन करने से आपके सभी पापों का अंत होकर आपको पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि इस दिन का किया गया दान आपको कई गुना फल देता है. दान करने वालों को स्व्र्ग में स्था न मिलता है. इस दिन गाय के बछड़े को दान करने से भी आपको शुभ गुण वाली संतान प्राप्त होती है.

भगवान शिव बने थे त्रिपुरारी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक महाबलशाली असुर का वध इसी दिन किया था. इससे देवताओं को इस दानव के अत्यााचारों से मुक्ति मिली और देवताओं ने खुश होकर भगवान शिव को त्रिपुरारी नाम दिया.

भगवान विष्णु का प्रथम अवतार
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान विष्णु का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था. प्रथम अवतार के रूप में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे. इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करवाकर जातकों को शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है.

सर्वार्थ सिद्धि योग और वर्धमान योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima)
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग व वर्धमान योग में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का विशेष महत्व माना गया है. प्रत्येक वर्ष में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन जब अधिक मास या मलमास आता है तो इनकी संख्या 13 हो जाती है.

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) को कहा जाता है त्रिपुरारी पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन जब चंद्रमा आकाश में उदित होता है उस समय चंद्रमा की 6 कृतिकाओं का पूजन करने से शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है.

इसी दिन सिखों के पहले गुरु नानक देवजी का 551वां प्रकाशोत्सव
इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी का 551वां जन्मदिन भी मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 नवंबर को दोपहर 12:47 से प्रारंभ होकर 30 नवंबर को दोपहर 2:59 तक रहेगी. इसी दिन कार्तिक स्नान का समापन भी होगा.

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर तिल स्नान से मिलेगी शनि दोषों से राहत
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर तिल जल में डालकर स्नान करने से शनि दोष समाप्त होंगे. खासकर शनि की साढ़ेसाती. वहीं, कुंडली में पितृ दोष, चांडाल दोष, नदी दोष की स्थिति यदि है तो उसमें भी शीघ्र लाभ होगा.

इसी दिन लग रहा चंद्रग्रहण, लेकिन भारत में नहीं पड़ेगा कोई असर
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर इस साल का चौथा और आखिरी उप छाया चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और वही 14 दिसंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा यह चंद्र ग्रहण अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में दिखाई देगा. इस चंद्र ग्रहण का असर भारत में नहीं पड़ेगा. ऐसे में भारत में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. वैसे भी यह उप छाया चंद्र ग्रहण है. इसलिए इसका किसी भी राशि पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह चंद्र ग्रहण के दौरान भारत के मंदिरों के पट भी बंद नहीं होंगे.

चातुर्मास के बाद कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) को जागते हैं भगवान विष्णु
कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर भगवान विष्णु चातुर्मास के बाद जागृत अवस्था में होते हैं भगवान विष्णु ने इसी तिथि को मस्य अवतार लिया था. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) दीप दान करने का विशेष महत्व है. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन तुलसी के समीप तथा तालाब में सरोवर में गंगा तट पर दीप जलाने से अथवा दीप दान करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर सुख समृद्धि का वरदान देती हैं. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर तिल स्नान करने से शनि दोष समाप्त होने के साथ शनि की साढ़ेसाती और कुंडली में पितृ दोष और चांडाल दोष का निवारण होता है. कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) पर अक्षत यानि चावल और काले तिल का दान करने का विशेष महत्व है.

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) शुभ मुहूर्त
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) इस साल 30 नवंबर को है. हालांकि पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर से ही लग जाएगी जो 30 नवंबर को समाप्त होगी.

पूर्णिमा तिथि
29 नवंबर को दोपहर 12:47 से
30 नवंबर को दोपहर 2:59 तक