एक साथ है महानवमी-दशहरा का पर्व, समय का रखें ध्यान नहीं तो भुगतने पड़ सकते परिणाम

नवरात्र की नवमी तिथि के दिन देवी सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है. 

एक साथ है महानवमी-दशहरा का पर्व, समय का रखें ध्यान नहीं तो भुगतने पड़ सकते परिणाम
देवी सिद्धिदात्री नौ दिनों की तपस्या का पूर्णफल प्रदान करती हैं.

जयपुर: शारदीय नवरात्र पर्व समाप्ति की ओर हैं. भक्त माता की भक्ति में लीन हैं. शुक्रवार को महाअष्टमी मनाई गई. द्वितीय आश्विन शुक्ल नवमींयुक्त दशमी पर आज असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा मनाया जा रहा है. 
पंचांग के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्र की नवमी के साथ दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार, महानवमी के दिन सुबह 7.42 के बाद दशहरा लग जाएगा. इसलिए इस दिन शाम को दशहरे का पूजन और त्योहार मनाया जा सकता है. 

तिथियों की घटत-बढ़त के कारण पैदा हुए असमंजस के बीच महानवमी और दशहरे का पर्व इस बार एक साथ आज मनाया जा रहा है. इस दिन सुबह महानवमी पूजन हो रहा है तो शाम को रावण का सांकेतिक पुतला जलाया जाएगा. इनके आयोजन को लेकर असमंजस इसलिए था कि रविवार को सुबह 7:42 बजे नवमी तिथि की समाप्त हो रही थी और दशमी शुरू हो जाती. चूंकि ज्योतिषविद् उदियात यानी सुबह जिस तिथि में सूर्य उदय हुआ है, उसी तिथि को मानते हैं, ऐसे में पूरे दिन नवमी रहनी थी और सोमवार को दशमी होनी थी. लेकिन सोमवार को दशमी भी सुबह करीब 7:44 तक संपन्न हो जाती और एकादशी शुरू हो जाती. 

यह भी पढ़ें- जयपुर में रावण के पुतलों को दी गई कोरोना की शक्ल, कारीगर बोले- वायरस का होगा दहन

रावण दहन शाम को और दशमी तिथि पर ही होना जरूरी है. ऐसे में विजयादशमी भी रविवार को ही मनाना उचित माना गया. जिन परिवारों में कुल परंपरा अनुसार नवमी का पूजन किया जाता है, वे सुबह 7.42 तक कुलदेवी की पूजा कर सकते हैं. इसके बाद दशमी तिथि यानी दशहरा लग जाएगा. 

नवरात्र की नवमी तिथि के दिन देवी सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है. देवी सिद्धिदात्री नौ दिनों की तपस्या का पूर्णफल प्रदान करती हैं. इसलिए इन्हें कमल पर विराजमान बताया गया है, जिनके सामने समस्त देवता और ऋषि मुनि हाथ जोड़े खड़े हैं. इनकी भक्ति से भक्तों को 8 सिद्धियां अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व, और वशित्व प्राप्त हो जाते हैं. 

इसलिए नवरात्र में 9वीं तिथि का विशेष महत्व है. इस वर्ष नवमी तिथि का आरंभ 24 तारीख की सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर हुआ है और नवमी तिथि का समापन 25 तारीख को सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी. लेकिन शास्त्रों में बताए गए उदया तिथि के नियमानुसार 25 तारीख को पूरे दिन नवमी तिथि भी मान्य रहेगी.

बहरहाल, यह पहला मौका है, जब कई शहरों में दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं होगा. यह दशहरा पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता था. एक भी वर्ष ऐसा नहीं गया, जब यह आयोजन नहीं हुआ है. लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते न तो रामलीला का आयोजन हो रहा है और न ही दशहरे का आयोजन हो रहा है.