जानिए कितनी थी MDH मसाले के CEO धर्मपाल गुलाटी की इन-हैंड सैलरी, उड़ जाएंगे होश

 MDH मसालों के ब्रांड एम्बेसडर और मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का 98 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया. 

जानिए कितनी थी MDH मसाले के CEO धर्मपाल गुलाटी की इन-हैंड सैलरी, उड़ जाएंगे होश
महाशय धर्मपाल गुलाटी. (फाइल फोटो)

जयपुर: जब भी टीवी पर कोई भी MDH मसालों का एड देखता, तो उसके लीड ब्रांड एम्बेसडर 'बूढ़े दादा' को देखकर चेहरे पर अपने आप ही मुस्कान आ जाती थी. उम्र के जिस पड़ाव में लोग किसी धाम जाकर ध्यान लगाते हैं, उस उम्र में MDH मसालों के ब्रांड एम्बेसडर को काम करते देखकर युवा भी उनसे खूब प्रेरणा पाते थे.

अफसोस अब वह प्रेरणादायी इंसान लोगों के बीच नहीं रहे. MDH मसालों के ब्रांड एम्बेसडर और मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का 98 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया. धर्मपाल गुलाटी ने दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल (Mata Chanan Devi Hospital ) में 3 दिसंबर को सुबह 5.38 बजे आखिरी सांस ली. बताया जा रहा है कि वह पहले कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए थे, हालांकि उससे ठीक होने के बाद गुरुवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया.

महाशियां दी हट्टी यानी की MDH मसालों जैसी बड़ी कंपनी के मालिक की सफलता की चर्चा देश ही नहीं विदेशों में भी फैली है. वहीं, इनके जीवन की कहानी बेहद प्रेरणादायी है. 

25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी 
साल 2016 में उन्हें 21 करोड़ रुपये से अधिक सैलरी मिली थी. यह उस समय की नामी गोदरेज कंज्यूमर के आदि गोदरेज और विवेक गंभीर, हिंदुस्तान युनिलीवर के संजीव मेहता और आईटीसी के वाईसी देवेश्वर से अधिक थी. 
बता दें कि कुछ साल पहले चीन (China) की रिसर्च फर्म हुरुन इंडिया (Hurun Report) ने भारतीय अमीरों की एक लिस्ट निकाली थी. इसमें धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) को इंडिया में सबसे बुजुर्ग अमीर बताया गया था. इतना ही नहीं, यूरोमॉनिटर के अनुसार, धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले CEO थे. जानकारी के मुताबिक, साल 2018 में उन्हें 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिली थी.

पढ़ाई में नहीं लगता था मन
27 मार्च, 1923 को पाकिस्तान (Pakistan) के सियालकोट में जन्मे धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का पांच साल की उम्र में स्कूल में एडमिशन करवा दिया गया. वह स्कूल तो जाते थे पर पढ़ने में जरा भी मन नहीं लगता था. पढ़ाई की जिक्र होते ही वह बहाने करने लगते थे. बड़ी मुश्किल से उन्होंने पांचवी कक्षा तक पढ़ाई पूरी की. इसके बाद अपने पिता की मसालों की दुकान पर बैठने लगे. यहां पर काम करते हुए उन्होंने काफी सारी चीजें सीखीं. 

देश के विभाजन के समय आए थे दिल्ली
1947 में देश के विभाजन के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया था. दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने एक टांगा खरीदा, जिसमें वह कनॉट प्लेस और करोल बाग के बीच यात्रियों को लाने और ले जाने का काम करते थे. गरीबी से तंग आकर उन्होंने अपना तांगा बेच दिया और 1953 में चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली. उसमें मसाले बेचने लगे.

MDH मसालों की मचने लगी धूम 
1960 में कीर्ति नगर में उन्होंने महाशिया दी हट्टी (MDH) नाम की फैक्ट्री खोली और मसालों का व्यापार का व्यापार शुरू किया. जैसे-जैसे लोगों को पता चला कि सियालकोट की देगी मिर्च वाले अब दिल्ली आ गए हैं, उनका कारोबार फैलता चला गया. धीरे-धीरे एमडीएच मसालों का प्रयोग घर-घर होने लगा. लंबे संघर्ष के बाद दिल्ली में एक अलग मुकाम पा लिया. इस समय MDH के के 60 से अधिक प्रॉडक्ट बाजार में हैं. गुरुग्राम और नागौर में भी MDH मसालों की फैक्ट्रियां हैं. MDH मसालों की सप्लाई ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, स्विटजरलैंड, यूरोप में भी होती है.

पद्मविभूषण से हो चुके हैं सम्मानित
व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने पिछले साल महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) को पद्मविभूषण से सम्मानित किया था.