मानसूनी सीजन की फसलों में ऐसे करें निराई-गुड़ाई, कम लागत में मिलेगा ज्यादा मुनाफा

सही तरीका न अपनाने से फसलों को काफी नुकसान होता है.

मानसूनी सीजन की फसलों में ऐसे करें निराई-गुड़ाई, कम लागत में मिलेगा ज्यादा मुनाफा
सही तरीका न अपनाने से फसलों को काफी नुकसान होता है.

हनुमान तंवर, नागौर: मानसून का सीजन चल रहा है और फसलों में अभी निराई-गुड़ाई का कार्य भी किसानों द्वारा इन दिनों किया जा रहा है लेकिन आजकल किसान निराई-गुड़ाई के साथ साथ आधुनिक तरीका अपनाते हुए खरपतवारनाशी स्प्रे करके भी फसलों से खरपतवार नियंत्रण करते हैं. सही तरीका न अपनाने से फसलों को काफी नुकसान होता है.

मानसून की इस बरसात में होने वाली फसलो में खासकर बाजरा, मोठ, मूंग, गवार, तिल, मूंगफली की बुवाई इन दिनों किसानों ने अपने खेतों में कर रखी है. मानसून की इस बरसात की वजह से खेतों में बरसात के साथ ही खरपतवार पनपना शुरू हो जाते हैं और यह फसलों के साथ साथ बड़े होकर फसलो को नुकसान पंहुचाना शुरु कर देते हैं. किसान पारंपरिक तरीके से इसका निराई गुड़ाई से नियंत्रण करते हैं, वहीं, मनरेगा शुरू होने के बाद निराई-गुड़ाई के लिए खेतो में काम करने वाले मजदूर नहीं मिल पाते और मजदूरी भी महंगी हो गई. ऐसे में किसान कम लागत में सेलेक्टिव खरपतवारनाशी स्प्रे करते हैं.

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कृषि विशेषज्ञ ने खरपतवार नियंत्रण के लिए सेलेक्टिव केमिकल को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि आप अगर नॉन सेलेक्टिव खरपतवार केमिकल अगर यूज करते हो तो वो आपकी फसल को भी नुकसान पहुंच सकते हैं. सेलेक्टिव खरपतवारनाशी स्प्रे केवल आपकी फसल के आसपास के खरपतवार को ही मारने का काम करेंगे. खरपतवारनाशी स्प्रे करते वक्त इसका ध्यान जरूर रखें.

कृषि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खरपतवार नियंत्रण के दौरान कई बार किसान जो सेलेक्टिव और नॉन सेलेक्टिव स्प्रे करते हैं, तो गलतियां कर बैठते है और केमिकल जो छिड़का जाता है. वो जरूरत से ज्यादा छिड़क दिया जाता है, जो फसलों को नुकसान भी पंहुचाता है तो इसका भी ख्याल रखना जरूरी है. 
किसान भाई पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती कर रहे हैं मगर विशेषज्ञों की राय और देख-रेख में ही कृषि कार्य करेंगे तो और ज्यादा पैदावार कर पाएंगे और कम लागत में ज्यादा मुनाफा ले सकेंगे.