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जानिए दुनिया के सात अजूबों में से एक ताज महल का राजस्थान कनेक्शन

राजस्थान के अभिलेखागार विभाग के हाथों वो मध्य भारत के इतिहास के फरमान हाथ लगे है जिसमे ताज के निर्माण के इतिहास के पन्नों को ही बदल डाला है.

जानिए दुनिया के सात अजूबों में से एक ताज महल का राजस्थान कनेक्शन
शाहजहां का ये फरमान राजस्थान के मिर्जाराजा जयसिंह के नाम है जो पर्शियन भाषा में लिखे गए है.

रौनक व्यास/बीकानेर: पूरी दुनिया में जिस ईमारत को प्रेम के नाम से जाना जाता है जिसकी एक एक दिवार में प्रेम ही प्रेम है. जी हां हम बात कर रहे है आगरा के उस ताज महल की जिसने पूरी दुनिया में प्रेम प्रतिक मानी जाती है. लेकिन उसकी एक एक संगमरमर की दीवारो में छुपा है राजस्थान. 

मध्य भारत के इतिहास में देश में एक ऐसी ईमारत का निर्माण हुआ जो पूरी दुनिया में प्रेम का प्रतीक है. पूरी दुनिया में ताज को सर आखों पर चढ़ाया. देश से लेकर विदेश तक या हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक सभी ने ताज महल की खूबसूरती को अपनाया. प्रेम की इस ईमारत को कई रूप और रंगो में इस दुनिया के सामने रखा. लेकिन आज हम आपको बताते है इस ईमारत के निर्माण का वो सच जो आपने न पहले कभी सुना होगा और ना ही देखा होगा. राजस्थान के अभिलेखागार विभाग के हाथों वो मध्य भारत के इतिहास के फरमान हाथ लगे है जिसमे ताज के निर्माण के इतिहास के पन्नों को ही बदल डाला है.

दुनिया के सात अजूबो में शामिल ताज महल की इस सफेदी यानि इसके निर्माण में इस्तेमाल हुए संगमरमर राजस्थान की देन है. इन फरमानों में ये साफ लिखा है की राजस्थान के आमेर और मंकराना से ताज महल से निर्माण के लिए सफ़ेद पत्थर (मार्बल) यानी संगमरमर को मंगवाया गया था. शाहजहां का ये फरमान राजस्थान के मिर्जाराजा जयसिंह के नाम है जो पर्शियन भाषा में लिखे गए है. 

इस फरमान में ये साफ तोर पर लिखा है की अल्लाह सबसे बड़ा है. आप साहसी है, राजा मान सिंह के उत्तराधिकारी है. जिनको हम उनके साहसी कामो को देखते हुए आपको हम सम्मानित करना चाहते है, वही. साथ ही आपके पास एक बेहतरीन सैनिक टुकड़ी है जिसमे हाथी घोड़े है जिसकी मदद से आप आगरा में बन रही ताज ईमारत के लिए मार्बल भिजवाये. वहीं इस एवज में जो राशि होगी वो राजकोष से आपको अदा कर दी जायेगी. यानी ये साफ़ है की ताज के निर्माण में किस तरह राजस्थान के मार्बल ने भूमिका निभायी.

राज्य के अभिलेखागार विभाग ने इन फरमानों को लंबे समय से सुरक्षित रखा है. साथ ही देश और दुनिया को ताज के निर्माण के इतिहास में कुछ नए पन्नों यानि तथ्यों को सामने लाकर खड़ा कर दिया है विभाग के डायरेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया की विभाग इन फरमानों को जिन्हें पर्शियन भाषा में लिखा गया ह उन्हें हिंदी में कन्वर्ट करवाकर देश के सामने लाया गया है, जिसको देखते हुए 4 किताबो को भी प्रकाशित किया है और वोलियम प्रकाशित भी किए जा चुके हैं. डॉ. खड़गावत इन फरमानों को जनता तक पहुचने में अपने और अपने विभाग की बड़ी उपलब्धि मानते हैं.

बहरहाल राजस्थान का इतिहास बेहद बड़ा और प्राचीन है लेकिन देश की धरोहर ताज महल के निर्माण को लेकर राजस्थान के मार्बल के इस्तेमाल ने राजस्थान के इतिहास को और भी अधिक खूबसूरत और खास बना दिया है.