राजस्थान: जिला न्यायाधीश का बेटा कुछ इस तरह बना मजिस्ट्रेट, जानिए पूरी कहानी...

राहुल शर्मा ने बिना कोचिंग के ही दूसरे प्रयास में आरजेएस (राजस्थान न्यायिक सेवा) की परीक्षा पास की है. उनका कहना है कि अच्छे मार्गदर्शन ओर सच्ची मेहनत जरूर रंग लाती है.

राजस्थान: जिला न्यायाधीश का बेटा कुछ इस तरह बना मजिस्ट्रेट, जानिए पूरी कहानी...
राहुल ने बिना कोचिंग ही आरजेएस परीक्षा 2018 की तैयारी और अच्छे नंबरों से पास हुए हैं.

बारां: कड़े परिश्रम से सही दिशा में सार्थक प्रयास किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है. इसी ध्येय वाक्य को सार्थक करते हुए राहुल शर्मा ने बिना कोचिंग के ही दूसरे प्रयास में आरजेएस (राजस्थान न्यायिक सेवा) की परीक्षा पास की है. उनका कहना है कि अच्छे मार्गदर्शन ओर सच्ची मेहनत जरूर रंग लाती है.

राहुल शर्मा ने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा 2018 में बिना कोचिंग किए ही 75वीं रैंक प्राप्त कर इसे सच साबित कर दिखाया है. राहुल का कहना है कि युवाओं कों कभी हताश नहीं होना चाहिए. कोई भी व्यक्ति आरजेएस सहित अन्य सेवाओं में चयनित हो सकता है. इसके लिए सिर्फ अच्छे मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. 

साथ ही, राहुल ने अपने पढ़ने को लेकर कहा कि उन्होंने साल 2010 में इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरी की और फिर एमबीए किया. पिता व बहन की प्रेरणा से उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र को छोड़कर लॉ (वकालत) क्षेत्र को चुना. बहन नेहा और जीजाजी डॉ. पंकज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा दी. जिसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में लॉ (वकालत) में एडमिशन लिया. 

हालांकि, शुरुआत में कठिनाई आई, लेकिन बाद में रुचि बढ़ गई. साल 2016 में लॉ की पढ़ाई पूरी कर ली. इसके बाद उन्होंने आरजेएस की तैयारी शुरू की. पहली बार में सफलता नहीं मिली. दूसरी बार उन्होंने बिना कोचिंग नियमित 10 से 12 घंटे पढ़ाई कर आरजेएस परीक्षा 2018 की तैयारी की. हाल ही में जारी हुए परिणाम में उन्होंनें आरजेएस में 75वीं रैंक हासिल की है. 

राहुल का कहना है कि इंजीनियरिंग क्षेत्र में रहकर वे जॉब कर वह परिवार चला सकते थे, लेकिन न्यायिक सेवा में रहकर वे गरीब तबके व अन्य लोगों को समय पर उचित न्याय दिलाने में मदद कर सामाजिक सेवा भी कर सकेंगे. उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने परिवार व शिक्षकों को दिया है.

राहुल मूलत: सीकर के देवगढ़ निवासी ओर इनकें पिता रमेश कुमार शर्मा भी आरजेएस हैं, जो बारां में जिला एवं सेशन न्यायाधीश हैं. इससे पहले वह बारां में 2002 में करीब डेढ़ माह अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रहे. 2009 से 2012 तक बारां में अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश रहे. 29 मई 2019 से वर्तमान तक बारां में ही जिला एवं सेशन न्यायाधीश के पद पर हैं. मां निर्मला शर्मा गृहिणी हैं तथा बहन नेहा शर्मा जयपुर से लॉ (वकालत) में पीएचडी कर रही हैं.

वहीं, राहुल ने विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भी संदेश देते हुए कहा कि कई बार अधिकांश युवा अन्य साथियों को देखते हुए ही पढ़ाई व क्षेत्र को चुन लेते हैं. जिसके बाद कई प्रयास करने के बावजूद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती है. ऐसे में युवाओं को हताश नहीं होकर अपनी रुचि के अनुसार ही फील्ड को चुनना चाहिए. अच्छा मार्गदर्शन मिलने के साथ ही अगर उसमें कड़ी मेहनत करते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है.