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जानिए जयपुर के पेड़ वाले मास्टर जी की कहानी जो रोज लगाते हैं एक पौधा

सुरेंद्र अवाना ने बताया कि पहले बारिश के मौसम में पेड़ पौधे लगाते थे. 1 जुलाई 2010 से रोजाना एक पेड़ लगाने की शुरूआत की. 

जानिए जयपुर के पेड़ वाले मास्टर जी की कहानी जो रोज लगाते हैं एक पौधा
सुरेंद्र अवाना ने 25 कॉलोनियों में 10 हजार से ज्यादा पौधे लगाए हैं.

जयपुर: पर्यावरण संरक्षण के लिए मैसेज भेजने वाले, अपील करने वाले लोग खूब मिलेंगे, लेकिन कुछ ही लोग होते हैं जो उसे अपने जीवन में उतार पाते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं सुरेंद्र अवाना, जो सुबह की शुरूआत पेड़ लगाकर करते हैं. पेड़ पौधों से ऐसा लगाव हुआ कि अब तक 9 सालों में 40 हजार से अधिक पेड़ पौधे लगा चुके हैं. उनका कहना है कि जब तक आप अपने आप को पर्यावरण से अटैच नहीं करोगे, तक तक आपको इनकी महत्ता समझ में नहीं आएगी. अब तक आखिरी श्वास तक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है. 

25 कॉलोनियों में लगा दिए 10 हजार से ज्यादा पौधे
अजमेर रोड स्थित गजसिंहपुरा में आप जाएंगे और कॉलोनियों में घूमेंगे तो आपको जगह-जगह घरों के बाहर पौधे नजर आएंगे. कच्ची गलियां, गांव में इस तरह पौधे देखकर आप सोचेंगे कि यहां लोगों में पेड़ पौधों को लेकर अवेयरनेस है. कॉलोनियों में लोगों को पेड़ पौधे लगाने और लोगों को जागरूक करने का काम किया. गजसिंहपुरा के ही रहने वाले सुरेंद्र अवाना ने, जिनकी पहल से गजसिंहपुरा की 25 कॉलोनियों में 10 हजार से ज्यादा पौधे लग गए.

सुरेंद्र अवाना ने बताया कि पहले बारिश के मौसम में पेड़ पौधे लगाते थे. 1 जुलाई 2010 से रोजाना एक पेड़ लगाने की शुरूआत की. हालांकि यह एक चैलेजिंग था, लेकिन जब पेड़ पौधों के बारे में गहराई से अध्ययन किया और इनके उपयोग को समझा तो मैंने इन्हें रोजाना लगाने की ठानी और इसे जारी रख रहा हूं. 9 साल पहले के लगाए हुए पेड़ों को आज देखता हूं तो खुशी होती है. घर के आसपास लगाने के साथ ही गजसिंहपुरा गांव की 25 कॉलोनियों के साथ ही पार्क और श्मशान घाट पर पौधे लगाने का काम किया. अवाना बताते हैं कि लोगों के घरों के सामने पौधे लगाता हूं तो मकान मालिक को उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी सौंपता हूं. पार्क, श्मशान घाट पर खुद पानी की टैंकर से उन्हें पानी पहुंचाता हूं. 

छायादार पौधों को देते प्राथमिकता
अवाना कहते हैं कि छायादार पौधे लगाने को वो प्राथमिकता देते हैं. जिसमें नीम, करंज, गूलर, सेंजना, शहतूत, बरगद, पीपल. पेड़ पौधों के लिए नर्सरी भी लगा रखी है. वो कहते हैं कि पेड़ पौधे लगाते लगाते अब तो इतना अनुभव हो गया है कि दूर से ही पेड़ पौधे की ग्रोथ देखकर बता देते हैं कि इसमें खाद की कमीं है या पानी की. स्थानीय कॉलोनीवासी संजीव चौधरी, महेश शर्मा बताते हैं कि इन कॉलोनियों में लगे सारे पौधे इनकी देन हैं. अब तो इनको देखकर अन्य लोग भी मोटिवेट होने लगे हैं. कॉलोनी के लोग भी अब तो इन्हें पेड़ वाले गुरूजी के नाम से पुकारते हैं. यह कॉलोनियों में भी घूमते हैं और पेड़ पौधों की देखभाल को लेकर लोगों को टोकते रहते हैं. 

लोगों को वितरित करते कपड़े का थैला
पर्यावरण संरक्षण के लिए अवाना सालाना 200 कपड़े के बने थैले लोगों को वितरित करते हैं. जिस पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्लोगन लिखे होते हैं. वो कहते हैं कि लोग डेली यूज के लिए ऐसे थैलों का उपयोग करेंगे, जैसे सब्जी लाने, दूध लेने, राशन का सामान लेने के लिए तो पॉलीथीन की जरूरत नहीं पड़ेगी. वहीं यह स्लोगन लोगों को जागरूक भी करते हैं. खुद के जन्मदिन और पारिवारिक सदस्यों का जन्मदिन भी पेड़ लगाकर करते हैं. वो कहते हैं कि बच्चों को जन्मदिन पर कपडे से बना पर्स देते हैं, जिसमें वो पेंसिंल, रबर रख सकते हैं. वो कहते हैं कि इस मुहिम को देखकर कई बच्चों के पैरेंट स भी खुद अवेयर हो रहे हैं और वो भी जन्मदिन पर पेड़ लगाने लगे हैं. 

बहराणा दूदू में लगाएंगे 50 हजार पौधे
अवाना ने बताया कि दूदू के पास बहराणा में 50 बीघा गैर मुमकिन जमीन है, जहां नाला है. उस पर पर्यावरण संरक्षण के लिए 50 हजार पौधे लगाने की योजना है. गैर मुमकिन जमीन पर पेड़ पौधे लगाने के लिए सरपंच, एसडीएम को पत्र लिखा है. जैसे ही अनुमति मिलती है, इस पर पेड़ पौधे लगाने का काम करेंगे.