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गुरु पूर्णिमा पर जानिए पश्चिमी राजस्थान के महादेव और उनके शिष्य की अनोखी कहानी

मालाणी के महादेव कहे जाने वाली स्वामी मोहन पुरी जी महाराज के किस्से राजस्थान नहीं पूरे देश में जाने जाते हैं. 

गुरु पूर्णिमा पर जानिए पश्चिमी राजस्थान के महादेव और उनके शिष्य की अनोखी कहानी
अब उनके शिष्य गुरु और शिष्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

भूपेश आचार्य/जयपुर: मंगलवार को पूरे देश में गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाया गया, लेकिन बदलते वक्त के साथ ही आज के आधुनिक युग में गुरु और शिष्य में भी दूरियां बढ़ती जा रही है. आज हम आपको एक ऐसे गुरु और शिष्य की कहानी बताते हैं जिसे सुनने के बाद आप यह जरूर कहेंगे कि गुरु का होना जीवन में बेहद जरूरी है. पश्चिमी राजस्थान के मालाणी के महादेव कहे जाने वाले मोहन पुरी जी महाराज और उनके शिष्य प्रताप पुरी की कहानी के बारे में रूबरू करवाते हैं.

स्वामी प्रताप पुरी के अनुसार उनकी माता को कुत्ते ने काट दिया था जिसका कोई इलाज नहीं था तो डॉक्टर ने कह दिया था कि दोनों की मौत हो जाएगी, लेकिन जब मेरे पिताजी मोहन पुरी जी महाराज को लेकर घर आए तो उन्होंने कहा कि ना तो बच्चे को कुछ होगा ना ही उसकी माता को कुछ होगा. उस वक्त मोहन पुरी जी महाराज ने कहा था कि यह बच्चा पैदा होकर मेरा शिष्य बनेगा आखिर में ऐसा ही हुआ. मैं 5 साल की उम्र में मोहनपुरी जी का शिष्य बन गया ऐसा सौभाग्य कम लोगों को मिलता है.

ऐसे चमत्कारी संत का शिष्य बनने का सौभाग्य मुझे मिला और मैंने उनके कई चमत्कार देखे. बाड़मेरी नहीं पूरे राजस्थान में उनके चमत्कारों को लेकर हर कोई जानता है. स्वामी प्रताप पुरी के अनुसार 149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण का संयोग 149 साल बाद बन रहा है. इसलिए इस चंद्रग्रहण को दुर्लभ और ऐतिहासिक कहा जा रहा है. इससे पहले 12 जुलाई 1870 को यह संयोग बना था, स्वामी प्रतापपुरी के अनुसार जब गुरु पूर्णिमा व चंद्रग्रहण एक साथ पड़े. अगर आज कोई भी आराधना या सिद्धि करेगा तो उसकी मनोकामना जरुर पूरी होगी. 

मालाणी के महादेव कहे जाने वाली स्वामी मोहन पुरी जी महाराज के किस्से राजस्थान नहीं पूरे देश में जाने जाते हैं. अब उनके शिष्य गुरु और शिष्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. आज स्वामी प्रतापपुरी आशीर्वाद लेने के लिए हजारों श्रद्धालु जसदेव धाम आए. इस दौरान प्रताप पुरी ने साफ तौर पर कहा कि आज भी गुरु और शिष्य का होना समाज के लिए बेहद जरूरी है.