तीन युवतियों की मेहनत जानकर आपको भी आ जायेगा जोश, परिवार को दिया सहारा

लॉक डाउन के इस दौर में जब हर कहीं नौकरियों के छिन जाने और रोजगार खत्म होने की बातें कही जा रही है.

तीन युवतियों की मेहनत जानकर आपको भी आ जायेगा जोश, परिवार को दिया सहारा
धापू और पिंकी नाम की ये दो बहने नागौर जिले के कुचामन सिटी में रहती है.

हनुमान तंवर, कुचामनसिटी/नागौर: लॉकडाउन  के इस दौर में जब हर कहीं नौकरियों के छिन जाने और रोजगार खत्म होने की बातें कही जा रही है. ऐसे में नागौर जिले के कुचामन सिटी की कुछ युवतियां एक नजीर बन कर सामने आई है, जो हौसला ना खोने और मुश्किलों के सामने डटे रहने का सबक सबको दे रही है.

समाज में बालिकाओं को बोझ माना जाता है. कई लोग पैदा हाेते ही जंगलों व कचरे में छोड़ जाते हैं. भले ही ये युवतियां सब्जी बेच कर अपने परिवार का गुजारा चला रही है, लेकिन उन्होंने अपने हौसले से सामने आई परेशानियों को मात दे दी है. देशभर में लॉकडाउन के चलते लाखों लोगों की नौकरियों चली गई हैं तो काफी लोगों को रोजगार न होने के कारण संकट का सामना करना पड़ रहा है. 

इस तरह के बहुत से लोगों की हिम्मत कोरोना काल ने तोड़ी है तो कुछ ऐसे भी है जो एक मिसाल बनकर सामने आए हैं और अपने हौसले से उन्होंने परेशानियों को मात दे दी है. उन्ही में से ये दो बहनें भी है. जो परिवार को कमजोर आर्थिक स्थिति से उबारने के लिए कोरोना संकट के इस दौर में हौसला दिखाते हुए खुद के दम पर परेशानियों को मात देने की जद्दोजहद में लगी है. 

धापू और पिंकी नाम की ये दो बहने नागौर जिले के कुचामन सिटी में रहती है. पिता की मौत हो चुकी हैं. 7 बहनों और एक भाई के अपने परिवार की जिम्मेदारी अब इन्हीं दोनों बहनों पर है. कोरोना फैलाव को रोकने के लिए पिछले 2 महीने से जारी लॉकडाउन में जब सब कुछ थम सा गया, रोजगार खत्म हो गए. कई परिवार बिखर गए तो ऐसे वक़्त में भी दोनों बहनो ने हौंसला नहीं खोया और जीविकापार्जन के रूप में सब्जी बेचकर परिवार को सहारा दे रही है. 

कुछ ऐसी ही कहानी रुखसाना की भी है. रुखसाना, सब्जी बेचने के काम मे पिता को मदद देकर परिवार को संकट से उबारने का लक्ष्य रखती है. लॉक डाउन के दौरान कुचामन के स्थानीय प्रशासन ने सुबह 8 बजे से 11 बजे तक का समय तय कर रखा है. इस वक्त में यह तीनों युवतियां शहर के बाजारों में आती हैं और सब्जी बेचने में जुट जाती है. इनसे सब्जी खरीदने आए लोग भी इनके बारे में जानकारी हासिल करते हैं तो वे भी इनकी तारीफ किए बिना नहीं रहते. 

हैरानी की बात यह भी है तीन युवतियों के परिवार को दूसरे कई पात्र परिवारों की तरह किसी भी तरह की सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. जब हमने इस बारे में स्थानीय उपखंड अधिकारी बाबूलाल जाट से बात की तो उन्होंने जल्द ही इस मामले में जांच करवाने और वंचितों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया.

 

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