श्रीगंगानगर: 2 साल से गरीब भूखों का पेट भर रही रोटी बैंक, ब्याज में लेती है दुआएं

पिछले दो साल से चल रहे इस 'बैंक' का उद्देश्य है- किसी को भूखा न सोना पड़े! इस बैंक की टाइमिंग है दोपहर 12 से दो बजे तक. कोई भी आकर रोटी जमा कर सकता है और कोई भी आकर ले सकता है.

श्रीगंगानगर: 2 साल से गरीब भूखों का पेट भर रही रोटी बैंक, ब्याज में लेती है दुआएं
ढाबा संचालक भी प्रतिदिन रोटी बैंक में निशुल्क भोजन की सेवा करते हैं.

कुलदीप गोयल, श्रीगंगानगर: आपने रुपयों के अलावा सोने-चांदी की बैंक तो देखी होंगी, मगर कभी रोटी बैंक (Roti Bank) भी देखी है? श्रीगंगानगर (Sriganganagar) में कोडा चौक के पास एक ऐसी बैंक चलती है, जिसमें भूखे लोगों के लिए रोटियां एकत्रित की जाती हैं. फिर उन्हें गरीबों और जरूरतमंद लोगों को खिलाया जाता है.

पिछले दो साल से चल रहे इस 'बैंक' का उद्देश्य है- किसी को भूखा न सोना पड़े! इस बैंक की टाइमिंग है दोपहर 12 से दो बजे तक. कोई भी आकर रोटी जमा कर सकता है और कोई भी आकर ले सकता है.

रोटी बैंक के संचालक सोनू अनेजा का कहना है कि रोटी बैंक की शुरुआत मजदूरों को देख कर हुई. कोडा चौक पर सुबह मजदूर जुटते हैं और जिन मजदूरों को काम नहीं मिलता, वे भूखे प्यासे अपने घरों को लौट जाते थे, इन्हीं मजदूरों के लिए उन्होंने अपने चार मित्रों से बात की और घर से टिफिन लाने शुरू किए. शुरू में दस से पंद्रह टिफिन लाते थे और अब धीरे-धीरे यह संख्या साढ़े तीन सौ तक पहुंच गई है.

रोटी बैंक के पास ही एक ढाबा भी है और ख़ास बात यह है कि ढाबा संचालक भी प्रतिदिन रोटी बैंक में निशुल्क भोजन की सेवा करते हैं. जब उनसे पूछा गया कि निशुल्क सेवा करने से उन्हें नुक्सान नहीं होता तो उन्होंने कहा की उन्हें कोई नुक्सान नहीं बल्कि व्यापार में फायदा हो रहा है. जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाने से उन्हें दुआएं मिल रही हैं और व्यापार बढ़ रहा है.

लोगों को मयस्सर नहीं होती दो वक्त की रोटी
'भूख' का कोई मजहब नहीं होता. भूखे इंसान को दो रोटी मिल जाए तो उसकी आंखों में चमक आ जाती है. देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जिन्हें एक वक्त का खाना मयस्सर नहीं, तो कई ऐसे हैं, जो हर दिन भोजन का काफी हिस्सा कू्ड़ेदान में फेंक देते, इसलिए भूखे को भोजन उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाने वाले युवाओं की टोली द्वारा लोगों से अपील की जा रही है कि वो शादी समारोह, बर्थडे पार्टी, घरों में बचा हुआ खाना को सड़कों पर न फेंके. बचा हुआ खाना रोटी बैंक को दें.