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कोटा: एसीबी ने जांच के बाद असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

कोटा एसीबी मुख्यालय जयपुर ने कोटा के सहायक औषधि नियंत्रक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए औषधि नियंत्रक संगठन को पत्र लिखा है. 

कोटा: एसीबी ने जांच के बाद असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ की कार्रवाई की मांग
चंद्र प्रकाश राठौर ने पिछले साल 2018 में एसीबी को परिवाद दिया था

कोटा: प्रदेश के कोटा शहर के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर देवेन्द्र गर्ग मेडिकल दुकानदार से दुकान का लाईसेंस निरस्त करने के नाम पर धमकी देकर रुपए वसूलने को लेकर एसीबी की जांच में दोषी पाए गए हैं. इसी के साथ असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर का वीडियो भी पुलिस के सामने आया है जिसको खुद पीडित दुकानदार ने बनाया है. हालांकि यह मामला  पुराना है लेकिन वीडियो तब सामने आया जब मामले मे एसीबी ने इन साहब को दोषी मानते हुए विभागीय कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है.

दरसल कोटा में एक परिवादी की ओर से सहायक औषधि नियंत्रक के खिलाफ पेश किए गए परिवाद के आधार पर एसीबी मुख्यालय जयपुर ने संबंधित सहायक औषधि नियंत्रक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए औषधि नियंत्रक संगठन को पत्र लिखा है. इस संबंध में एसीबी में दिए गए परिवाद में ड्रग लाइसेंस के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया गया था.

कोटा एसीबी मुख्यालय जयपुर ने कोटा के सहायक औषधि नियंत्रक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए औषधि नियंत्रक संगठन को पत्र लिखा है. उनके खिलाफ पैसा मांगने और पैसे लेने की शिकायत का मामला सामने आया था. जिसका परिवाद कोटा एसीबी की चौकी में दर्ज हुआ था. इस परिवाद पर जयपुर एसीबी मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है.

मामले के अनुसार चंद्र प्रकाश राठौर ने पिछले साल 2018 में एसीबी को परिवाद दिया था कि उसने वर्ष 2016 में सीपी एजेंसी के नाम से होलसेल दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन किया था. उन्होंने परिवाद में आरोप लगाया था कि कोटा के सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग ने लाइसेंस के लिए उनसे 6000 रूपए मांगे थे. जिसका उन्होंने एक वीडियो भी बना लिया था.

राठौर ने कहा कि इस वीडियो में 5000 रूपए लेते हुए देवेंद्र गर्ग नजर भी आ रहे हैं. एसीबी कोटा चौकी ने इसका परिवाद दर्ज कर जयपुर मुख्यालय भेज दिया था. एसीबी मुख्यालय ने इस मामले में वीडियो पुराना होने के चलते मुकदमा दर्ज नहीं किया है, लेकिन इस मामले में औषधि नियंत्रक संगठन को विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा के लिए पत्र लिखा है. शिकायतकर्ता चंद्र प्रकाश राठौर का कहना है कि सहायक औषधि नियंत्रक गर्ग ने उन्हें व्यापार नहीं करने दिया. इसके चलते ही उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी थी.

वहीं इस मामले में सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग का कहना है कि चंद्र प्रकाश राठौर की दुकान में अनियमितताएं मिली थी. इसके संबंध में रामपुरा कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज हुआ था और उसे कुछ दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था. इससे रंजिश रखते हुए चंद्र प्रकाश ने उनके खिलाफ फर्जी वीडियो तैयार किया है.