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कोटा: BJP को एक और झटका, पूर्व पार्षद ने अपने समर्थको के साथ थामा कोंग्रेस का हाथ

शांति धारीवाल की मौजूदगी में बीजेपी के पूर्व पार्षद जयप्रकाश शर्मा ने अपने सेंकडो समर्थको के साथ कोंग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. 

कोटा: BJP को एक और झटका, पूर्व पार्षद ने अपने समर्थको के साथ थामा कोंग्रेस का हाथ
अगर ऐसे ही पुराने नेताओं का पार्टी से जाने का सिलसिला जारी रहा तो चुनावों में बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

मुकेश सोनी/कोटा: प्रदेश की सियासत पर चुनावी रंग चढ़ चुका है. वहीं टिकट की घोषणा से पहले ही राजनेताओ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. जिसका असर भी धरातल पर देखने को मिलने लगा है. इसी कड़ी में रविवार को कोटा उत्तर विधानसभा में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है. शांति धारीवाल की मौजूदगी में बीजेपी के पूर्व पार्षद जयप्रकाश शर्मा ने अपने सेंकडो समर्थको के साथ कोंग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. 

खबरों की मानें तो रामपुर स्थित बड़ी समाधि में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं व पुरुषों ने कोंग्रेस को जिताने का संकल्प लिया. बीजेपी छोड़कर कोंग्रेस में शामिल हुए जयप्रकाश ने कहा कि पहले बीजेपी के पुराने नेता कार्यकर्ताओ का मान सम्मान देते थे. वो डांट भी देते थे तो ऐसा लगता था कि परिवार का कोई सदस्य डांट रहा है. लेकिन वर्तमान में बीजेपी में कार्यकर्ताओ को सम्मान नही मिलता. केवल चाटुकारों को महत्व दिया जाता है.

जयप्रकाश ने कहा कि रावण का भी अहंकार मरा है. मैने भी बीजेपी का अहंकार खत्म करने के लिए कांग्रेस ज्वाइन की है. रामपुरा इलाके के 5 वार्डो में रावण रूपी लंका को खत्म करूंगा और साथ ही कांग्रेस को मजबूत करने का काम भी करूंगा. कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वाले लोगो ने कोटा उत्तर विधायक पर सीधा हमला बोलाते हुए कहा कि बाहरी आदमी अब नहीं चलेगा. वही शांति धारीवाल ने कहा कि जयप्रकाश के कोंग्रेस में शामिल होने ने पार्टी मजबूत होगी. अपने सम्बोधन के दौरान धारीवाल ने केंद्र व राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए लुटेरी सरकार बताया.

हालांकि यह पहले नेता नहीं जिन्होने बीजेपी का साथ छोड़ा है. इससे पहले हितेंद्र सिंह हाडा ने भी भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से नाराज और पिछले 13 सालों से भाजपा व संघ की विचारधारा से जुड़े के बाद भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया. बताया जा रहा था कि हितेंद्र सिंह हाडा भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिला अध्यक्ष की राह पर थे और दावेदारी विजेता रहे थे. लेकिन पार्टी ने गिर्राज गौतम के नाम की घोषणा कर उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का जिला अध्यक्ष बना दिया. इससे नाराज होकर हितेंद्र सिंह हाडा ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी छोड़ दी. 

वहीं हाल ही में मानवेंद्र सिह ने भी बीजेपी से इस्तीफा दिया था. मानवेन्द्र सिंह राजस्थान से बीजेपी सांसद थे. बीजेपी छोड़ने के बाद ही कर्नल मानवेन्द्र सिंह ने यह ऐलान कर दिया था कि वह आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. मानवेन्द्र सिंह बीते चार-पांच सालों से बीजेपी में हो रही उनकी अनदेखी से नाराज थे. जिसके बाद उन्होंने बीजेपी पर नाराजगी जाहिकर करते हुए कहा था कि मैंने जब भी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को इन मुद्दों से अवगत कराया, तो उन्होंने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी. सिंह ने कहा कि अब मेरा धैर्य जवाब दे चुका है और मैं पार्टी छोड़ रहा हूं. 'कमल का फूल, हमारी भूल' कहते हुए उन्होंने बीजेपी छोड़ने की बात पर मोहर लगाई थी. माना जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बाड़मेर से पिता जसवंत सिंह को टिकट नहीं मिलने के बाद से ही मानवेन्द्र बीजेपी से नाराज चल रहे थे. 

बता दें कि विधायक मानवेन्द्र सिंह पूर्व में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं. 2003 के लोकसभा चुनाव में मानवेन्द्र सिंह ने सबसे ज्यादा मत पाकर रिकॉर्ड जीत हासिल की थी. फिलहाल मानवेन्द्र सिंह राजस्थान फुटबाल संघ के प्रदेशाध्यक्ष होने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी फुटबॉल संघ के उपाध्यक्ष भी हैं.

मानवेन्द्र की नाराजगी का एक कारण यह भी बताया जा रहा था कि बीजेपी की अटल सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रहे जसवंत सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उस समय उनसे मिलने वरिष्ठ बीजेपी नेता एलके आडवाणी के अलावा और कोई बीजेपी नेता नहीं पहुंचा था.  हालांकि मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल होने से कांग्रेस को फायदा जरूर मिलेगा. वहीं अगर बीजेपी की बात करें तो अगर ऐसे ही पुराने नेताओं का पार्टी से जाने का सिलसिला जारी रहा तो चुनावों में बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.