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कोटा: करोड़ो की लागत से बने भवन के बावजूद किराये के भवन में स्वास्थ्य विभाग

विज्ञान नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का 80 फ़ीसदी काम हो गया है, बचा हुआ 20 फीसदी काम पुरानी बिल्डिंग पर होना है, लेकिन वहां पर कार्यरत चिकित्सक पुराने भवन से नई बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं कर रहे हैं.

कोटा: करोड़ो की लागत से बने भवन के बावजूद किराये के भवन में स्वास्थ्य विभाग
विभाग के अलग-अलग दफ्तर टूटे-फूटे भवनों में संचालित हो रहे हैं.

कोटा: राजस्थान के कोटा का स्वास्थ महकमा करोड़ों रुपय लगा कर भी परेशानी झेल रहा है. कुछ ऐसे की स्वास्थ्य विभाग की ओर से क़रीब एक दर्जन जगह पर नए भवनो का निर्माण पुरा हो चुका है, लेकिन सभी के सभी बंद पड़े है. विभाग के ख़ुद के भवन तैयार है बावजूद इसके विभाग उन पर ताले लगा कर या तो किराए के भवनों में संचालित हो रहा है या फिर पुराने जर्जर भवनों में ये भवन चल रहे है.

 स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटा शहर के कुन्हाड़ी और विज्ञान नगर के स्वास्थ्य केंद्रों में भवन छोटा पड़ने पर नए भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है. लेकिन दोनों ही जगह की निर्माण समय सीमा निकल गई है और निर्माण अभी भी अधूरा ही है. हालात यह हैं कि कुन्हाड़ी सीएचसी का तो केवल 60 फ़ीसदी काम ही मौके पर हो पाया है और अभी कार्य जारी है. वहीं विज्ञान नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बात की जाए, तो आधे हिस्से पर पूरा निर्माण हो गया है और बचे हुए हिस्से में चिकित्सकों की ओर से बिल्डिंग की निर्माण विंग को नहीं मिलने पर कार्य ठप्प पड़ा है. विज्ञान नगर और कुन्हाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन निर्माण कार्य के लिए 10 करोड रुपए स्वीकृत हुए थे. 

इसमें विज्ञान नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का 80 फ़ीसदी काम हो गया है, बचा हुआ 20 फीसदी काम पुरानी बिल्डिंग पर होना है, लेकिन वहां पर कार्यरत चिकित्सक पुराने भवन से नई बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं कर रहे हैं. एनएचएम के निर्माण विंग पुराने भवन पर होना है, लेकिन चिकित्सा विभाग उन्हें जगह उपलब्ध नहीं करवा रहा है. इसी तरह कुन्हाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात हैं. वहां पर चिकित्सक बिल्डिंग को देख दिशा-निर्देश देने नहीं जा रहे हैं. ऐसे में उसका कार्य पूरी गति से नहीं चल पा रहा है.

वहीं इस मामले को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की निर्माण विंग के अधिकारी आमने-सामने हैं. एनएचएम की निर्माण विंग के अधिशासी अभियंता डीके सक्सेना का कहना है कि उन्हें जगह नहीं मिल पा रही है. ऐसे में चार-पांच महीने से कार्य बंद है बार बार भी आग्रह कर चुके हैं, लेकिन जगह उपलब्ध नहीं करवाई जाती है. इस कारण कार्य नहीं कर पा रहे हैं. वहीं इस मामले में सीएमएचओ डॉ. बीएस तंवर का कहना है कि नए भवन में हम सीएससी को शिफ्ट नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उसका उद्घाटन करवाया जाएगा. ऐसे में उद्घाटन के बाद ही निर्माण कार्य हो सकेगा. जबकि जबकि निर्माण विंग के अभियंताओं का कहना है कि 80 फ़ीसदी कार्य ही हुआ है. ऐसे में उसका लोकार्पण कैसे हो सकता है.

स्वास्थ्य भवन के कार्यालय में शिफ्टिंग मामले में चिकित्सा विभाग के लोगों का कहना है कि इसका लोकार्पण स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा की जगह यूडीएच मंत्री से करवा दिया था. इसी विवाद के चलते यह स्वास्थ्य भवन शिफ्टिंग का कार्य ठंडे बस्ते में है और विभाग के अलग-अलग दफ्तर टूटे-फूटे भवनों में संचालित हो रहे हैं. चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग का खेडली फाटक के नजदीक संयुक्त निदेशक और औषध नियंत्रण संगठन का कार्यालय संचालित हो रहा है. यहीं पर चिकित्सा विभाग के उपनिदेशक का कार्यालय भी संचालित हो रहा है. इसके अलावा सीएमएचओ का कार्यालय बग्गी खाना में और उसी के नजदीक दूसरे भवन में खाद्य सुरक्षा का कार्यालय संचालित हो रहा है. यही नहीं जिला प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय लाडपुरा में संचालित हो रहा है. यहां पर एनयूएचएम का कार्यालय भी चल रहा है. वहीं रामपुरा जिला अस्पताल के नजदीक डिप्टी सीएमएचओ कार्यालय संचालित हो रहा है. ऐसे में शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्वास्थ्य विभाग के दफ्तर चालू हो रहे हैं. जिनमें से कुछ का तो निजी भवनों में होने से किराया भी जा रहा है.

स्वास्थ्य भवन का लोकार्पण इसी साल 27 जनवरी को तत्कालीन सीएमएचओ और वर्तमान संयुक्त निदेशक डॉ. आरके लवानिया ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से करवाया था. इसके बाद विवाद हो गया था कि चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री को इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई है. डॉ. लवानिया ने ऑफिस शिफ्टिंग का कार्य शुरू करवाया और कुछ फर्नीचर नए भवन में शिफ्ट भी कर दिया. कुछ दिन बाद ही सीएमएचओ बदल गए तो डॉ. बीएस तंवर को सीएमएचओ का कार्यभार सौंप दिया. इसके बाद से नए सीएमएचओ ने नए भवन में शिफ्टिंग का कार्य रोक दिया. तब से यह ठंडे बस्ते में ही पड़ा है. 

एनएचएम के अधिशासी अभियंता डीके सक्सेना का कहना है कि वे कई बार सीएमएचओ को भवन शिफ्टिंग के लिए अवगत करा चुके हैं. सीएमएचओ एक बार इस भवन की विजिट भी कर चुके हैं और कुछ कमियां भी बता चुके हैं. जिनको हमने पूरा कर दिया है. इस संबंध में हमने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है. संयुक्त निदेशक डॉ. आरके लवानिया भी मान रहे हैं कि भवन को लोकार्पण हो गया है और हैंड ओवर कर शिफ्ट करना चाहिए. वहीं सीएमएचओ एक ही राग अलाप रहे हैं. उनका कहना है कि उच्च अधिकारियों को पत्र लिख दिया है. उनकी अनुमति मिलेगी तो भवन को शिफ्ट कर लेंगे.

इसके साथ ही मंडाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डीसीएम डिस्पेंसरी बोरखेड़ा डिस्पेंसरी और गड़े पान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन भी बनकर तैयार हैं लेकिन उनका उन्हें शुरू नहीं किया जा रहा है डीसीएम स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहा है उसका किराया हर माह दिया जा रहा है लेकिन नए भवन में सीएमएचओ शिफ्ट नहीं करना चाहते हैं. नए भवन में भी लगातार चोरियां हो रही है. ऐसे में ठेकेदार भी परेशान है गड़े पान और बोरखेड़ा के भी यही हाल हैं वह पुराने और खस्ताहाल भवन में चल रहे हैं जबकि नई बिल्डिंग बनकर तैयार है इन भवनों को बनकर तैयार हुए 5 से 8 महीने हो गए हैं सभी भवन बंद पड़े हैं.