खबर का असर: RMRS में वित्तीय हानि का मामला, कोटा संभागीय आयुक्त ने तलब की रिपोर्ट

संभागीय आयुक्त द्वारा जानकारी मांगने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में अस्पताल अधीक्षक की ओर से साइकिल स्टैंड के पूर्व संवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है. 

खबर का असर: RMRS में वित्तीय हानि का मामला, कोटा संभागीय आयुक्त ने तलब की रिपोर्ट
संभागीय आयुक्त ने अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है.

मुकेश सोनी, कोटा: एमबीएस अस्पताल में आरएमआरएस में साइकिल स्टैंड के बदले करीब 12 लाख 50 हजार रुपये की वित्तीय हानि होने की खबर 'जी मीडिया' में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है. 

संभागीय आयुक्त ने अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है. इधर संभागीय आयुक्त द्वारा जानकारी मांगने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में अस्पताल अधीक्षक की ओर से साइकिल स्टैंड के पूर्व संवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है. 

अमानत में खयानत का मामला दर्ज
अस्पताल अधीक्षक की ओर नयापुरा थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है. पुलिस ने भी अधीक्षक की शिकायत पर आईपीसी की धारा 406 (अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया है. जांच अधिकारी ने अस्पताल प्रशासन से जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगा है. मसलन पूर्व संवेदक द्वारा कितनी धरोहर राशि जमा करवाई गई, साइकिल स्टैंड के पेटे (बदले) कब-कब और कितने-कितने पैसे जमा करवाए गए?

ये है पूरा मामला
अस्पताल प्रशासन ने साल 2017 में अस्पताल परिसर स्थित साइकिल स्टैंड का ठेका की निविदा जारी की थी. निविदा के तहत सालाना करीब 45 लाख रुपये राशि तय की थी. संवेदक ने साल भर ठेका भी चलाया. लेकिन समय अवधि पूरी होने के बाद भी जब अस्पताल प्रशासन दोबारा टेंडर नही निकाल सका तो उसी संवेदक को तीन माह का अवधि विस्तार दे दिया गया. तीन माह तक ठेका संचालक ने साइकिल स्टैंड के पेटे लोगो से राशि वसूली लेकिन अस्पताल में जमा नही करवाई. इस बीच अस्पताल प्रशासन ने नई निविदा जारी कर दी. दूसरे संवेदक के नाम ठेका जारी हो गया. 

इधर दस महीनों से अस्पताल प्रशासन पूर्व संवेदक से पैसा वसूल करना ही भूल गया, जिसके चलते आरएमआरएस को करीब 12 लाख 50 हज़ार की वित्तीय हानि हुई. 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ठेका अवधि खत्म होने पर एक शातिर बाबू ने संवेदक फर्म की घरोहर राशि रिलीज कर दी थी. लेकिन 3 माह का अवधि विस्तार बढ़ाने के दौरान ठेका संवेदक से न तो एडवांस चेक लिए, न ही एफडीआर जमा करवाई. जबकि नियम और शर्तों के मुताबिक संवेदक को तीन माह की राशि एडवांस जमा करवानी होती है. यानी शर्त के मुताबिक, तीन माह की अवधि विस्तार के पेटे पूर्व संवेदक को 12 लाख 50 हज़ार की राशि एडवांस जमा करानी थी लेकिन पूर्व संवेदक ने राशि जमा नहीं करवाई. 

अस्पताल प्रशासन भी पूर्व संवेदक से राशि वसूलना भूल गया. कागजों में खेल करने के चक्कर में बैक डेट में पूर्व संवेदक को नोटिस भेजता रहा क्योंकि अस्पताल प्रशासन के पास न तो पूर्व संवेदक द्वारा दिया गया चेक था (धरोहर राशि), न ही कोई डॉक्यूमेंट. बस यही शतरंजी चाल शातिर बाबू की गले की फांस बन गई. अब न निगलते बन रहा है, न ही उगलते.

एमबीएस चौकी इंचार्ज ने क्या बताया
एमबीएस चौकी इंचार्ज और जांच अधिकारी नयापुरा थाना एएसआई मुकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल अधीक्षक ने साइकिल स्टैंड के पूर्व संवेदक अभय कुमार के खिलाफ शिकायत दी है कि उसमें 2017 में साइकिल स्टैंड का ठेका लिया था. उसके बाद उसका ठेका खत्म हो गया, लेकिन उसने 12 लाख 50 हजार की बकाया राशि जमा नहीं कराई. पूर्व संवेदक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. इस मामले में हमने अस्पताल प्रशासन से रिकॉर्ड भी मांगा है.