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कोटा: छात्र हुए फेल तो स्कूल ने थमाई टीसी, रिजल्ट बिगड़ने की दी दलील

कोटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भदाना से करीब 20 बच्चों को स्कूल से टीसी देकर इसलिए निकाल दिया क्योंकि वो पढ़ाई में कमजोर थे.

कोटा: छात्र हुए फेल तो स्कूल ने थमाई टीसी, रिजल्ट बिगड़ने की दी दलील
मजबूरन विद्यार्थियों को अब दूसरे स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ना पड़ रहा है.

मुकेश सोनी/कोटा: प्रदेश के कोटा संभाग के एक सरकारी स्कूल से कमजोर बच्चों को टीसी काटकर निकालने का मामला सामने आया है. स्कूल प्रबंधन की कारगुजारी के कारण पीड़ित बच्चे 5 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करके दूसरे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं.

प्रदेश सरकार शिक्षा के अधिकार के तहत हर बच्चे को शिक्षित करना चाहती है ताकि वो बड़ा होकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके. लेकिन कोटा के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने का मामला सामने आया है. कोटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भदाना से करीब 20 बच्चों को स्कूल से टीसी देकर इसलिए निकाल दिया क्योंकि वो पढ़ाई में कमजोर थे. इनमे से कई छात्र 9वीं कक्षा में दो बार फेल हो गए थे. 

वहीं मजबूरन विद्यार्थियों को अब दूसरे स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ना पड़ रहा है. इनमे से कई विद्यार्थी तो 5 किलो मीटर दूरी पर स्थित राजकीए जवाहर लाल नेहरू उच्च माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. यहां प्रिंसिपल को आप बीती सुनाई. उसके बाद प्रिंसपल ने चार विद्यार्थियों का दाखिला अपने स्कूल में करवाया. बच्चों का आरोप है कि पढ़ाई में कमजोर होने के कारण उनको टीसी थमा दी गई, ताकि स्कूल का रिजल्ट नहीं बिगड़े.

बता दें कि यह स्कूल कक्षा 1 से 12 वीं तक है. इस स्कूल में करीब 415 विद्यार्थी अध्ययनरत है. कक्षा 9 वीं में कुल 63 विद्यार्थियों में से 30 विद्यार्थी फेल हुए थे. स्कूल प्रबंधन की मानें तो 2 बार 9 वी में फेल होने वाले 10 बच्चों की टीसी काटी गई है. इधर स्कूल ने बेदखल किये गए बच्चों का कहना है कि 9 वी कक्षा के ही 20 बच्चों की टीसी काटकर घर भेज दिया गया है. इन विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी इसी स्कूल में नहीं हुई, बल्कि ये दूसरे स्कूलों में दाखिले के लिए गए तो वहां भी स्कूल प्रशासन ने इनका दाखिला नहीं किया. छात्र दिनेश ने बताया कि भदाना स्कूल में शिक्षक पढ़ाना ही नहीं चाहते है. नवीं में एक बार फेल हो गया. इस कारण टीसी थमा दी. जबकि पहले दो बार फेल होने पर टीसी दी जाती थी. जब स्कूल में गए तो एक शिक्षिका ने कहा कि हम तुम्हें कक्षा में बैठा लेंगे, लेकिन हम पढ़ाएंगे नहीं.

ये विद्यार्थी कक्षा 1से 8 वीं तक इसी स्कूल में अध्ययनरत रहे है. सभी कक्षाओं में इन्हें पास किया गया. ऐसा नहीं है कि स्कूल में टीचर के पद खाली है. स्कूल में 24 में से 2 पद ही खाली है. स्कूल के प्रधानाचार्य मुकेश तिवारी का कहना है कि इस साल कुल कक्षा 6 से 12वीं तक 48 विद्यार्थियों की टीसी काटी गई है. इनमें 12 वीं में पास होने वाले 33 विद्यार्थी शामिल है. 9 वीं में कुल 30 विद्यार्थी फेल हुए है. 9 वीं की 10 टीसी काटी है. जो भी आएगा उसकी टीसी काटी जाएगी. हमने इन बच्चों पर काफी पढ़ाई को लेकर प्रयास किए है, लेकिन ये दसवीं में फेल हो जाएंगे. इससे बोर्ड का परीक्षा परिणाम कमजोर रहेगा.

एक तरफ तो सरकार शिक्षा के अधिकार की बात कर रही है. दूसरी ओर सरकारी नुमाइंदे अपने स्कूल के बेहतर रिजल्ट के लिए कमजोर बच्चों को निकालने में लगे है. उम्मीद है कि सरकार ऐसे सरकारी नुमाइंदों पर सख्त कार्रवाई करेगी ताकि कमजोर बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित ना हो सके.