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कोटा: पढ़ाई के साथ स्किल डेवल्पमेंट पर भी फोकस, वेस्ट से चीजे बनाकर छात्राएं बन रहीं आत्म निर्भर

टेक्सटाइल विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. प्रेरणा सक्सेना का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य साफ है. पढ़ाई के साथ साथ छात्राओं का स्किल डवलप करके उन्हें आत्म निर्भर बनाया जाए.

कोटा: पढ़ाई के साथ स्किल डेवल्पमेंट पर भी फोकस, वेस्ट से चीजे बनाकर छात्राएं बन रहीं आत्म निर्भर
इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को आत्म निर्भर बनाना है.

कोटा/ मुकेश सोनी: राजस्थान के कोटा का जानकी देवी बजाज कन्या महाविद्यालय प्रदेश का पहला कॉलेज है जहां "सीखो कमाओ योजना" की शुरुआत की गई है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत कॉलेज में पढ़ने वाली नियमित छात्राओं को पढ़ाई के साथ साथ खाली पीरियड में बाकायदा स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. सप्ताह में चार दिन एक एक घंटे का समय देकर छात्राएं अपनी प्रतिभा को अमलीजामा पहना रही है.

70-30 में बांट रहे कमाई
यहां अच्छी बात यह है कि इस "लर्निग द अर्निंग" कार्यक्रम से होने वाली कमाई में से 70 प्रतिशत हिस्सा छात्राओं को दिया जाता है ताकि उनका जरूरत का खर्चा छात्रा वहन कर सकें. वहीं 30 प्रतिशत हिस्सा कॉलेज के विकास के लिए निर्धारित किया गया है. जेडीबी आर्ट्स में टेक्सटाइल विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. प्रेरणा सक्सेना ने बताया कि यहां छात्राओं को वेस्ट से बेस्ड चीजे बनाने, आचार मुरब्बा, साबुन, सर्फ, अमृत धारा, हैंड बैग, केरी बैग, पेपर बेग, आसन, फोटो फ्रेम, पोटली बैग, फोल्डर सेमिनार, मेहंदी, साड़ी फॉल लगाना, रफू, चाय बनाना, नाश्ता, खाना पकाना, सहित ब्यूटीशियन का कोर्स करवाया जा रहा है. जरूरत के हिसाब से बाकायदा ट्रेनर को बुलाकर छात्राओं को विभिन्न विधाओं के गुर सिखाये जा रहे हैं. फिर ट्रेंड हुई छात्राएं अपनी सहयोगी छात्राओं को गुर सिखा रही है. 

छात्राओं को बना रहे आत्म निर्भर
टेक्सटाइल विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. प्रेरणा सक्सेना का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य साफ है. पढ़ाई के साथ साथ छात्राओं का स्किल डेवलप करके उन्हें आत्म निर्भर बनाया जाए. उनके द्वारा ही उनका पढ़ाई खर्च, कॉलेज आने जाने का खर्च निकले. इसके साथ ही भविष्य में खुद का रोजगार स्थापित कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें.

मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का सहारा
"सीखो कमाओ योजना" में तैयार सामग्री को बेचने कर लिए कॉलेज प्रशासन ने बाकायदा प्लान भी तैयार किया है. इसके लिए सोशल मीडिया, फेसबुक, ट्विटर कर जरिए यहां तैयार हुए प्रोडक्ट की मार्केटिंग की जा रही है. "गर्ल्स आर्ट्स कोटा" फेसबुक पेज पर तैयार प्रोडक्ट की जानकारी साझा की जा रही है. कार्यक्रम को अभी ट्रायल बेस पर रखा गया है ऑर्डर मिलने पर उनकी होम डिलीवरी तक देने की बात कही जा रही है.

ऑर्डर मिलने हुए शुरू
डॉ. प्रेरणा सक्सेना ने बताया कि छात्राओं द्वारा तैयार की गई पोटली बैग के 60 पीस का ऑर्डर मिला है. जिसकी कीमत प्रति पोटली 85 रुपये है. वहीं छात्राओं द्वारा तैयार किया गया 3 किलो दाना मेथी का अचार, 2 किलो कैरी का अचार भी बेचा जा चुका है. छात्राओ द्वारा तैयार की गई सामग्री के ऑन लाइन ऑर्डर लेने की भी तैयारी है. वहीं कॉलेज केम्पस में केनोपी लगाकर, रोजगार मेले में स्टॉल लगाकर भी सामग्री को बेचा जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनका उपयोग कर सकें. जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में करीब 6 हजार छात्राएं अध्ययनरत हैं. उम्मीद है कि "सीखो कमाओ योजना" जैसे नवाचार से छात्राओं को सम्बल मिलेगा जो उनके आगे आने वाले समय मे मिल का पत्थर साबित होगा. छात्राएं आत्मनिर्भर के साथ साथ रोजगार भी पा सकेंगी.