कोटा मेडिकल कॉलेज की नई गाइड लाइन, अब 14 नहीं, केवल 4 दिन की मिलेगी क्वॉरेंटाइन लीव

हेल्थ वर्कर के आवेदन के आधार पर कमेटी केस बाई केस तय करेगी.

कोटा मेडिकल कॉलेज की नई गाइड लाइन, अब 14 नहीं, केवल 4 दिन की मिलेगी क्वॉरेंटाइन लीव
हेल्थ वर्कर के आवेदन के आधार पर कमेटी केस बाई केस तय करेगी.

मुकेश सोनी, कोटा: कोविड-19 की ड्यूटी में लगे हेल्थ वर्कर को अब 14 दिन की जगह मात्र 4 दिन की ही क्वॉरेंटाइन लीव मिलेगी. हाल ही में मेडिकल कॉलेज की क्वारंटाइन कमेटी की ओर से नई गाइड लाइन जारी हुई है, जिसके मुताबिक ड्यूटी पूरी होने के बाद हेल्थ वर्कर को 4 दिन का होम रेस्ट होगा. 

होम रेस्ट से लौटने पर कोविड जांच करवाना अनिवार्य होगा. यदि किसी हेल्थ वर्कर के पास होम आइसोलेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं तो वह विभागीय क्वॉरेंटाइन कमेटी के पास आवेदन कर सकता है.

कमेटी करेगी तय
गाइड लाइन के मुताबिक, अब कमेटी केस बाई केस डिसाइड करेगी कि हेल्थ वर्कर को क्वारंटाइन की जरूरत है या नहीं. जो हेल्थ वर्कर एक्सपोजर नहीं है, उसने पीपी किट सहित सुरक्षा के मापदंड पूरा करते हुए ड्यूटी पूरी की है. उसमें कोई लक्षण नहीं हैं तो उनको क्वारंटाइन देय नहीं होगा. जो एक्सीडेंटल एक्स्पोज़र हैं तो उसको क्वारंटाइन देय होगा. हेल्थ वर्कर के आवेदन के आधार पर कमेटी केस बाई केस तय करेगी.

नई गाइड लाइन से रोष
नई गाइड लाइन से कोविड में ड्यूटी कर रहे हेल्थ वर्कर में रोष व्याप्त है क्योंकि पूर्व में कोविड में ड्यूटी कर चुके हेल्थ वर्कर को 14 दिन का क्वारंटाइन मिल चुका है, जिनकी ड्यूटी 13 जून के बाद से खत्म हो रही है. उन्हें क्वारंटाइन करना है. नई गाइड लाइन से अब उन्हें 14 दिन की जगह केवल 4 दिन का क्वारंटाइन देय होगा. 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नई गाइड लाइन जारी होने से क्वारंटाइन कमेटी को 12 जून को 18 हेल्थ वर्कर को 14 दिन के क्वारंटाइन आदेश को निरस्त करना पड़ा.

क्या है मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का कहना
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि हाल ही में जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज की कमेटी ने हेल्थ वर्कर्स के क्वॉरेंटाइन लिव के लिए गाइडलाइन बनाई , उस गाइड लाइन में आईसीएमआर के एक्सपोजर का भी ध्यान रखा गया था. राज्य सरकार ने उस गाइड लाइन को सभी मेडिकल कॉलेज में लागू करने के निर्देश दिए थे. कोटा में एडिशनल प्रिंसिपल और तीन नर्सिंग स्टाफ की अगुवाई में क्वारंटाइन कमेटी बनाई. जो केस बाई केस  निर्णय लेंगे कि हेल्थ वर्कर को क्वारंटाइन की जरूरत है या नहीं. 

वैसे सभी लोग प्रोफेशनल हैं, काम करने वाले हैं. सभी समझते हैं. अब वायरस का ट्रेंड भी सब ने देख लिया है कि कितना एक्स्पोज़र है कितना नहीं है. हेल्थ वर्कर कॉपरेटिव भी हैं. सब अपनी ड्यूटी अच्छे से कर रहे हैं, मुझे नहीं लगता उनमें कोई रोष होगा.