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कोटा: अस्पतालो में मरीज की सेहत से समझौता, जरूरत से कम सप्लाई हो रहीं बुखार की दवाई

मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से पुराने स्टॉक से अस्पतालों में 2 लाख 92 हजार 350 की सप्लाई की गई. वहीं लोकल स्तर पर खरीद के लिए 4 लाख 44 हजार गोलियों को एनएसी जारी हुई. 

कोटा: अस्पतालो में मरीज की सेहत से समझौता, जरूरत से कम सप्लाई हो रहीं बुखार की दवाई
कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में आरएमसीएल से 35 लाख 85 हजार गोलियों की डिमांड की गई थी

कोटा/ मुकेश सोनी: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में मरीजो की सेहत से समझौता करने का मामला सामने आया है. अस्पतालों में बुखार के समय मरीजो को दी जाने वाली कॉमन दवा पैरासिटामोल की कमी है. इस कारण कई मरीजों को मजबूरन बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है. 

मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में साल 2018-19 के लिए आरएमसीएल से 35 लाख 85 हजार गोलियों की डिमांड की गई थी. जिसमे मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस (एमसीडब्ल्यू) में 80 हजार गोलियों की सप्लाई हुई. मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से पुराने स्टॉक से अस्पतालों में 2 लाख 92 हजार 350 की सप्लाई की गई. वहीं लोकल स्तर पर खरीद के लिए 4 लाख 44 हजार गोलियों को एनएसी जारी हुई.

मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में 11 महीनों में केवल 7 लाख 36 हजार 350 गोलियां सप्लाई हुई. जबकि पिछले साल की दवा खपत की बात करें तो केवल एमसीडब्ल्यू से ही 21 लाख 94 हजार 600 गोली सप्लाई की गई थी. इधर सप्लाई नहीं होने के चलते मरीजों को बुखार डाउन करने के लिए डाइक्लोफेनिक, मेफेनामिकएसिड, एसिक्लोफेनिक जैसी अन्य दवा दी जा रही है. जो एलर्जी वाले मरीजो के लिए इतनी सेफ नही है.

रेट के कारण फंसी सप्लाई
मेडिकल कॉलेज द्वारा लोकल स्तर पर दवा सप्लाई के टेंडर किए गए थे. टेंडर 5 फर्म को जारी किया गया था. टेंडर के मुताबिक पेरासिटामोल 500 एमजी दवा की कीमत सबसे कम (5 रुपये की 100 गोली) अग्रवाल डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा डाली गई. सूत्रों की माने तो कम रेट पर आरसी जारी होने के कारण नुकसान होने के चलते फर्म द्वारा दवा की सप्लाई नहीं की जा रही. जबकि अस्पताल प्रशासन द्वारा बार बार डिमांड जारी की रही है. इन सबके बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है. इसी कारण कॉलेज प्रशासन की कार्य शैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है.