कोटा को होर्डिंग फ्री करने के लिए नगर निगम ने कसी कमर, चलाया खास अभियान

नगर निगम के राजस्व अनुभाग ने 230 ऐसे अवैध होर्डिंग चिन्हित किए थे, जो शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ कई सड़कों पर लगे हुए थे. 

कोटा को होर्डिंग फ्री करने के लिए नगर निगम ने कसी कमर, चलाया खास अभियान
टीम अब तक करीब 70 अवैध होर्डिंग को हटा चुकी है.

कोटा: राजस्थान का कोटा शहर जल्द ही होर्डिंग फ्री बनने जा रहा है. इसके लिए नगर निगम ने कमर कस ली है. शहर में जगह-जगह लगे अवैध होर्डिंग्स को हटाना शुरू कर दिया है. शहर को बदरंग और बदसूरत बनाने वाले होर्डिंग अब नजर नहीं आएंगे. निगम की टीम ने शहर की छतों पर लगे सभी फ्लैग्स को हटा दिया है. जल्द ही इनके होर्डिंग कटवा कर जब्त किया जाएगा.

नगर निगम के राजस्व अनुभाग ने 230 ऐसे अवैध होर्डिंग चिन्हित किए थे, जो शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ कई सड़कों पर लगे हुए थे. निगम की टीम ने उपायुक्त कीर्ति राठौड़ के नेतृत्व में अवैध होर्डिंग को हटाने की कार्रवाई शुरू की है. टीम अब तक करीब 70 अवैध होर्डिंग को हटा चुकी है. इसके अलावा जगह- जगह लगे फ्लैग्स को भी 90 फीसदी तक हटाया जा चुका है. 

करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान
बता दें कि नगर निगम अपने विज्ञापन के साइटों पर यूनीपोल का बेचान करता है, जिससे निगम की करोड़ों रुपए की आय होती है. लेकिन, इन अवैध होर्डिंग से निगम की आय नहीं हो रही थी. यह लोग करीब 50 लाख रुप जमा करा रहे थे, जबकि यह लोग 2 से 3 करोड़ रुपए इन अवैध होर्डिंग्स के जरिए हर माह कमा रहे थे. दूसरी तरफ निगम को राजस्व नहीं मिलने के चलते करोड़ों का नुकसान भी हो रहा था. 

खतरा बन गए थे अवैध होर्डिंग
शहर के मुख्य मार्गों पर अधिकांश छतों पर यह अवैध होर्डिंग्स आसानी से अधिक जाते थे, जिनसे दुर्घटनाओं का आशंका भी बनी हुई थी. क्योंकि तेज आंधी और अंधड़ में यह बड़े-बड़े होर्डिंग इस तरह से हिलते थे कि कहीं गिर न जाए. इनसे आसपास के लोगों की जान और माल को भी खतरा था. पिछले एक-दो सालों में तेज आंधी में शहर के कई जगह अवैध होर्डिंग धराशाई भी हुए हैं. जिनसे आसपास में रहने वाले लोगों को नुकसान हुआ है.

हालांकि, अवैध होर्डिंग के खिलाफ नगर निगम कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन इनको हटाने के लिए टीमें चाहिए जो नगर निगम के पास नहीं है. वर्तमान में 3 टीमें ही काम कर रही है और यह टीमें जिस गति से काम कर रही है. ऐसे में इन होर्डिंग्स को हटाने में करीब 2 से 3 माह का समय लग सकता है. निगम आयुक्त और प्रशासक वासुदेव मालावत का कहना है कि वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों से ही काम कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही संसाधन बढ़ाकर और टीमें ज्यादा लगा कर इनको तुरंत हटाया जाएगा.