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कोटा: MBS अस्पताल में 8 महीने से बंद उपकरणों की सप्लाई, कई मराजों के ऑपरेशन रुके

आमतौर पर प्रतिमाह एमबीएस में 3 व नए अस्पताल में 2 स्पाइन के रोगियों के ऑपरेशन होते है. यानी दोनों अस्पतालों में प्रतिमाह 5 स्पाइन के ऑपरेशन होते थे.

कोटा: MBS अस्पताल में 8 महीने से बंद उपकरणों की सप्लाई, कई मराजों के ऑपरेशन रुके
कई मरीजों को बिना ऑपरेशन किये उनकी छुट्टी कर दी गई.

मुकेश सोनी/कोटा: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से सम्बन्ध एमबीएस व नए अस्पताल में पिछले 8 माह से स्पाइन के उपकरण जैसे राड़ स्क्रू सहित अन्य सामान सप्लाई नहीं हुए. ऐसे में दोनों अस्पतालों में लम्बे समय से मरीजों के स्पाइन के ऑपरेशन ही नहीं हुए. सूत्रों की मानें तो 4 माह से स्पाइन के उपकरण की सप्लाई नहींं होने के कारण अब तो मरीजों को अस्पताल में भी भर्ती नहींं किया जा रहा है.

दरअसल अस्पताल प्रशासन ने इंप्लांट उपकरणों की सप्लाई के लिए जिस फर्म से अनुबंध किया था. उस फर्म द्वारा स्पाइन के सामान की सप्लाई रेट कम डाली गई. इस कारण डिमांड के बाद भी फर्म द्वारा स्पाइन के सामानों की सप्लाई नहीं की गई. इधर सामानों की सप्लाई नहीं होने के कारण एमबीएस में भर्ती रहे मरीजो के ऑपरेशन टलते रहे हैं. जून माह में जी मीडिया ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था. जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने सम्बंधित फर्म को चेतावनी पत्र जारी किया था. उसके बाद भी फर्म ने स्पाइन के सामानों की सप्लाई नहीं दी. सप्लायर फर्म की राजनीतिक एप्रोच के आगे मेडिकल कॉलेज प्रशासन बेबस नजर आया.

8 माह से मरीज परेशान
जानकारी के मुताबिक आमतौर पर प्रतिमाह एमबीएस में 3 व नए अस्पताल में 2 स्पाइन के रोगियों के ऑपरेशन होते है. यानी दोनों अस्पतालों में प्रतिमाह 5 स्पाइन के ऑपरेशन होते थे. स्पाइन के उपकरणों की सप्लाई नहीं होने के कारण पिछले 8 माह से अस्पतालों में ऑपरेशन नहीं हुए. उपकरणों की सप्लाई को लेकर विभागाध्यक्ष से लेकर यूनिट हेड तक शिकायत करते करते थक गए. इस बीच एमबीएस में कुछ मरीजो को ऑपरेशन के लिए डेढ़ से दो माह तक भर्ती रखा भी गया. बाद में बिना ऑपरेशन किये उनकी छुट्टी कर दी गई. मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दो माह से स्पाइन के ऑपरेशन के मरीज दोनो अस्पतालो में भर्ती भी नहीं हो रहे.
 
रसूख के आगे बेबस
सप्लायर फर्म की जड़े इतनी गहरी है कि वो सांठ-गांठ करके पहले तो टेंडर हासिल कर लेता है. जब सामान सप्लाई की बारी आती है, तो टेंडर के मुताबिक सामान सप्लाई नहीं करता. बाबुओं से मिलीभगत करके दूसरी गली निकाल कर सामानों की सप्लाई करता है. इम्प्लांट सप्लाई के टेंडर में भी यही हुआ. टेंडर हासिल करने के लिए फर्म ने स्पाइन के उपकरणों की दर कम डाली. जब स्पाइन के उपकरणों की सप्लाई के वर्क ऑर्डर जारी हुए थे तो नुकसान होने के कारण फर्म ने सप्लाई से हाथ खींच लिए. फर्म की कारगुजारी अस्पतालो में भामाशाह मरीज को दर्द देती रही. इससे इतर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीजों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं रखा.

मेडिकल कॉलेज कोटा में प्राचार्य डॉ विजय सरदाना का कहना है कि  ये बात सही है डेढ़ महीने पहले शिकायत आई थी की फर्म द्वारा स्पाइन के इंप्लांट सप्लाई में नहीं किये जा रहे. इम्प्लांट सप्लाई नहीं होने का मामला अधीक्षकों साथ हुई मीटिंग के एजेंडे रखा था. उस बैठक में सभी एचओडी को निर्देश दिए गए थे कि मरीज को किसी भी तरह की दिक्कत ना हो. अभी 15 दिन पहले ही दूसरी फर्म (L 2) को स्पाइन के इम्प्लांट सप्लाई का आर्डर दिया है. अभी स्पाइन के मरीज नहीं आ रहे. ऐसे डिफाल्टर्स के खिलाफ़ लेखा नियमो के तहत होनी चाहिए. डिफाल्टर फर्मो के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई है जुर्माना भी वसूला गया है.