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कोटा: भारी बारिश से हजारों बीघा की फसल बर्बाद, किसानों को हुआ करोड़ों का नुकसान

बीते एक सप्ताह से हो रही बारिश के बाद क्षेत्र के ज्यादातर खेत पानी से भरे है. क्षेत्र में बीते दो-तीन दिनों से बारिश थमी हुई है लेकिन ज्यादातर खेतों में पानी भरा है.

कोटा: भारी बारिश से हजारों बीघा की फसल बर्बाद, किसानों को हुआ करोड़ों का नुकसान
लाखों हैक्टेयर की फसलें बर्बाद हो गई.

कोटा: एक सप्ताह पूर्व तक खेतों में लहलहाती फसलों को देख किसानों के चेहरों पर दिख रही खुशी अतिवृष्टि से काफूर हो गई है. किसानों की सारी मेहनत पर दो दिनों की भारी बारिश ने पानी फेर दिया. जिलेभर में बीते दिनों हुई भारी बारिश से हजारों बीघा की फसलें बरबाद हो गई. खेतों में फसले पानी में डूबी है तो अब किसानों की उम्मीद भी टूटती जा रही है. एक अनुमान के मुताबिक हाड़ौती क्षेत्र में किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है.

किसान, हर साल खेत में बीज बोता है. इस उम्मीद में की फसल होगी तो उसकी गृहस्थी की गाड़ी चलेगी. खून-पसीनें से सींचकर किसान फसलों को बड़ा करते है. लेकिन किसानों की आजिविका का साधन अब उनके लिए ही परेशानी बनता जा रहा है. साल दर साल प्राकृतिक प्रकोप से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कभी फसलें पानी के अभाव में सूख जाती है तो कभी रोग प्रकोप से नष्ठ हो जाती है. इस साल भी एक सप्ताह पूर्व तक खेतों में लहलहाती फसलों को देख किसानों का मन हर्षा रहा था. लेकिन गत दिनों हुई बारिश किसानों के लिए बैरन बन गई. लाखों हैक्टेयर की फसलें बर्बाद हो गई.

कोटा जिले में एक सप्ताह पूर्व तक इस बार मौसम फसलों के अनुकूल रहा. फसलों को जरूरत पर बारिश का पानी मिलता रहा. ऐसे में किसानों को खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर अच्छी उपज की उम्मीद थी. लेकिन गत दिनों हुई बारिश ने किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. बीते एक सप्ताह से हो रही बारिश के बाद क्षेत्र के ज्यादातर खेत पानी से भरे है. क्षेत्र में बीते दो-तीन दिनों से बारिश थमी हुई है लेकिन ज्यादातर खेतों में पानी भरा है. दूर-दूर तक जहां नजर जाती है वहां खेतों में पानी का सैलाब नजर आ रहा है. हजारों बीघा की फसलें पानी में डूब गई तो किसानों की उम्मीदों भी धूल गई.

लगातार बारिश के बाद क्षेत्र के ज्यादातर खेत जलमग्न है. जिनमें फसल खराब की चिंता अब किसानों को सताने लगी है. खेतों में भरे पानी का निकास नहीं होने से खराब होती फसलों को देख किसानों के चेहरों पर चिंता झलकने लगी है. किसान जनप्रतिनिधियों के पास अपनी पीड़ा लेकर पहुंचने लगे है. जनप्रतिनिधि जरूर किसानों की पीड़ा सुनकर उनके तारणहार बनने की कोशिश में है. राम के रूठने के बाद अब किसानों को राज से उम्मीद है. रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सांगोद क्षेत्र के देवली, बालूहेड़ा, कुराड़ आदि गांवों का दौरा कर बारिश से फसलों में हुए खराबे का जायजा लिया.

फसल खराब होने के बाद अब किसानों को मुआवजे की मांग भी जोर पकडऩे लगी है. हालांकि कृषि विभाग ने हाड़ौती में बारिश से खराबे का सर्वे करवाने का आदेश दे दिया है, लेकिन अभी तक सरकारी नुमाईंदे खेतों की ओर रूख नहीं कर रहे. अब देखना यह है कि सरकार धरतीपुत्रों की समस्या को किस हद तक दूर कर पाती है.