बूंदी में बादल फटने जैसे थे हालात, अब तिनको को बीन रहे लोग

Bundi News : बूंदी जिले में 22 और 23 अगस्त को मूसलधार बारिश ने एक भयानक स्थिति पैदा कर दी. नैनवां, केशोरायपाटन, खटकड़, कापरेन और लाखेरी के गांवों के ग्रामीणों की पीड़ा उनके चेहरे पर झलक रही है. सबसे ज्यादा हालत जिले के देलूंदा , रियाणा, ख्यावदा, भाटों का खेड़ा, माली पाड़ा गांवों मेज नदी किनारे बसे हुए हैं गावों के खराब है.

बूंदी में बादल फटने जैसे थे हालात, अब तिनको को बीन रहे लोग
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Bundi News : बूंदी में दो दिन की बारिश ने नैनवां, केशोरायपाटन, खटकड़, कापरेन और लाखेरी के गांवों के साथ ही देलूंदा , रियाणा, ख्यावदा, भाटों का खेड़ा, माली पाड़ा गांवों मेज नदी किनारे बसे लोगों की जिंदगी उजाड़ दी है. हालांकि पानी से इन गांव की दूरी 2 से 3 किलोमीटर थी, लेकिन में नदी में उफान आने के चलते इन गांवों के अंदर पानी आ गया था. बाढ़ के बाद आए नुकसान के वो संकेत आज भी गांवों में दिखाई देते हैं. कीचड़ और दलदल के बीच, लोग अपने सामान को समेटने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनका मन गहरे सदमे में है.

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पंचायत भवन से लेकर अस्पतालों तक बाढ़ ने सब कुछ डुबो दिया. यह एक ऐसी आपदा थी, जिसने ग्रामीणों को अचानक अपने जीवन को सुरक्षित करने की दौड़ में धकेल दिया.23 अगस्त की सुबह मेज नदी ने खतरे के निशान को पार कर लिया था और इसने गांव में अफरा-तफरी मचा दी.

लोग अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे रहे, इसी दौड़ में अपना जरूरी सामान भी वे नहीं बचा सके. घरों से पानी धीरे-धीरे अंदर घुस रहा था, जिससे अनाज और अन्य कीमती सामान भीग गए. कई सालों बाद बाढ़ की इस विभीषिका का सामना करने को विवश हुए ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई.

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कई मकान धराशायी हो गए, जबकि पर्वतीय क्षेत्र में बिना किसी तैयारी के आए बाढ़ ने बहुत से घरों की नींव तक को धंसाया. एक बुजुर्ग महिला के आंसू उनके दर्द को बयां करते हैं, जिसमें वह बताती हैं कि उनकी संचित संपत्ति बाढ़ के साथ बह गई. भविष्य के सपने और घर का आधार, सब एक पल में उड़न छू हो गया.

ग्रामीणों ने अपने बच्चों और जानवरों को बचाने की हर संभव कोशिश की. बच्चों को ऊंचाई पर बैठाकर सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में, अनेक जानवर पानी में बह गए. पानी ने उनकी ज़िंदगी के सभी सपनों को चुरा लियाऔर अब केवल धारणाओं और दुःख भरे शब्दों के साथ सामूहिक संघर्ष बचा है. शिक्षा का साधन, परिवार के दस्तावेज, सभी कुछ इस बाढ़ के कहर में बर्बाद हो गए. यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक परिवार के अस्तित्व पर खतरा बन गया है.

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