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Kota News: प्रदेश के शहरी विकास एवं आवास (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा गुरुवार रात कोटा दौरे पर पहुंचे. उन्होंने चंबल रिवर फ्रंट परियोजना के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि विश्व का सबसे बड़ा घंटा अब नहीं खुल पाएगा. उन्होंने बताया कि इस संबंध में विशेषज्ञों से हुई चर्चा में यह सामने आया है कि इसे सुरक्षित रूप से खोलने वाला कोई विशेषज्ञ नहीं मिल रहा है. ऐसे में इसे खंडहर के रूप में ही देखना पड़ेगा.
मंत्री खर्रा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि रिवर फ्रंट परियोजना नुकसान में चल रही है और इसकी जांच भी लंबित है. रिवरफ्रंट का मेन आकर्षण यह विशाल घंटा होना था. खर्रा ने कहा कि उन्होंने विशेषज्ञों से घंटा खुलवाने को लेकर बात की, लेकिन ऐसा कोई एक्सपर्ट नहीं मिल रहा जो इसे सही-सलामत खोल सके. लगता है इसे खंडहर के रूप में ही देखना होगा. जब उनसे जिम्मेदारी के सवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जिम्मेदार उस समय के कर्ताधर्ता हैं, जिन्होंने लोकार्पण में जल्दबाजी की. इस लापरवाही के मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज है, लेकिन पुलिस कार्रवाई से कोई विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है.
सर्किट हाउस में विधायक संदीप शर्मा और जिला अध्यक्ष राकेश जैन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मंत्री का स्वागत किया. मंत्री ने बताया कि वे शुक्रवार को शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण करने के बाद झालावाड़ के कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद भोपाल में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में आयोजित उत्तरी क्षेत्र के शहरी विकास मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे.
एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी
कोटा में आवासीय योजनाओं की कमी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि उन्होंने संबंधित एजेंसियों को मांग के आकलन के आधार पर योजनाएं बनाने के निर्देश दिए हैं. चंबल गार्डन के विकास के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि एनजीटी के नियमों का पालन करते हुए ही सभी कार्य विधिक रूप से परीक्षण के बाद ही किए जाएंगे, ताकि अजमेर के सेवन वंडर मामले जैसा हश्र नहीं हो, जिसे तोड़ना पड़ा था.
रिवर फ्रंट को फिर 'सफेद हाथी' कहा
कोटा सिटी पार्क और रिवरफ्रंट की प्रवेश फीस कम करने के सवाल पर मंत्री खर्रा ने एक बार इस परियोजना को 'सफेद हाथी' करार दिया. उन्होंने कहा कि यहां मूलभूत सुविधाओं और हरियाली की कमी है. सरकार इस पर विचार कर रही है कि इसे 'नो प्रॉफिट नो लॉस' के स्तर पर कैसे लाया जाए. इस विषय पर जयपुर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी और तत्पश्चात एक ठोस योजना बनाई जाएगी.
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