कोटा की दाढ़ देवी मंदिर में नवरात्र में चढ़ाएं 'आलता', धन-दौलत की होगी बरसात!

Dadh Devi Kota: राजस्थान में कोटा जिले में स्थित दाढ़ देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का स्थान है. यहां देवी मां को आलता चढ़ाने की अनोखी परंपरा प्रचलित है. भक्त मानते हैं कि इस परंपरा को निभाने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

कोटा की दाढ़ देवी मंदिर में नवरात्र में चढ़ाएं 'आलता', धन-दौलत की होगी बरसात!
Image Credit: Dadh Devi Kota

Dadh Devi Kota: कोटा जिले में स्थित दाढ़ देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का स्थान है. यहां देवी मां को आलता चढ़ाने की अनोखी परंपरा प्रचलित है. भक्त मानते हैं कि इस परंपरा को निभाने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. नवरात्रि में यहां भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है.

आलता देवी मां के प्रिय श्रृंगारों में से एक माना जाता है. भक्तगण देवी को आलता अर्पित करते हैं. मान्यता है कि मां दाढ़ देवी को आलता चढ़ाने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्त की हर इच्छा पूरी करती हैं. खासकर संतान प्राप्ति, वैवाहिक जीवन में सुख और पारिवारिक समृद्धि के लिए श्रद्धालु यह परंपरा निभाते हैं.

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स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां दाढ़ देवी सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं. बड़ी संख्या में महिलाएं यहां आकर आलता अर्पित करती हैं और देवी से सुख-शांति, संतान सुख और परिवार की रक्षा की प्रार्थना करती हैं. खास अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं.
कोटा जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित दाढ़ देवी मंदिर (Dadh Devi Temple) भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है. यह मंदिर 8वीं से 10वीं शताब्दी का प्राचीन धाम माना जाता है, जहां हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां मां दाढ़ देवी से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है.

नवरात्रि पर लगता है भव्य मेला
हर साल दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान यहां विशाल मेला भरता है. इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

नामकरण से जुड़ी लोककथा
दाढ़ देवी माता के नामकरण के पीछे कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं. एक प्रसिद्ध किवदंती के अनुसार, कोटा के राजा उम्मेद सिंह एक बार भयंकर दाढ़ दर्द से पीड़ित हुए. उन्होंने अनेक वैद्यों और चिकित्सकों से उपचार करवाया, लेकिन किसी से भी आराम नहीं मिला. अंततः वे इस मंदिर में पहुंचे और मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की. मान्यता है कि पूजा करने के बाद राजा का दाढ़ दर्द चमत्कारिक रूप से समाप्त हो गया.

मूर्ति हिलाने में असफल रहे राजा
कहते हैं कि बाद में राजा उम्मेद सिंह ने मंदिर की मूर्ति को एक नए मंदिर में ले जाने का प्रयास किया. इसके लिए उन्होंने कई बार कोशिश की लेकिन हर बार असफल रहे, मूर्ति टस से मस नहीं हुई. इसे माता दुर्गा का आदेश मानकर राजा ने मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित रहने दिया और मंदिर को भव्य स्वरूप दिया. तब से लेकर आज तक यथावत उसी स्थान पर दाढ़ देवी माता की अखंड पूजा होती आ रही है.

दाढ़ देवी मंदिर आज न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व रखता है बल्कि भक्तों की अटूट आस्था और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण कोटा जिले का प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है.

ये लेख सामान्य जानकारी है, जो स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित है, जिसकी जी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.

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Sandhya Yadav

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संध्या यादव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 8 वर्षों का एक्सपीरिएंस है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. संध्या की मुख्य Expertise राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति, क्राइम, प्रशासनिक फैसलों और हाइपरलोकल खबरों की सटीक एवं इन-डेप्थ कवरेज में है. लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है. आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे एक्स (https://x.com/Journosandhya) और लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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