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Kota News: राजस्थान के कोटा शहर से 20 किलोमीटर दूर दाढ़ देवी मंदिर स्थित है, जहां भक्तों की हर मुराद पूरी होती है. यहां पर दाढ़ देवी माता विराजमान हैं. ये माता का मंदिर 8वीं से 10वीं सदी का प्राचीन मंदिर है, जहां हर रोज सैकड़ों भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते हैं.
रियासतकालीन मंदिर की स्थापना कैथून के तंवर राजपूत द्वारा कुलदेवी की आराधना हेतु की गई. कोटा रियासत के महाराजा भी पूजा-अर्चना हेतु मंदिर में नवरात्रि की पंचमी को आते है.
दाढ़ देवी माता के नामकरण के पीछे अनेकों कहानियां जुड़ी हुई हैं. किवदंती है कि एक बार कोटा के राजा उम्मेद सिंह की दाढ़ में भयंकर दर्द उठा.
देश-दुनिया वैद्य के इलाज करवाने पर भी उनकी दाढ़ का दर्द कम नहीं हुआ तब उन्होंने इसी मंदिर में दुर्गा माता की विशेष पूजा की थी, जिससे उनकी दाढ़ का दर्द कम हुआ.
कहते हैं कि इस प्राचीन मंदिर की प्रतिमा को राजा उम्मेद सिंह ने नए मंदिर में ले जाने के लाख जतन किए लेकिन उनकी एक कोशिश कामयाब नहीं हुई और माता रानी की मूर्ति नहीं हिल सकी. इसके बाद राजा उम्मेद सिंह ने इसे माता दुर्गा का आदेश मान कर वहीं स्थापित कर मंदिर को भव्य बनाने का फैसला किया और फिर वहीं यथावत उनकी पूजा करना शुरू कर दी.
भक्तों की बात कर तो हड़ौती के चारों जिलों से भक्त अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. साथ ही मनोकामना पूर्ण होने पर माता का आशीर्वाद लेकर भंडारा का आयोजन भी होता है. नवरात्रि के समय सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजामों को लेकर कैथून थानाधिकारी संदीप शर्मा पुलिस जाप्ते की पर्याप्त उपलब्धता के साथ मंदिर परिसर में मौजूद रहते हैं. साथ ही उद्योग नगर थाना क्षेत्र के साथ समन्वय भी स्थापित रहता है.
मंदिर परिसर में बीच में एक कुंड बना हुआ है, जिसके पानी का स्त्रोत आज तक किसी को समझ नहीं आया है. कहते है कि इस कुंड में जमीन के अंदर से पानी आता है. हर साल दोनों नवरात्रि में यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इस मंदिर में दुर्गा जी के अलावा महाकाल तथा काल भैरव के भी मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु अपने पारिवारिक मांगलिक आयोजन करते हैं. नवजातों को माता का आशीर्वाद दिलवाने के लिए धोक दिलवाई जाती है.
चाहे नए वाहन का पूजन हो या परिवार के मांगलिक आयोजन, गोठ हो या सवामनी, कोटा और आसपास के भक्त माता के मंदिर पहुंचते हैं और माता के दर्शनों के साथ अपनी खुशियां मनाते हैं. वैसे तो कोटा शहर में माता के कई मंदिर हैं, जिनमें प्रमुख रूप से बिजासन माता, आशापुरा माता, काली माता, जोगणिया माता है. लेकिन कोटा की दाढ़ देवी मंदिर की विशेष आस्था एवं मान्यता है, जहां माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है.
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