Kota News: शारदीय नवरात्रि के दिनों में भोजपुरा चामुण्डा माता के दरबार में अमावस्या के दिन से अष्टमी तक यानि नौ दिन तक भव्य मेला लगता है. करीब 1709 वर्ष प्राचीन भोजपुरा चामुण्डा माता के मंदिर पर नवरात्र के दिनों में सुबह से शाम तक सैकड़ों श्रद्वालु दर्शन और पूजन को आते-जाते रहते हैं.
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Kota Mata: मोईकलां बारापाटी वन क्षेत्र की तलहटी में विराजित चामुण्डा माता की महिमा अपरंपार है. यहां पर मां चामुण्डा सहित सातों बहनें विराजमान हैं. नवरात्र के दिनों में माता के दरबार में अमावस्या के दिन से अष्ठमी तक यानि नौ दिन तक भव्य मेला लगता है. करीब 1709 वर्ष प्राचीन भोजपुरा चामुण्डा माता के मंदिर पर नवरात्र के दिनों में सुबह से शाम तक सैकड़ों श्रद्वालु दर्शन और पूजन को आते-जाते रहते हैं.
राजस्थान ही नहीं, समीप के राज्यों से भी श्रद्वालु नवरात्र के मौके पर विशेष तौर पर अष्ठमी के दिन माता के दर्शन और पूजन को आते हैं. यहां पर छटे नवरात्र की रात्रि को माता कई लोगो की पीड़ा दूर करती है. मोईकलां कस्बे से 3 किमी दूर वन क्षेत्र की तलहटी में स्थित माता के मंदिर के आसपास भले ही पक्की धर्मशाला, पार्क, रसोई घर, गार्डन, स्नान घर आदि का निर्माण हो चुका हो परन्तु माता के मुख्य मंदिर का ऊपरी हिस्सा अभी भी कवेलू पोस ही है. कुछ वर्ष पूर्व एक बार माता के मंदिर के उपरी भाग पर पक्का निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया था. तब ऐसा कुछ घटित हुआ कि निर्माण कार्य पूर्ण नहीं कराया जा सका. तब से आज तक माता के मंदिर का उपरी हिस्सा कवेलू पोस ही है.
सदियों से यहा पर ऐसी मान्यता है कि अष्ठमी के दिन माता के ज्वारा तोड़ने के बाद कोई भी श्रद्वालु घर जाते समय पीछे मुड़कर नहीं देखता और ना ही आज तक कोई श्रद्वालु अष्ठमी की रात्रि को माता के मंदिर पर रात को रुका है. यहा मान्यता है कि सच्चे मन से माता के समाने शीश झुकाने वाले की हर मुराद पूरी होती है. अष्ठमी के दिन यहा पर हजारों श्रद्वालु माता के दर्शन और पूजन को आते हैं. यहां पर शारदीय नवरात्र के दिनों में माता को किसी पकवान का नहीं बल्कि गेहूं के आटे से बने मीठे पुए का भोग लगाया जाता है. भक्तों और श्रद्वालुओं के सहयोग से अभी भी माता के मंदिर के बाहर काफी समस से धर्मशाला का निर्माण कार्य चल रहा है.
भर देती है माता सूनी गोद
माता के द्वार आने वाली कई महिलाओं की वर्षों से सूनी गोद भर चुकी है. बताया जाता है कि नवरात्र के दौरान अष्ठमी के दिन माता का वरदान स्वरूप दिया नारीयल बिन औलाद महिलाओं के लिए वरदान साबित होता है. कई महिलाओं की सूनी गोद माता के आशीर्वाद से भर चुकी है. बताया जाता है कि माता के द्वार शीश झुकानें वाले को कभी निराशा हाथ नहीं लगी.
माता की पुजाई है पीठ
भोजपुरा स्थित चामुण्डा माता मंदिर के बारे में पुराने लोग बताते हैं कि यहा पर माता की पीठ पुजाई है. अमावस्या के मौके पर माता के मंदिर पर बताया गया कि छठे नवरात्र के मौके पर माता का श्रृंगार बदला जाता है. जिसके बाद अष्ठमी के दिन माता का विशेष श्रंगार किया जाता है. और ज्वारा तोडऩे के साथ ही नौ दिवसीय मेले का समापन मान लिया जाता है.
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