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कोटपूतली कस्बा हुआ नगरपालिका की लापरवाही का शिकार, कई इलाके जलमग्न

कोटपूतली नगरपालिका बहुत पुरानी नगरपालिकाओं में शामिल है लेकिन पिछले पांच साल में इस नगरपालिका की जो दुर्दशा हुई है वो इससे पहले कभी नहीं हुई

कोटपूतली कस्बा हुआ नगरपालिका की लापरवाही का शिकार, कई इलाके जलमग्न
बारिश बंद होने के बावजूद शहर की सड़कें अभी भी पानी लबालब हैं.

अमित यादव/कोटपूतली: प्रदेश के कोटपूतली में नगरपालिका की लापरवाई लोगो पर भारी पड़ती नजर आ रही है. आम आदमी का जन जीवन काफी प्रभावित हो रहा है. कोटपूतली वासियो का जीना दूभर हो रहा है. शहर में ड्रेनेज सिस्टम, सफाई और अतिक्रमण की भारी अव्यवस्थाएं हैं. बारिश के बाद पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण घरों-दुकानों में पानी भर जाता है. रास्तों में गहरे गड्ढे हो गए हैं. मुख्य रास्ता अतिक्रमण की वजह से काफी छोटे हो गए हैं. नगरपालिका का ये हाल है कि वो खुद बेहाल नजर आती है. यहां चेयरमैन और अधिशाषी अधिकारी दोनों ही कार्यवाहक हैं. लोगों का आरोप है कि कार्यालय समय मे कर्मचारी सीट पर नहीं मिलते. नगरपालिका कार्यालय के अंदर ही अव्यवस्थाओं का आलम है. हर कर्मचारी के रूम के बाहर पान व जर्दे की पीक से भरे कोने दिख जाएंगे. आलम ये है एसडीएम को दिशा निर्देश जारी करने पड़े हैं.

कोटपूतली नगरपालिका बहुत पुरानी नगरपालिकाओं में शामिल है लेकिन पिछले पांच साल में इस नगरपालिका की जो दुर्दशा हुई है वो इससे पहले कभी नहीं हुई. खामयाजा यहां के निवासियों को  भुगतना पड़ रहा है. चाहे सफाई व्यवस्था हो अतिक्रमण हो या सड़को की हालत हो, आम आदमी को इन्ही तीन मूलभूत सुविधाओं से मतलब होता है. लेकिन यही नगरपालिका से नही मिल पा रही है. राजनीतिक कारणों के चलते शहर की मुख्य सड़कों पर भारी अतिक्रमण हो रहा है वो भी कई सालों से लेकिन कहने सुनने वाला कोई नहीं है.

ऐसा नहीं है मानसून आने पर इस शहर की हालत ज्यादा खराब हुई है. यह सिलसिला तो लम्बे समय से ही चला आ रहा है. बारिश ने तो इनकी रही सही पोल खोल के रख दी है. पिछले दिनों लगातार हुई बारिश में तो हालात बिगड़े ही, अब दो दिनो से बारिश बंद होने के बावजूद शहर की सड़कें अभी भी लबालब है. चाहे बानसूर रोड़, हो या डाबला रोड़ नागाजी की गौर, इटलीवाली ढाणी, दुर्गामाता मन्दिर, पुतली सड़क रोड़, पंचायत समिति के सामने वाली सड़क मार्ग हो हर गली मोहल्लों के हालात अभी भी खराब है.

इन समस्या को लेकर जब जी मीडिया की टीम नगरपालिका कार्यालय पहुची तो वहां हालात और भी बुरे थे. कर्मचारी सीटों पर नहीं थे और कार्यालय में चारों तरफ गंदगी का आलम था. हर सीढ़ीयो, हर कोने में पान जर्दे की पीक थी. जबकि यह कुछ महीने पुरानी ही बिल्डिंग है. इतना ही नहीं आगे खुले कमरों में भारी गन्दगी शराब की बोतले नजर आई. जब कार्यालय के हालत ऐसे है तो शहर की स्थिति कैसी होगी. कार्यालय में केवल हमे नव पदस्थापित चेयरमैन दीपा सैनी मिली जिनसे जानकारी चाही तो कहा की उन्होंने तो अभी 15 दिनों पहले ही पद मिला है.

ऐसा नहीं है कि इन सब समस्याओं की जानकारी प्रसाशनिक अधिकारियों को नहीं है. उपखण्ड अधिकारी नानू राम सैनी ने नगरपालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक लेकर कई बार दिशा निर्देश दिये है. यहां तक हर सम्भव सहायता लेने एक्स्ट्रा पुलिस का जाप्ता लेने की लिये भी कह रखा है लेकिन सम्बंधित अधिकारी कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं. कार्यवाहक नगरपालिका ईओ भी पद पर कुछ दिन पहले ही आने की बात कह कर जिम्मेदारी से बचते नजर आए. इतनी पुरानी नगरपालिका होने के बाद भी बुरे हालातों का संज्ञान लेने के लिए कोई तैयार नहीं है. इस और सरकार और जनप्रतिनधियों को कारगर कदम उठाने की आवश्यकता है.