नागौर: दार्शनिक स्थल से कम नहीं लाडनूं का श्मशान घाट, बना आकर्षण का केंद्र

श्मशान का नाम सुनते ही मन में डर सा बैठ जाता है. कोई उस तरफ जाने की कभी सोचता भी नहीं है, लेकिन नागौर जिले के लाडनूं शहर का श्मशान घाट किसी खूबसूरत पार्क से कम नहीं है. 

नागौर: दार्शनिक स्थल से कम नहीं लाडनूं का श्मशान घाट, बना आकर्षण का केंद्र
दार्शनिक स्थल से कम नहीं लाडनूं का श्मशान घाट

हनुमान तंवर, लाडनूं: श्मशान का नाम सुनते ही मन में डर सा बैठ जाता है. कोई उस तरफ जाने की कभी सोचता भी नहीं है, लेकिन नागौर जिले के लाडनूं शहर का श्मशान घाट किसी खूबसूरत पार्क से कम नहीं है. खानपुर गांव के समाजसेवी रघुवीरसिंह ने श्मशान की तस्वीर बदल दी है. रोज साफ सफाई व महेनत कर के यहां का रंग रूप बदल दिया है.

यहां के लोगों ने अपनी मेहनत से इस श्मशान घाट को एक दार्शनिक स्थल का रूप दे दिया है. परिसर में चारों तरफ लगे सुंदर पेड़-पौधे और फूल लगे हैं. इसके अलावा यहां सुबह-शाम बुजुर्ग और महिलाएं घूमने भी आते हैं.

ये भी पढ़ें: राजीव गांधी के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में PCC कार्यालय पहुंचे पायलट, दिया बड़ा बयान 

दार्शनिक स्थल से कम नहीं लाडनूं का श्मशान घाट
करीब सात एकड़ में फैले लाडनूं के श्मशान घाट का बड़ा हिस्सा पार्क के रूप में विकसित कर दिया गया है. जबकि पीछे की तरफ एक हिस्सा सभी समाज के श्मशान घाट के लिए बनाया गया है. यहीं पर अंतिम संस्कार किया जाता है. कृत्रिम पहाड़ और चिड़िया घर करते हैं आकर्षित यहां पार्क में ही छोटा सा चिड़िया घर भी बनाया गया है. इसमें खरगोश, बतख और रंग-बिरंगी कई चिड़ियां भी मौजूद हैं. यहां आने वाले बच्चों को ये काफी आकर्षित करते हैं. 

श्मशान घाट की मुख्य सड़क से लगे हिस्से पर कृत्रिम पहाड़ बनाकर झरने बनाए गए हैं और इसे आकर्षक कलाकृतियों से सजाया भी गया है. खास बात यह है कि शहर और आसपास के गांवों के युवाओं के बीच यह जगह सेल्फी पॉइंट बनती जा रही है. सुनने में कुछ अटपटा जरूर लगेगा लेकिन लाडनूं आने वाला हर व्यक्ति यहां का श्मशान घाट देखने जरूर आता है हर वर्ग का अंतिम संस्कार आमतौर पर छोटे कस्बों और शहरों में अलग-अलग वर्ग के श्मशान घाट भी अलग-अलग जगह होते हैं, लेकिन लाडनूं में अब एक बड़े मैदान में भिन्न-भिन्न समाज के लोगों के अंतिम संस्कार के लिए पक्की जगह तैयार की गई है. 

इस मैदान के बीचों-बीच भगवान शंकर की प्रतिमा स्थापित की गई है. जहां रोज आरती होती है. श्मशान घाट का मुख्य द्वार भी आकर्षक बनाया गया है. राजकुमार टांक का कहना है कि आज से करीब चार साल पहले यह जगह बिल्कुल बदहाल थी. खानपुरा से लाडनूं आकर ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले रघुसिंह राठौड़ ने सबसे पहले यहां सफाई का काम शुरू किया. धीरे-धीरे शहर के दूसरे सेवाभावी लोग भी जुड़ते गए और नियमित श्रमदान होने लगे. इसके बाद यहां पौधे लगाने के साथ लोगों ने अपने खर्च पर यहां निर्माण कार्य भी करवाए. लोगों के परिश्रम का नतीजा है कि श्मशान घाट होते हुए भी यह शहर के बीच खूबसूरत स्थल के रूप में उभरा है.

ये भी पढ़ें: राजस्थान के इस जिले में सड़क पर बह गईं मुर्गियां, बचाने के लिए पुलिस को आना पड़ा