राजस्थान में पोटाश के मिले बड़े भंडार, करीब 2500 मिलियन टन पोटाश होने की संभावना

देश में अब तक शतप्रतिशत पोटाश का आयात किया जाता था. लेकिन अब राजस्थान के नागौर और बीकानेर जिले में इसके भंडार मिले हैं. बीकानेर से नागौर रोड पर 8 पॉइंट चिह्नित किए गए है. 

राजस्थान में पोटाश के मिले बड़े भंडार, करीब 2500 मिलियन टन पोटाश होने की संभावना
राजस्थान में पोटाश के भारी भंडार मिले

मनोहर विश्नोई,जयपुर: राजस्थान में क्रूड ऑयल के बाद अब राजस्थान में पोटाश के भारी भंडार मिले हैं. देश में अब तक शतप्रतिशत पोटाश का आयात किया जाता था. लेकिन अब राजस्थान के नागौर और बीकानेर जिले में इसके भंडार मिले हैं. बीकानेर से नागौर रोड पर 8 पॉइंट चिह्नित किए गए है. पिछले कई सालों से GSI और उसकी सहयोगी कंपनी एमईएसएल खोज कर रही थी. पोटाश के बड़े भंडार करीब 200 से 300 मीटर गहराई में मिले है, दोनों जिलों में करीब 2500 मिलियन टन पोटाश के भंडार होने की बात सामने आई है. प्रदेश में पोटाश की सोल्यूशन माइनिंग की जाएगी. इस तरह की माइनिंग जर्मनी और कनाड़ा में होती है. इसके तहत करीब 500 मीटर जमीन के अंदर पोटाश को बोरवेल कर पानी और सोल्यूशन के जरिए घुलनशील बनाया जाएगा और उसके बाद निकाला जाएगा.
इस बारे में प्रदेश के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली के बीकानेर हाउस में नए खान विभाग के सचिव गौरव गोयल के साथ अहम बैठक की. केंद्र सरकार के इससे जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक में निजी कम्पनी को भी शामिल करने का फैसला किया गया.राजस्थान के मुख्य सचिव डी.बी.गुप्ता ने बताया कि देश वर्ष 2013-14 से 2018-19 तक प्रति वर्ष 3 से 5 मिलियन टन पोटाश का आयात कर रहा है और पोटाश की मांग 6-7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है, जिससे आयात बिल में वृद्धि होगी. पोटाश का स्वदेशी मुद्रा पर भारी व्यय के अलावा केंद्र सरकार सब्सिडी पर 10,000-15,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से सब्सिडी पर एक बड़ा भाग खर्च करती है. इस मुद्दे को हल करने और पोटाश की स्वदेशी सॉल्यूशन माइनिंग तकनीक उत्पन्न करने की दृष्टि से राजस्थान सरकार ने देश की पोटाश आवश्यकताओं के संबंध में एक आत्मनिर्भरता के स्तर तक पहुंचने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है.
भूगर्भीय अध्ययन के मुताबिक, राजस्थान के नागौर-गंगानगर बेसिन में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर जिलों के कुछ हिस्सों में लगभग 2400 मिलियन टन पोटाश के भंडार हैं. डी.बी. गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा की जा रही जांच के आधार पर राजस्थान सरकार ने विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में पोटाश भंडार का दोहन करने के लिए एक राज्य स्तरीय उच्चाधिकार समिति का गठन किया है. राजस्थान सरकार ने एमईसीएल को विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट के लिए एक कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया है. मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार ने समयबद्ध कार्य योजना के लिए निर्णय लिया है जो आरएसएमएमएल, एमईसीएल और डीएमजीआर के बीच प्रस्तावित एमओयू के 6 महीने के भीतर पूरा हो जाएगा.उन्होंने आगे बताया कि सचिव खान और पेट्रोलियम के मार्गदर्शन में एक राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना करने जा रहा है.
100% विदेश से आता है पोटाश
राजस्थान में पोटाश खनन के बाद देश को विदेश से आयात कम करना पड़ेगा. फिलहाल देश में पोटाश का शतप्रतिशत विदेश से आयात होता है. एमओयू साइन होने के बाद जल्द ही राजस्थान देश का एक मात्र पोटाश उत्पादक राज्य बनने वाला है. पोटाश खाद के रूप में किसानों के काम आता है. देश में पहली बार इसका खनन होने जा रहा है. इसके खनन को लेकर केंद्र सरकार, जीएसआई और निजी कंपनियों के साथ बातचीत हुई है. जल्द ही इसके लिए तीन एमओयू किए जाएंगे और खनन प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
1974 से पोटाश की खोज कर रहा था जीएसआई
राजस्थान में पोटाश की खोज लंबे समय से की जा रही थी. गंगानगर में जीएसआई ने 1974 में खोज शुरू की थी. अब तक प्रदेश में पोटाश की तलाश में करीब 70 बोरवेल कर खोदे जा चुके हैं. हनुमानगढ़ और बीकानेर के साथ गंगानगर और नागौर में भी पोटाश के भंडार की खोज की गई. फिलहाल बीकानेर और नागौर में पोटाश के भंडारों को चिन्हित कर आगे का काम शुरू किया जा रहा है.