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प्रतापगढ़ के बसेरा गांव में चलता है पंचायत का कानून, स्थानीए पुलिस भी बेबस

प्रतापगढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां कानून का राज नहीं, बल्कि जाति-पंचायती का राज चल रहा है.

प्रतापगढ़ के बसेरा गांव में चलता है पंचायत का कानून, स्थानीए पुलिस भी बेबस
पंचायत के तुगलकी फरमान खिलाफ स्थानीए पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं.

प्रवेश परदेसी/प्रतापगढ़: हमारा देश संविधान से चलेगा, कानून से चलेगा या जाति-पंचायती से? आज के दौर में भी यह सवाल पूछना पड़े तो इससे ज्यादा शर्मिंदगी भरी बात भला क्या होगी. राजस्थान के प्रतापगढ़ से एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने समूचे कानून के सामने एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है. जहां कानून से नहीं, बल्कि पंचायत से आरोप तय होते हैं और उसी से सजा भी दी जाती है.

प्रतापगढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां कानून का राज नहीं, बल्कि जाति-पंचायती का राज चल रहा है. मामला जिले के हथुनिया थाना क्षेत्र के बसेरा गांव का है. यहां के एक 62 वर्षीय बुज़ुर्ग गोपाल लाल कुमावत को समाज से बेदखल कर दिया गया है. अब गोपाल कुमावत के घर कोई नहीं जाता. अगर कोई चला जाए तो उसे भारी-भरकम जुर्माना देना पड़ सकता है और हो सकता है कि उसे भी समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. गोपाल कुमावत भी किसी के घर नहीं जा सकता.

दरअसल गांव में गोपाल कुमावत की पौने 6 बीघा की एक जमीन है. इस जमीन पर उसके चार भतीजों ने कब्ज़ा किया हुआ है. उसके भाई-भतीजों मिल कर इस जमीन को अब अपने नाम करवाना चाहते हैं. इस काम को अंजाम देने के लिए उन्होंने जाति-पंचायती का सहारा लिया. समाज के एक संगठन सूर्यवंशी क्षत्रिय कुमावत संगठन को अपने साथ लिया. समाज के संगठन और गोपाल कुमावत के भाई-भतीजों के बीच हुई डील के बाद समाज की एक बैठक बुलाई गई. इसे लेकर गांव में 6 बार समाज की पंचायत बुलाई गई.

खबर के मुताबिक गोपाल कुमावत ने शातिर तरीके से इसकी विडियो बना ली और यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया. यहां सूर्यवंशी क्षत्रिय कुमावत संगठन के सचिव बसंती लाल कुमावत ने समाज के सामने गोपाल कुमावत को धमकाया और कहा कि उसे पन्द्रह दिन के अंदर-अंदर अपनी जमीन भतीजों के नाम करनी होगी. अगर वह पन्द्रह दिन में जमीन उनके नाम करता है तो रजिस्ट्री का खर्चा भतीजे दे देंगे. अगर जमीन नाम नहीं करता है, तो रजिस्ट्री का खर्च भी गोपाल को को देना होगा. 

इसी के साथ उसे उज्जैन की एक धर्मशाला में एक लाख रूपए और इक्कीस हजार रूपए बसेरा गांव की धर्मशाला में देने होंगे. यही नहीं, फिर कभी कोई उसके घर नहीं जाएगा. अगर चला गया तो उसे भी समाज से बाहर कर दिया जाएगा. वैसे तो जमीन गोपाल की है, जमीन पर नाम भी गोपाल का है, लेकिन भाइयों की एक पाई भी उसमें नहीं, और फिर भी जाति-पंचायती उस पर जबरदस्ती जमीन भाइयों को देने का दबाव बना रही है. पंचायत अब तक गोपाल कुमावत से 73 हजार रूपए पहले ही ले चुकी है.

जब यह समाज का तुगलकी फरमान सुनाया जा रहा था, तब किसी ने इसकी विडियो बना लिया. जिसमें समाज के पदाधिकारी ऊपर लिखी बातें बोलते हुए दिखाई दिए. इसके बाद समाज ने गोपाल को बेदखल कर दिया. गोपाल हथुनिया थाने में गया तो पुलिस ने भी ध्यान नहीं दिया और जाति-पंचायती का फैसला बता कर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया. पीड़ित एसपी के पास गया तो उन्होंने भी बस कार्रवाई का भरोसा देकर संतुष्ट करने की कोशिश की. अब पीड़ित ने आईजी और मानवाधिकार आयोग में भी पत्र लिखा है. पीड़ित की गुहार है कि देश में कानून का शासन होने के बावजूद भी जो लोग जाति-पंचायती कर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं उन पर कार्रवाई हो. ताकि फिर कभी किसी के साथ अन्याय न हो.