लॉकडाउन ने बच्चों को परिवार से जोड़ा, ड्राइंग में हुए परफेक्ट, हैल्थ के लिया सीखा योग

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रदेश में 22 मार्च से लॉकडाउन जारी है. 

लॉकडाउन ने बच्चों को परिवार से जोड़ा, ड्राइंग में हुए परफेक्ट, हैल्थ के लिया सीखा योग
बच्चों ने ड्राइंग बनाकर मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग आदि की सीख दी है.

पुरुषोत्तम जोशी, टोंक: कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए प्रदेश में 22 मार्च से लॉकडाउन जारी है. इस दरमियान स्कूल बंद होने सें बच्चें, घर के बड़े बुुजर्ग सहित संपूर्ण परिवार घरों में कैद रहा. भागदौड़ भरी जिदंगी में लोग जहां दिनभर व्यस्त रहते थे. ऐसे में कई लोग अपने परिवार, बच्चों को समय नहीं दे पाते थे. उन्हीं लोगों ने बच्चों के बीच टाइम बिताया है. बच्चों ने लॉकडाउन में योग, मेडिटेशन, चौपड़ पासा खेल खेलना, ड्रांइग, कुकिंग, कबाड़ के सामान से पक्षियों के लिए पक्षी घर, सकोरे रखना, गौसेवा, सूर्य के दर्शन आदि को दिनचर्या को शामिल किया है. 

टोंक जिले के पीपलू कस्बे में परिवार ने बच्चों से साथ क्वालिटी टाइम बिताया. कस्बे की गृहणी नीलम दाधीच, मनीला, दिव्या, रेखा राजावत ने बताया कि लॉकडाउन में बच्चों के साथ पहली बार क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मजबूत करने का समय मिला है. बच्चों को इनके दादाजी ने खेल-खेल में कई गतिविधियों से जोड़कर पारंपरिक खेलों, धर्म, योग, संस्कार की शिक्षा दी है. बच्चों के दिनभर घर पर रहने से घर तितर-बितर पड़ा रहता था, लेकिन बच्चों के घर पर रहने से कोई शिकायत नहीं है. 

कस्बे के चिरंजीलाल दाधीच, जगदीशसिंह राजावत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान रामायण, महाभारत सीरियल के दौरान परिवार के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर इन्हें देखा है. इन धारावाहिकों के प्रसारण से बच्चों (पोते-पोतियों) की जानकारी अपड़ेट होने तथा संस्कार में बदलाव आया है. कलाकारों की देखादेखी बच्चों ने माताश्री, पिताश्री, दादाजी जैसे शब्दों को बोलचाल में लाया है.

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लॉकडाउन में बच्चों ने यह किया
कस्बे की चंचल दाधीच ने बताया कि लॉकडाउन में कोराना जागरूकता को लेकर चित्र बनाते हुए पापा के सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया. पृथ्वी दिवस, पुस्तक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस आदि पर चित्र बनाने सहित निबंध लिखा. वह रोजाना एक चित्र अवश्य बनाती हैं. वीडियो के माध्यम से सबको कोरोना वायरस से बचने के लिए जागरूक करने का प्रयास भी किया है. उसने इंडोर गेम को लेकर कपड़े पर गोटा से चंगापो बनाया. मैंने कई तरह के व्यंजन बनाने सीखें है. 

पहली बार दादाजी ने इतना समय दिया
कस्बे के रावला गली में रहने वाले विजयराज, अधिराज, अदिष्ट, अभिमन्यू, अभिराज, रूद्रभान, श्याम आदि ने बताया कि पहली बार उनके दादाजी जगदीशसिंह राजावत (डीडराईटर एवं भाजपा पूर्व मंडल अध्यक्ष) ने उनके साथ काफी समय बिताया है. लॉकडाउन के दौरान उन्होंने चौपड़ पासा, योग, मेडिटेशन आदि सिखाया है. साथ ही प्रतिदिन समय पर स्नान करके पूजा अर्चना करने, पाठ करने आदि की भी आदत में आया है. हमने मोबाइल में कई गेम खेले हैं लेकिन चौपड़ पासा खेल के बारे में कभी नहीं सुना था. लेकिन दादाजी से यह खेल सीखकर खेलने के बाद मोबाइल गेम में रुचि कम हो गई है. बच्चों ने ड्राइंग बनाकर मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग आदि की सीख दी है.