लोकसभा चुनाव 2019: उदयपुर में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला, किसे चुनेगी जनता?

साल 1951 से लेकर 2014 तक के इतिहास में हुए कुल 16 चुनावो में इस क्षेत्र से 10 बार काग्रेंस, 4 बार बीजेपी और दो बार अन्य दलों के प्रत्याशी द्वारा जीत हासिल की गई है.

लोकसभा चुनाव 2019: उदयपुर में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला, किसे चुनेगी जनता?
उदयपुर से बीजेपी के अर्जुन लाल मीणा सांसद हैं.

उदयपुर: देशभर में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर 2019 की शुरुआत से ही सभी सियासी दल चुनावी मोड में आ गए हैं. और राजस्थान की बात करें तो हाल ही में यहां विधानसभा चुनाव खत्म हुए हैं और इस वजह से राज्य में चुनावी सरगर्मी लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगी. एक तरफ राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद पार्टी के हौसले बुलंद हैं तो वहीं मामुली मत प्रतिशत से पिछड़ने के कारण बीजेपी भी बाजी पलटने की फिराक में है. 

दिसंबर 2018 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में 200 सीटों में से 99 सीटों के साथ कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की. वहीं बीजेपी 73 सीटों के साथ विपक्ष में है. वैसे तो सूबे में इस तरह का ट्रेंड रहा है कि जिस पार्टी की सरकार विधानसभा में बनती है, लोकसभा में भी उसी दल का दबदबा रहता है. यही कारण है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीती बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 25 सीटों पर कब्जा जमा लिया लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अलवर और अजमेर सीट पर वापसी कर ली.

इसी बीच राजस्थान की उदयपुर लोकसभा सीट की बात करें तो आपको बता दें, यहां से बीजेपी के अर्जुन लाल मीणा सांसद हैं. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के रघुवीर मीणा को 2,36,762 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस दूसरे स्थान और तीसरे स्थान पर कम्यूनिस्ट पार्टी रही थी. 

साल 1951 से लेकर 2014 तक के इतिहास में हुए कुल 16 चुनावो में इस क्षेत्र से 10 बार काग्रेंस, 4 बार बीजेपी और दो बार अन्य दलों के प्रत्याशी द्वारा जीत हासिल की गई है. हालांकि, तब से लेकर अब तक कई बार परिसीमन भी हुए और उदयपुर संसदीय सीट 2004 के बाद सामान्य से अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई. 

उदयपुर लोकसभा सीट इस कारण से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सीट से प्रदेश के कई बड़े नेता जीते हैं. प्रदेश के सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहने वाले मोहनलाल सुखाड़िया भी यहीं से जीते थे. वहीं कांग्रेस की कद्दावर नेता डॉ. गिरिजा व्यास और बीजेपी के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया भी इस क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 

उदयपुर की कुल जनसंख्या 29,52,477 है. जिसमें से 81 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में और 18 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं. उदयपुर सीट का फैसला जातिगण समीकरणों के आधार पर ही होता आया है. पिछले कई चुनावों से राजस्थान में राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में और जाट, गूजर, मीणा और दलित कांग्रेस के पक्ष में मतदान करते रहे हैं. जबकि आदिवासी और पिछड़ी जातियों के वोट अलग अलग क्षेत्रों में स्थानीय समीकरणों के मुताबिक दोनों दलों में बंटते रहे हैं. मुसलमानों में भी ज्यादा तादाद कांग्रेस को वोट करती रही है, लेकिन एक हिस्सा स्थानीय बीजेपी नेताओं के लिए भी वोट करता रहा है.