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राजस्थान: खाद्य सुरक्षा योजना का उड़ रहा मजाक, धन्नासेठ को मिल रहा लाभ

गरीब इस योजना में नाम जुड़वाने के लिए दफ्तर में बाबुओं के आगे हाथ जोड़ रहे हैं. उधर अमीर और धन्नासेठ गरीबी का चोला ओढ़कर गुरबत में जी रहे लोगों का निवाला डकारने में लगे हैं. 

राजस्थान: खाद्य सुरक्षा योजना का उड़ रहा मजाक, धन्नासेठ को मिल रहा लाभ
उदयपुर में 3800 लोगों को इस सूची से आउट किया गया है. (फाइल फोटो)

जयपुर: राजस्थान(Rajasthan) में खाद्य सुरक्षा योजना(Food Security Scheme) का माखौल उड़ रहा है. गरीब इस योजना में नाम जुड़वाने के लिए दफ्तर में बाबुओं के आगे हाथ जोड़ रहे हैं. उधर अमीर और धन्नासेठ गरीबी का चोला ओढ़कर गुरबत में जी रहे लोगों का निवाला डकारने में लगे हैं. गरीबी और गुरबत में जी रहे लोगों की भूख सरकारी कारिंदों के चश्मे को काला कर देती है. तभी तो गरीबों का निवाला अमीरों के किचन तक पहुंच जाता है और गरीब बेचारा राशन के लिए तरस जाता है. राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना की हकीकत यही हैं. 

कहते हैं जब बात अपने फायदे की हो तो गरीब होना मजबूरी नहीं शान बन जाती हैं. एक से एक आलीशान बंगले, महंगी गडियां, मोटी तनख्वाह है. कोई बिल्डर तो कोई पेट्रोल पंप का मालिक. चौंकिए मत, ये बेचारे अब गरीब बन गए हैं. क्योंकि इनके नाम से राशन उठ रहा हैं. गरीब तो अभी बेचारा खाद्य सुरक्षा में नाम जुड़वाने के लिए ही धक्के खा रहा हैं. अमीरों की मौज हो रही हैं. चिर निंद्रा में सोए विभाग के अधिकारियों की जब नींद खुली गरीबी का नाकाब ओढ़े अमीरों की तस्वीर दुनिया के सामने आ गई. केवल उदयपुर में 3800 लोगों को इस सूची से आउट किया गया है.

महज एक रूपए किलो की दर से गेहूं उठाने वाले ये करदाता कागजों में हेराफेरी कर खुद गरीब बन गए हैं. खाद्य सुरक्षा की आड़ में संचालित इस गोरखधंधे के लिए नगर निगम और रसद विभाग दोनों जिम्मेदार हैं. लापरवाही की वजह से बीते छह साल से गरीबों का गेहूं अमीरों में बंट रहा है.  

फिलहाल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना की पात्र सूची में करीब 4.83 करोड व्यक्ति शामिल हैं. जो की निर्धारित संख्या 4.46 करोड से अधिक है. रेंडम सर्वे में जांच के बाद अब सरकार ने फैसला लिया है कि इस सूची में अपात्र और अमीरों का नाम हटाकर गरीबों का नाम जोड़ा जाएगा. खाद्य सुरक्षा योजना में उन लोगों को शामिल नहीं किया जाता हैं, जो आयकर दाता हो या परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में हों, लेकिन यहां तो हजारों परिवार ऐसे हैं. जिनकी आमदनी लाखों में हैं, उसके बावजूद गरीबों का निवाला डकार रहे हैं.

Edited By- Sujit Kumar Niranjan, News Desk