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जयपुर: फर्जी फॉर्म C भरकर लगा दी 18 करोड़ की चपत, SDRI ने मामले की खोली परत

इस कम्पनी ने राज्य के बाहर 14 प्रतिशत की कर दर का माल बिक्री किया था.

जयपुर: फर्जी फॉर्म C भरकर लगा दी 18 करोड़ की चपत, SDRI ने मामले की खोली परत
अधिकारियों ने अनुसंधान पूरा कर लिया है.

जयपुर: स्टेट डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की टीम ने 18 करोड़ रुपए की कर चोरी उजागर की है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, जयपुर की इलैक्ट्रिकलस उत्पाद निर्माण करने वाली एक नामी कम्पनी ने फर्जी सी फार्म विभाग में पेश कर कर राहत ली. कम्पनी ने कर्नाटक एवं मध्यप्रदेश स्थित वाणिज्यिक कर विभाग के सी फॉर्म में हेरफेर कर यह चुना लगाया.

बताया जा रहा है कि 31 मार्च के बाद मामले का खुलासा होता तो प्रदेश सरकार को यह राजस्व नहीं मिल पाता. इस कम्पनी ने राज्य के बाहर 14 प्रतिशत की कर दर का माल बिक्री किया था. जिसमें केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम के तहत माल का खरीदार यदि सी फार्म प्रस्तुत कर देता है तो उस पर नियमानुसार 14 प्रतिशत के स्थान पर 2 प्रतिशत की दर से ही कर चुकाना होता है. 

कर्नाटक व मध्यप्रदेश में बेचे थे उत्पाद
इस प्रकरण में जयपुर स्थित कम्पनी द्वारा कथित रूप से वर्ष 2013-14 में राज्य के बाहर कर्नाटक व मध्यप्रदेश में इलैक्ट्रिकलस आइटम की बिक्री की गई थी. इसकी ऐवज में कर्नाटक एवं मघ्यप्रदेश स्थित कम्पनियों द्वारा रूपये राशि 18 करोड़ के सी फार्म जारी किये गये थे. जिनको जयपुर स्थित कम्पनी द्वारा सीएसटी दर में छूट प्राप्त करने के उद्देशय से वाणिज्यिक कर विभाग में प्रस्तुत किये गये थे. विभाग को इन प्रस्तुत सी फार्म के सम्बंध में गोपनीय सूचना प्राप्त हुई कि इन प्रस्तुत सी फार्म में कांट-छांट कर गलत रूप से प्रस्तुत किया गया है. वहीं, इस प्रकरण 31 मार्च 2019 तक कार्यवाही नहीं की गई तो प्रकरण समाप्त हो जायेगा. निदेशालय के अधिकारियों ने जानकारी होने के बाद कंपनी के व्यवसाय स्थल की जांच की है. इसके अलावा आवश्यक दस्तावेज भी जुटाए गए हैं. 

पीडीएफ रीडर की मदद से की गई हेरफेर
जयपुर स्थित कम्पनी द्वारा जो सी फार्म प्राप्त किये गये है उनमें पीडीएफ रीडर की मदद से स्कैन कर अंको में एवं राशि में फेर बदल कर दिया गया. निदेशालय ने इस प्रकरण में अपना अनुसंधान पूरा कर लगभग 18 करोड़ की राशि के सी फार्म को अपनी जांच में फर्जी साबित किया है. 

होगी 14 प्रतिशत की दर से कर व ब्याज वसूली
एसडीआरआई ने इस प्रकरण में केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम के तहत कार्यवाही प्रस्तावित कर प्रकरण वाणिज्यिक कर विभाग को भिजवा दिया है. अगर यह मामला  15 दिन बाद विभाग उजागर करता तो क्षेत्राधिकारिता समाप्त हो जाती तथा इस कर चोरी का उजागर किया जाना सम्भव नही हो पाता. एसडीआरआई के अधिकारियों ने भी इस प्रकरण में रिकार्ड समय में अनुसंधान पूर्ण किया. वाणिज्यिक कर विभाग इस प्रकरण में 2 प्रतिशत के स्थान पर 14 प्रतिशत की दर से कर एवं इस पर ब्याज राशि वसूल करने की तैयारी में है.