क्यों नहीं हुआ Rajasthan Congress Executive टीम का ऐलान, सामने आई सबसे बड़ी वजह!

 बड़ी वजह राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल के लिए बनाए गए नए समीकरण हैं, जिनके मुताबिक पीसीसी में जगह पाने वाले नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में जगह नहीं मिल पाएगी. 

क्यों नहीं हुआ Rajasthan Congress Executive टीम का ऐलान, सामने आई सबसे बड़ी वजह!
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में प्रदेश कांग्रेस (Congress) की नई टीम का इंतजार लगातार खिंचता जा रहा है. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन (Ajay Maken) के मुताबिक 31 तारीख तक नई टीम का ऐलान होने वाला था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है.

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इसके पीछे बड़ी वजह राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल के लिए बनाए गए नए समीकरण हैं, जिनके मुताबिक पीसीसी में जगह पाने वाले नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में जगह नहीं मिल पाएगी. इन मापदंडों के सामने आने के बाद पीसीसी की टीम में शामिल होने की भागदौड़ करने वाले नेताओं ने अब अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.

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बीते 6 माह से नई कार्यकारिणी (New executive) को लेकर हो रहा इंतजार भले ही खत्म होने वाला हो लेकिन प्रदेश कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से तैयार की गई सूची में कई बार बदलाव हो चुका है, जिसके चलते कार्यकारिणी गठन में लगातार देरी हो रही है. दरअसल, इसकी एक बड़ी वजह प्रदेश कांग्रेस में बनाए गए वो नए मापदंड हैं, जो प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के लिए गले की फांस बनता जा रहा है. नए मापदंडों के चलते दिग्गज और संगठन के अनुभवी नेताओं ने कार्यकारिणी में शामिल होने से इनकार करते हुए संगठन से दूरी बनाना शुरू कर दिया है. कांग्रस के इन नए मापदंडों को लेकर कांग्रेस गलियारों में चर्चा जोरों पर है.

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क्या कहते हैं कांग्रेस में नए मापदंड 
दरअसल, प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आपसी विचार-विमर्श के बाद एक फॉर्मूला तय किया था और इसे प्रदेश कांग्रेस की संभावित कार्यकारिणी में लागू करने की बात कही थी. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो पार्टी में नए मापदंड तय किए गए हैं कि जिन भी नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी या फिर जिलाध्यक्षों के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी, उन नेताओं को फिर राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट नहीं किया जाएगा. 

बताया जाता है कि इन नए मापदंडों की खबर जैसे ही कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए भागदौड़ कर रहे नेताओं तक पहुंची, उसके तुरंत बाद कार्यकारिणी के लिए भागदौड़ कर रहे नेताओं ने अपने कदम पीछे खींच लिए. कार्यकारिणी के लिए भाग दौड़ करने वाले नेताओं की मानें तो उन्होंने विपक्ष में रहते हुए पार्टी के लिए जी-तोड़ काम इसलिए थोड़ी किया था कि सत्ता आने के बाद भी उन्हें राजनीतिक नियुक्तियों की बजाए संगठन में ही जगह मिलेगी. 

चर्चा है कि जो नेता कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए भागदौड़ कर रहे थे, अब उन्होंने ही आगे होकर प्रदेश प्रभारी अजय माकन, मुख्यमंत्री गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को कार्यकारिणी में शामिल होने से इनकार कर दिया. जिसके बाद अचानक पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को अचानक दिल्ली जाकर प्रदेश प्रभारी अजय माकन और एआईसीसी संगठन सचिव काजी निजामुद्दीन से मुलाकात कर फिर कार्यकारिणी के नामों में चर्चा करनी पड़ी. 

नए चेहरों को नहीं मिल रहा मौका
प्रदेश कांग्रेस में तय किए गए नए मापदंडों को लेकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा बड़ी दुविधा में है. दरअसल, प्रदेश कांग्रेस में राजनीतिक नियुक्तियों से पत्ता कट होने की आशंका के चलते उपाध्यक्ष और महामंत्री पदों पर अनुभवी और दिग्गज नेता आना नहीं चाहते और पार्टी के शीर्ष नेता उपाध्यक्ष और महामंत्री पदों पर नए चेहरों को मौका देना नहीं चाहते. ऐसे में प्रदेश नेतृत्व इस उलझन में है कि करें तो क्या करें. 

क्या होगा नए सिरे से पीसीसी की टीम का गठन 
जानकारों की माने तो कार्यकारिणी में महामंत्री और उपाध्यक्ष पदों पर मुख्यमंत्री खेमे के ज्यादातर नेता लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियों की लालसा में अब ये भी पीछे हट गए हैं. चर्चा है कि मुख्यमंत्री खेमे के नेताओं ने स्वयं सीएम गहलोत के समक्ष संगठन में काम नहीं करने की बात कही है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी में उन नेताओं का नंबर लग सकता है कि जो पिछले काफी अर्से से हाशिए पर चल रहे हैं, जिन्हें पार्टी की मुख्यधारा में शामिल होना है. कुल मिलाकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश प्रभारी अजय माकन के लिए अब नए सिरे से पीसीसी की टीम का गठन करना आसान नहीं होगा.