25 सालों से नहीं हुई जलाशयों की सफाई, जयपुरवासियों को जलदाय विभाग पिला रहा दूषित पानी

सबसे बड़ी बात यह है कि जलदाय विभाग नियमों के तहत हर 6 महीने में इस जलाशयों की सफाई करता है लेकिन फिर भी यह जलाशय साफ क्यों नहीं होते? 

25 सालों से नहीं हुई जलाशयों की सफाई, जयपुरवासियों को जलदाय विभाग पिला रहा दूषित पानी
जयपुर में 10 जगहों पर सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 7 सैंपल फेल हुए.

जयपुर: भारतीय मानक ब्यूरो ने देशभर में पानी की गुणवत्ता के लिए सैंपल लेकर उनकी जांच की थी, जिसमें जयपुर शहर भी शामिल था. बीआईएस की रिपोर्ट में सामने आया था कि जयपुर का पानी दूषित है. 

जयपुर में 10 जगहों पर सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 7 सैंपल फेल हुए लेकिन जलदाय विभाग फिर भी यह दावा करता रहा कि हमारे घरों में पहुंचने वाला पानी बिल्कुल स्वच्छ है. इसके बाद में ज़ी मीडिया ने यह पड़ताल की कि आखिरकार हमारे घर में स्वच्छ पानी आ भी रहा है या नहीं. पड़ताल में बहुत ही चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं. शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर ज़ी मीडिया ने पड़ताल की तो जलदाय विभाग की पोल खुलती हुई दिखाई दी.

दरअसल बीसलपुर बांध से जिन जलाशयों में पानी स्टोर किया जाता है, उन जलाशयों की 25-25 साल से सफाई तक नहीं हुई. ऐसे में मिट्टी और मलबे में लिपटा जहरीला पानी घरों तक पहुंच रहा है. इसलिए बीआईएस की रिपोर्ट बिल्कुल सही है और जलदाय विभाग के दावे पूरी तरह से फेल होते हुए यहां पर दिखाई दे रहे हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि जलदाय विभाग नियमों के तहत हर 6 महीने में इस जलाशयों की सफाई करता है लेकिन फिर भी यह जलाशय साफ क्यों नहीं होते? इसकी भी पड़ताल की गई तो सामने आया कि केवल जलदाय विभाग के इंजीनियर जलाशय की सफाई के लिए केवल तारीख बदलने के सिवाय कुछ काम नहीं करते बल्कि ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते बड़ा मुनाफा कमाते हैं. 

पहली पड़ताल- विश्वकर्मा रोड नंबर-2
विश्वकर्मा रोड नंबर 2 के जलाशय का हाल बहुत बुरा दिखाई दिया. उस जलाशय में मिट्टी का ढेर लगा हुआ था. इसके साथ-साथ बहुत सब कूड़ा कूड़ा 20 जलाशय में साफ तौर पर दिखाई दे रहा था. इसके साथ साथ जंग लगी हुई टंकी भी पानी को और जहरीला बना रही थी. यहां जलदाय विभाग के कर्मचारियों ने पोल खोली कि यहां तो 25 साल में एक बार भी सफाई नहीं हुई. अब आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं, जो टंकी 6 महीने में साफ होनी चाहिए, वह 25 साल में एक बार भी साफ नहीं हुई. यहां सफाई के नाम पर 75 लाख से एक करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. 

दूसरी पड़ताल- विश्वकर्मा, सेक्टर 9
इस जलाशय का हाल तो और भी बुरा था क्योंकि इस जलाशय में तो जानवर और कचरा आसानी से अंदर जा सकता है क्योंकि इस जलाशय में जाने वाला पानी बिल्कुल खुला पड़ा हुआ है. पूरे जलाशय में गंदगी और गंदगी ही दिखाई दे रही थी. 

करोड़ों का चूना लगा रहे सरकार को
जयपुर शहर में छोटे-बड़े 136 जलाशय हैं. नियमों के तहत इन जलाशयों शो की सफाई हर 6 महीने में होनी चाहिए. एक जलाशय की सफाई के लिए 6 से 7 दिन का समय लगता है और इसमें इसकी सफाई में खर्चा करीब एक लाख से तीन लाख के बीच होता है यानी जयपुर में जलाशयों की सफाई के लिए 6 महीने में 4 करोड़ 8 लाख तक का खर्चा सरकार की जेब से लगता है. यदि 1 साल की बात करें तो सरकार की जेब से 8 करोड़ 16 लाख रुपये का खर्चा इन जलाशयों की सफाई के लिए देती है. यदि एक सरकार के कार्यकाल की बात करें तो 5 साल में सरकार जयपुर शहर को 40 करोड़ 80 लाख रुपये केवल इन जलाशयों की सफाई के लिए देती है. ऐसे में हर साल सफाई के नाम पर करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है.

इंजीनियर्स की मिलीभगत से चल रहा खेल
सफाई के लिए एक्सईएन टेंडर निकालते हैं. सफाई के लिए ठेकेदारों को ठेका  दिया जाता है लेकिन ठेकेदार सिर्फ तारीख लिखकर अपना काम पूरा कर देता है. ऐसा खेल इंजीनियर की मिलीभगत के चलते सालों से लगातार जारी है. 

तारीख बदलने का खेल भी बदस्तूर जारी
शहर के अधिकतर जलाशयों की स्थिति कुछ ऐसी ही दिखाई देती है न तो सामने से इन जलाशयों की सफाई हो पाती है और न ही ठेकेदारों पर इंजीनियर नियंत्रण रख पाते हैं बल्कि उनका साथ देकर वे अधिक से अधिक मुनाफा कमाते हैं क्योंकि ठेकेदारों को सिर्फ तारीख बदलनी पड़ती है और हमारे घर में दूषित पानी पहुंचता है हालांकि पीएचईडी विभाग का जिम्मा संभाल रहे मंत्री बीडी कल्ला लगातार यही कोशिश कर रहे हैं कि पूरे जयपुर शहर और प्रदेश को स्वच्छ पानी मिल सके. इसके लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही हैं लेकिन उनके प्रयासों को इंजिनियर्स सेल करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

ऐसे में अब क्या यही माना जाएगा कि बीआईएस की रिपोर्ट बिल्कुल सही है और जलदाय विभाग लगातार झूठ बोलता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि जलाशय की स्थिति तो आपने देख ही ली और इंजीनियर के घोटाले भी इसे उजागर होते हुए दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़े सवाल कि आखिरकार कब तक जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ पीएचईडी विभाग करता रहेगा.