राजस्थान: खतरे में UIDAI की विश्वसनीयता! रडार पर आधार सेंटर फर्जीवाड़े में कई अधिकारी

इस संबंध में ADG पंकज गोयल ने खुद इस बात को स्टिंग में स्वीकारा कि तंवर उनके नाम से तीस से पैंतीस हजार रुपए ले रहा है. इसके बाद शक की कोई गुंजाइश बाकी ही नहीं रही.

राजस्थान: खतरे में UIDAI की विश्वसनीयता! रडार पर आधार सेंटर फर्जीवाड़े में कई अधिकारी
खतरे में UIDAI की विश्वसनीयता! (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मनवीर सिंह/अजमेर: ज़ी राजस्थान के बड़े खुलासे के बाद Unique Identification Authority of India यानी UIDAI एडीजी पंकज गोयल राजस्थान एसीबी की गिरफ्त में है. लेकिन इस महाभ्रष्ट अधिकारी के दलाल और गुर्गे आज भी राजस्थान में खुले घूम रहे हैं. पंकज गोयल के बाद सबसे ज्यादा है तंवर कम्प्लीट सिस्टम नाम की कंपनी का संचालक हेमराज तंवर. 

यह वो दलाल है जिसके जिम्मे राजस्थान में आधार क्योस्क के नाम पर लहलहा रही भ्रष्टाचार की फसल को काट कर डीओआईटी (DOIT) और Unique Identification Authority of India के दिल्ली स्थित कार्यालय में बैठे अधिकारियो तक पहुंचाने का काम था. अधिकारियों की शह पर हेमराज खुलेआम दावा करता नजर आया कि कितनी भी शिकायतें कर लो काम तो पैसों से ही होगा.

दलाल हेमराज तंवर को लेकर जो शिकायतें जी राजस्थान के पास आ रही थीं, वो स्टिंग ऑपरेशन में साफ हो गई. इस संबंध में ADG पंकज गोयल ने खुद इस बात को स्टिंग में स्वीकारा कि तंवर उनके नाम से तीस से पैंतीस हजार रुपए ले रहा है. इसके बाद शक की कोई गुंजाइश बाकी ही नहीं रही.

ऐसे करते थे भ्रष्टाचार
दलाल दिल्ली में बैठे अधिकारियों के साथ ही जयपुर डीओआईटी में बैठे अधिकारियों की दलाली खुले आम कर रहा था. वो इतना तक दावा करता था कि रिश्वत की रकम पहुंचाओ तो सालों से अटकी पड़ी फाइलों को तीन दिन में अप्रूव करा दूंगा. तंवर ने दावा किया कि रिश्वत के खेल में जमकर सौदेबाजी होती है. 

पहले अधिकारी कम कीमत पर काम करने को तैयार थे, लेकिन अब उनके ईमान की कीमत बढ़ चुकी है. साफ है जितनी ज्यादा फाइलें होंगी, रिश्वत की रकम भी उतनी ही ज्यादा होगी. इस पूरे मामले में ADG पंकज गोयल ने खुद स्टिंग में अपने गेम प्लान का खुलासा किया तो कई चौंकाने वाली जानकारियां भी सामने आ गयी.

ADG पंकज गोयल ने ये खुलासा कर दिया कि भ्रष्टाचार के इस खेल में डीओआईटी के कई अधिकारी शामिल है. इन शिकायतों में दलाल हेमराज तंवर के साथ अधिकारियों के नाम का भी खुलासा किया गया. लेकिन रिश्वत की ये शिकायत शायद हर बार रिश्वत खाकर दबा दी जाती थी. 

जयपुर के ही एक कियोस्क संचालक बलबीर सैनी ने इस पूरे खेल की शिकायत केंद्र सरकार की एंटीएविजन टीम के साथ ही राजस्थान में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से लेकर हर संबंधित विभाग में पहले भी की थी. लेकिन इसका खुलासा अब जी राजस्थान के स्टिंग से हुआ.

इस काले खेल से जुड़े कई सवाल हैं. मसलन इस खेल में पंकज गोयल अकेला था या राजस्थान में आधार कियोस्क आवंटन के नाम पर उसने अपना मकड़जाल फैला रखा था? आखिर वो कौन लोग थे, जो पंकज गोयल की शह पर आधार कियोस्क को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे थे?  आधार कियोस्क आवंटन में रिश्वत का यह खेल आखिर होता कैसे था? और महत्वपूर्ण सवाल ये भी कि अभी तक एसीबी की नजरों से बचे हुए सूचना और प्रोद्योगिकी विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी खेल में क्या थी ? मामले में जांच लगातार जारी है.