उदयपुर में सरकारी स्कूलों के इंग्लिश मीडियम हो जाने से कई छात्र परेशान

परिजनों की इस समस्या के बारे में जब हमने स्कूल के प्रधानाचार्य से बात कि तो उन्होने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए दो तरह की व्यवस्था की है. 

उदयपुर में सरकारी स्कूलों के इंग्लिश मीडियम हो जाने से कई छात्र परेशान
बच्चें चाहे तो इस स्कूल से टीसी ले कर अन्य स्कूल में प्रवेश ले सकते है.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: प्रदेश में गरीब बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक नया प्रयोग शुरू किया है. जिससे तहत कुछ हिन्दी माध्यम के स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदला गया है. अब इन स्कूलों में छात्रों अंग्रेजी भाषा में शिक्षा ग्रहण करेंगे. लेकिन सरकार के इस फैसले ने उस स्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया है. जो अब प्रवेश के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल में भटक रहे है. 

शहर के राजकीय धानमण्डी स्कूल में शिक्षा ग्रहण के कर रहे आमिर और अयान रजा को नहीं चाहते हुए भी मजबूरी ने अपना स्कूल छोड़ना पड़ रहा है. कारण अब इस स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाएगा. अब तक हिन्दी की पाठ्य पुस्तकों से शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे अंग्रेजी भाषा की किताब से अध्ययन नहीं कर पाएगें.

ये कहानी केवल इन दोनों भाइयों की नहीं बल्कि स्कूल के अधिकांश बच्चों की है जो पिछले कई वर्षो से इसी स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे. अब इन्हे अपने स्कूल को छोड़ कर अन्यत्र प्रवेश लेना पड़ रहा है. धानमण्डी स्कूल के पास जो दूसरे सरकार स्कूल है उनकी दूरी डेढ़ से दो किलो मीटर है. ऐसे में छोटी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिए परिजनों के सामाने इन समस्या खड़ी हो गई है कि वे अब अपने बच्चों को कहां लेकर जाए. 

बहरहाल बच्चों और परिजनों की इस समस्या के बारे में जब हमने स्कूल के प्रधानाचार्य से बात कि तो उन्होने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए दो तरह की व्यवस्था की है. वह चाहे तो इस स्कूल से टीसी ले कर अन्य स्कूल में प्रवेश ले सकते है. अन्यथा वे नई प्रवेश प्रक्रिया को अपनाते हुए अंग्रेजी माध्यम में बदले गए इसी स्कूल में अपनी पढ़ाई को पूरा कर सकते है. 

हालांकि बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने के लिए शुरू किया गया प्रदेश की सरकार का यह प्रयास जरूर सराहनीय है लेकिन अधूरी तैयारी के लागू की गई इस व्यवस्था कई बच्चों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है. जिसके कारण उन्हे प्रवेश के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है.