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13 साल की उम्र में बेवा हुई शहीद की वीरांगना, 103 साल तक याद में गुजारी जिंदगी

13 साल की उम्र में शादी होने के बाद दूसरे विश्व युद्ध में शहीद हुए पति का इंतजार कर रही झुंझुनूं की इस वीरांगना का 103 साल की उम्र में निधन हो गया.

13 साल की उम्र में बेवा हुई शहीद की वीरांगना, 103 साल तक याद में गुजारी जिंदगी
धनूरी गांव के ताज मोहम्मद खां शादी से पहले फौज में भर्ती हो गए थे.

संदीप केडिया, झुंझुनूं: शहीद वीरांगना सायरा बानो का गत दिनों इंतकाल हुआ है. शहीद वीरांगना सायरा बानो का 103 साल की उम्र में इंतकाल हुआ. वे 13 साल की उम्र में ही बेवा हो गई थी. सम्मान के साथ उन्हें पैतक गांव धनूरी में सुर्पुद ए खाक किया गया. उनके पति ताज मोहम्मद खां दूसरे विश्व युद्ध(Second World War) में शहीद हो गए थे. मलसीसर एसडीएम भी गांव पहुंचे और अकीदत के फूल पेश किए.  

ये ऐसी वीरांगना थी, जिस पर कायमखानी समाज को ही नहीं पूरे देश को नाज हैं. यह वह वीरांगना और वह वीर नारी थी जो सरहद पर दुश्मन से युद्ध करने तो नहीं गई, लेकिन जीवन युद्ध से कम नहीं जिया. इस वीरांगना ने अपनी शादी के कुछ घंटों बाद ही अपने सुहाग (शौहर) को दुश्मनों से युद्ध करने भेज दिया था और वो शहीद(Martyr) हो गए थे. 

सिर्फ देखने को मिली शहीद पति की कैप और वर्दी
इस वीर नारी ने अपने शहीद शौहर की कैप, वर्दी और बेल्ट को ही देखा, पति को नहीं. सेल्युट ऐसी वीर नारी को, जिसने शादी के बाद पति की सूरत तक नहीं देखी और पूरा जीवन पति की याद में ही बीता दिया. इसी बात में खुश रही कि उसका सुहाग देश सेवा में उजड़ा है, इसलिए वह वीरांगना है. उसने दूसरा घर भी नहीं बसाया और अपने शहीद पति के माता पिता की सेवा ही करती रही.

इनके गांव को कहते हैं फौजियों की खान
झुंझुनूं जिले धनूरी गांव की यह वीरांगना सायरा बानो. आज यह वीरांगना इस दुनिया को छोड़ गई हैं. सब को अपनी यादें दे गई. धनूरी गांव को फौजियों की खान भी कहते हैं. धनूरी गांव के ताज मोहम्मद खां शादी से पहले फौज में भर्ती हो गए थे. 

1939 में हुआ था निकाह
बात दूसरे विश्व युद्ध की है. वर्ष 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की बात है. ताज मोहम्मद खां का निकाह सायरा बानो के साथ हुआ था. निकाह के बाद बारात वापस धनूरी गांव पहुंची ही थी. उन्हें तार मिल गया था कि तुरंत ही यूनिट में पहुंचे. उसी शाम को ताज मोहम्मद खां तार मिलते ही फौज में अपनी यूनिट के लिए रवाना हो गए. इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध में ताज मोहम्मद खां शहीद हो गए थे. 

शादी के कुछ दिन बाद हुए थे शहीद
शादी के कुछ दिनों बाद ही ताज मोहम्मद खां शहीद हो गए थे. इस दौरान सायरा बानो की हाथों की मेहंदी भी नहीं सुखी थी और शौहर शहीद हो गए थे. ताज मोहम्मद खां घर नहीं लौटे, सिर्फ उनकी सूचना ही मिल पाई थी कि वे शहीद हो गए हैं. सायरा बानो ने अपने सुहाग का मुंह भी नहीं देखा था. उसने एक पल भी अपने पति के साथ नहीं गुजारा था. 

देश के लिए हैं प्रेरणा
डीएसपी इस्माइल खान बताते है कि वीरांगना सायरा बानो कायमखानी समाज ही नहीं पूरे देश के लिए प्रेरणा है. जिस शौहर को इस वीरांगना ने देखा ही नहीं, उसकी शहादत के गर्व को लेकर ही अपनी जिन्दगी को जी लिया है. ऐसी वीर नारी को सलाम करते हैं. 

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